रिपोर्ट/विवेक शुक्ला
रामनगर बाराबंकी।ग्राम सीहामऊ निवासी आयोजक रामकुमार अवस्थी द्वारा श्रीराम-जानकी मूर्ति स्थापना के उपलक्ष्य में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के छठे दिन कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला। इस अवसर पर आचार्य पूज्य वेद प्रकाश बाजपेई जी महाराज ने सीता स्वयंवर प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरक वर्णन किया।कथा के दौरान आचार्यश्री ने कहा कि “सीता स्वयंवर केवल धनुष उठाने की घटना नहीं है, बल्कि यह धर्म, मर्यादा और पुरुषार्थ की विजय का उत्सव है। जहां अहंकार झुक गया और विनय ने विजय प्राप्त की, वहीं प्रभु श्रीराम ने शिव धनुष धारण कर नारी सम्मान और आदर्श गृहस्थ धर्म की नींव रखी।” उन्होंने आगे कहा कि “सीता स्वयंवर यह सिखाता है कि योग्यता शोर नहीं मचाती, वह मौन में भी विजय पा लेती है।पूज्य संतशिरोमणि, वेदवेदांग पारंगत एवं श्रीरामकथा के प्रख्यात प्रवक्ता वेद प्रकाश बाजपेई जी महाराज की अमृतवाणी से कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा श्रवण के लिए दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विद्वानजन, धर्मप्रेमी श्रद्धालु, मातृशक्ति एवं भक्तवृंद उपस्थित रहे। आयोजक रामकुमार अवस्थी सहित ग्रामवासी श्रोता गणों ने श्री राम माता जानकी के विवाह के उपलक्ष्य में विभिन्न प्रकार के उपहार भी दिए। आयोजन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि श्रीराम कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को मर्यादा, सेवा और सदाचार के पथ पर अग्रसर करने का माध्यम है। आज का यह पुण्य अवसर सभी के लिए धर्म, ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करता है।कथा के समापन पर आयोजक एवं श्रद्धालुओं द्वारा पूज्य गुरुदेव के श्रीमुख से निसृत अमृतवाणी के श्रवण को जीवन का सौभाग्य बताते हुए उनके प्रति श्रद्धा व सम्मान प्रकट किया गया। सात दिवसीय श्रीराम कथा का क्रम आगामी दिनों में भी विभिन्न प्रसंगों के साथ जारी रहेगा। कार्यक्रम में माधव प्रसाद अवस्थी भगवान दीन कौशल कुमार इंद्र नारायण दिनेश चंद्र लालता प्रसाद राजेंद्र कुमार विष्णु कुमार शास्त्री सुशील संतोष तिवारी प्रमोद कुमार पुरषोत्तम रामू मिश्रा लीलाधर संजय निर्मल अवस्थी विजय प्रेमशंकर श्यामू राम शंकर रवि शंकर प्रदीप विवेक रजनीश रवी विमल शुभम जीत भानू संचित रोहित सहित भारी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे।































