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राम जन्म प्रसंग से भक्तिमय हुआ सीहामऊ, कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

रिपोर्ट/विवेक शुक्ला

रामनगर (बाराबंकी)। ग्राम सीहामऊ में श्रीराम–जानकी मूर्ति स्थापना के उपलक्ष्य में आयोजित सात दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा के चौथे दिन सोमवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी भक्तिभाव में लीन नजर आए।आयोजक रामकुमार के संयोजन में राम–जानकी मंदिर में मूर्ति स्थापना की पूजा आचार्य अरविंद कुमार बाजपेई द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराई गई। इस दौरान अन्नवास सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी कराए गए।कथावाचक गुरुदेव वेदप्रकाश बाजपेई ने श्रीराम जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पावन अवतरण की कथा सुनने के लिए एकत्र हुए हैं। श्रीराम केवल अयोध्या के राजा नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए आदर्श जीवन के शाश्वत प्रतीक हैं।उन्होंने बताया कि त्रेता युग में अधर्म और अन्याय के बढ़ने पर देवताओं की पुकार पर भगवान विष्णु ने मानव रूप में अवतार लेने का संकल्प लिया। अयोध्या नरेश राजा दशरथ के यहां वशिष्ठ मुनि के निर्देशन में पुत्रेष्ठि यज्ञ संपन्न हुआ, जिसकी दिव्य खीर से महारानी कौशल्या से श्रीराम, कैकेयी से भरत तथा सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। चैत्र शुक्ल नवमी, पुनर्वसु नक्षत्र और मध्यान्ह काल में भगवान श्रीराम का अवतरण हुआ, जिसे धर्म के अवतरण का क्षण बताया गया।कथावाचक ने कहा कि श्रीराम का जन्म केवल उत्सव नहीं, बल्कि सेवा, वचन पालन, पिता की मर्यादा और प्रजा को परिवार मानने वाले आदर्श राजा का संदेश है। उन्होंने वर्तमान समय में पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि राम जन्म कथा जीवन जीने की कला सिखाती है।अंत में श्रद्धालुओं से आह्वान किया गया कि श्रीराम को केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि अपने आचरण, व्यवहार और विचारों में भी प्रतिष्ठित करें। कथा के दौरान जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। राम जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में ग्रामीणों द्वारा विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग व प्रसाद वितरण भी किया गया।कार्यक्रम को सफल बनाने में कौशल कुमार, भगवान दीन, विजय अवस्थी, प्रदीप कुमार, प्रमोद कुमार, रामजी, रामशंकर, रविशंकर, दीपक कुमार व भानू सहित अन्य श्रद्धालुओं का विशेष योगदान रहा

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