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निन्दूरा के बांकरपुर में श्रीराम कथा का शुभारंभ, सत्संग की महिमा पर बोले कथावाचक

रिपोर्ट/विवेक शुक्ला

बाराबंकी। क्षेत्र के ग्राम बांकरपुर में आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा का शुभारंभ भक्तिमय वातावरण में हुआ। प्रथम दिवस कथावाचक चन्द्रशेखर महाराज जी ने सत्संग की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि सत्संग में किसी कौम, मजहब या व्यक्ति विशेष की निंदा या आलोचना नहीं की जाती, बल्कि केवल प्रभु नाम की महिमा का गुणगान होता है।उन्होंने कहा कि मनुष्य को यह विचार करना चाहिए कि हम इस दुनिया में किस उद्देश्य से आए हैं, हमारा वास्तविक स्वरूप क्या है और मृत्यु के बाद हमें कहां जाना है। उन्होंने कहा कि लोग सांसारिक सुखों में जीवन व्यर्थ गँवाते चले जाते हैं और कभी आत्मचिंतन नहीं करते। संत सद्गुरु ही मनुष्य को सही मार्ग दिखाते हैं।कथावाचक ने कहा कि जब मनुष्य मां के गर्भ में कष्ट झेल रहा होता है, तब वह प्रभु से वादा करता है कि जन्म के बाद भजन करेगा, लेकिन संसार में आकर सब भूल जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभु प्राप्ति के लिए साधु बनना या गृहस्थ जीवन छोड़ना आवश्यक नहीं है। खेती, दुकान, नौकरी या अन्य कार्य ईमानदारी से करते हुए, परिवार की सेवा और अतिथियों का सत्कार करते हुए भी प्रतिदिन एक-दो घंटे प्रभु भजन किया जा सकता है। यही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।उन्होंने संतों की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि संत कबीर दास, दादू बाबा, जयगुरुदेव साहेब, जगजीवन दास, मीराबाई और रसखान जैसे महापुरुषों ने भक्ति मार्ग अपनाकर समाज को दिशा दी।अशुद्ध खान-पान और नशीले पदार्थों के सेवन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में भयंकर बीमारियां उत्पन्न होंगी, जिनका इलाज डॉक्टरों के पास भी नहीं होगा। उन्होंने लोगों से शाकाहार अपनाने और नशा त्यागने की अपील करते हुए स्वस्थ व संस्कारित समाज के निर्माण में सहयोग करने का आह्वान किया।इस अवसर पर रामकुमार (बाबू जी), भानु प्रताप, रामखेलावन, डॉ. रूपचन्द्र, सुरेश कुमार, मा. उपेन्द्र, सीताराम, उत्तम कुमार, वीरेंद्र, राजीव, मनीष सहित तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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