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लोधेश्वर महादेव धाम में महाशिवरात्रि पर आस्था का महासैलाब, फाल्गुनी मेले में लाखों श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

 

लोधेश्वर मंदिर की बैरीकेडिंग में लगी भारी भीड़।

एडिटर के के शुक्ल/चंद्रोदय अवस्थी रामनगर (बाराबंकी)। फाल्गुन मास के पारंपरिक मेले और महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार को उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध शिवधाम लोधेश्वर महादेव मंदिर में आस्था का विराट संगम देखने को मिला। लाखों श्रद्धालु विभिन्न जनपदों से गंगाजल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, दूध, दही और सुगंधित पुष्प लेकर महादेवा धाम पहुंचे तथा “बम भोले” के जयघोष के बीच भगवान लोधेश्वर महादेव का विधिवत जलाभिषेक किया।

फाल्गुन मास में विशेष रूप से कांवड़िए कठिन पदयात्रा कर नंगे पांव बाराबंकी, लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, जालौन, औरैया, सीतापुर, फतेहपुर, उरई, बिठूर और बहराइच समेत कई जिलों से यहां पहुंचे। साधु-संत, महिला, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में दर्शन के लिए कतारबद्ध नजर आए। अनेक श्रद्धालु शिव पताका के साथ पैदल यात्रा करते दिखे, जबकि कुछ निजी वाहनों से भी पहुंचे।

प्राचीन और चमत्कारी इतिहास

मंदिर के मुख्य पुजारी वीरेंद्र कुमार अवस्थी के अनुसार लोधेश्वर महादेव का इतिहास अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी है। जनश्रुति के अनुसार लोधेराम अवस्थी नामक किसान खेत की जुताई कर रहे थे, तभी एक स्थान पर पानी एकत्र होने लगा। संदेह होने पर खुदाई की गई तो फावड़ा किसी कठोर वस्तु से टकराया और वहां से रक्तधारा प्रवाहित होने लगी। विधिवत खुदाई के बाद शिवलिंग प्रकट हुआ। इसके बाद उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया और नियमित पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई। लोधेराम अवस्थी के नाम पर ही शिवलिंग को लोधेश्वर महादेव कहा जाने लगा।

लोकमान्यता है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां पूजा-अर्चना की थी। मान्यता के अनुसार महाबली भीम बद्रीनाथ-केदारनाथ के पर्वतीय क्षेत्रों से दो शिवलिंग शिलाएं लाए थे, जिनमें से एक की स्थापना धर्मराज युधिष्ठिर ने महादेवा में तथा दूसरी की स्थापना किन्तूर में की थी। कालांतर में गंडक नदी की बाढ़ से शिवलिंग रेत में दब गया। बाद में लोधौरा निवासी ब्राह्मण लोधेराम को स्वप्न में भगवान शिव के दर्शन हुए, जिसके बाद पुनः शिवलिंग की खोज कर मंदिर की स्थापना की गई।

पुजारी आदित्य तिवारी के अनुसार लोधेश्वर महादेव का पूजन चारों युगों में हुआ—सतयुग में भगवान वाराह द्वारा, त्रेता में लव-कुश द्वारा, द्वापर में पांडवों और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा तथा कलियुग में लोधेराम अवस्थी द्वारा।

पूजन सामग्री की सजी आकर्षक दुकानें

महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर के भीतर और बाहर फूल-माला की सैकड़ों दुकानें सजाई गईं। दूर-दूर से आए श्रद्धालु जलाभिषेक से पूर्व दुकानों पर पहुंचकर गेंदा की मालाएं, बेलपत्र, भांग, धतूरा, दूध, दही और अन्य पूजन सामग्री खरीदते नजर आए।

फूल-माला विक्रेता टिंकू माली, पिंटू माली, सरवन और दीनानाथ ने बताया कि फाल्गुनी माह में लाखों शिवभक्त यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक पूजन सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई गई है। महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से भांग, धतूरा और बेलपत्र की मांग बढ़ जाती है।

प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था

महाशिवरात्रि के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। जिला अधिकारी बाराबंकी शशांक त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक अर्पित विजय वर्गी, एडिशनल विकास चंद्र त्रिपाठी, अपर जिला अधिकारी निरंकार सिंह, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रामनगर गुंजिता अग्रवाल, तहसीलदार विपुल सिंह, नायब तहसीलदार विजय प्रकाश तिवारी, क्षेत्राधिकारी गरिमा पंत, थाना प्रभारी रामनगर अनिल कुमार पांडे, चौकी प्रभारी अभिनंदन पांडे सहित राजस्वकर्मी एवं पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर मौजूद रहे।

सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सुविधा और पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिससे श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन-पूजन का अवसर मिल सका। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तिभाव, उत्साह और धार्मिक उल्लास का वातावरण बना 

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