ग्रेटर नोएडा के सेक्टर Pi-1 स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा पर किसानों ने उनके व्यक्तिगत बचत और फिक्स्ड डिपॉजिट खातों से बिना अनुमति के लगभग 35 करोड़ रुपये निकालने का आरोप लगाया है। यह कथित वित्तीय धोखाधड़ी उन पैसों से जुड़ी है जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए जमीन मुआवजे के रूप में मिले थे।
खाताधारकों ने तब विरोध प्रदर्शन शुरू किया जब उन्होंने अपनी बचत निकालने की कोशिश की और पाया कि उनके पैसे गायब हैं। द इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे, द इकोनॉमिक टाइम्स, द स्टेट्समैन, द वीक, द प्रिंट और पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस गड़बड़ी से कम से कम 16 से 25 ग्राहक प्रभावित हुए हैं। इनमें मुख्य रूप से बिरौंडी, बिरोंडा, विरौंडी चक्रसेनपुर और अच्चर गांवों के लोग शामिल हैं।
खातों से गायब हुए करोड़ों रुपये
पैसे गायब होने का पता 27-28 अक्टूबर 2026 के आसपास चला, जब ग्राहक बैलेंस चेक करने या पैसे निकालने बैंक पहुंचे। खाताधारकों ने बताया कि बिना किसी SMS अलर्ट, OTP या हस्ताक्षरित विड्रॉल फॉर्म के उनकी बचत गायब हो गई। कुछ ग्राहकों ने यह भी गौर किया कि अनधिकृत गतिविधि के समय उनकी SMS सेवाएं बंद थीं।
- संतोष के 1.18 करोड़ रुपये गायब हुए।
- श्रीचंद के 1.16 करोड़ रुपये की हानि हुई।
- विजयेंद्र सिंह के 87 से 88 लाख रुपये घटकर केवल 1 लाख रुपये रह गए।
- हनीफ खान के 39 लाख रुपये गायब हुए।
पुलिस कार्रवाई और बैंक की आंतरिक जांच
पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 को बीटा-2 पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) के तहत FIR दर्ज की है, जो बैंककर्मी या लोक सेवक द्वारा विश्वासघात से संबंधित है। धोखाधड़ी के बड़े पैमाने को देखते हुए इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) के इस जांच में बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद है।
PNB क्षेत्रीय प्रबंधन ने शाखा प्रबंधक सहित पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और कामकाज संभालने के लिए नए कर्मियों की नियुक्ति की है। बैंक अधिकारियों ने कहा कि पुलिस जांच के साथ-साथ एक औपचारिक आंतरिक जांच भी चल रही है। बैंक ने हालांकि सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन ग्राहकों को आश्वासन दिया है कि सत्यापित खातों में एक सप्ताह के भीतर पैसे लौटा दिए जाएंगे। पुलिस ट्रांजैक्शन लॉग, CCTV फुटेज और स्टाफ के डिवाइस की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अनधिकृत ट्रांसफर और FD क्लोजर कैसे किए गए।
ग्रामीण जमाकर्ताओं पर प्रभाव
इनमें से कई किसान अपने परिवार के इलाज या दैनिक खर्चों के लिए मुआवजे की राशि पर निर्भर थे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पर भरोसा करने वाले जमाकर्ताओं के लिए इस स्थिति ने नकदी का संकट पैदा कर दिया है। ग्राहक पूर्ण जवाबदेही और जमा राशि की तत्काल वापसी की मांग को लेकर अच्चर शाखा के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
ट्रांजैक्शन अलर्ट जैसे डिजिटल सुरक्षा उपायों की कमी ने शाखा के आंतरिक नियंत्रण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि DICGC के माध्यम से जमा बीमा प्रति जमाकर्ता 5 लाख रुपये तक कवर करता है, लेकिन इस मामले में कई दावे उस सीमा से काफी अधिक हैं। अधिकारियों ने सभी पीड़ितों को अपनी पासबुक और दस्तावेज सुरक्षित रखने तथा जांच में सहयोग करने की सलाह दी है। पुलिस बैंक लॉग के सबूतों के आधार पर चार्जशीट तैयार करेगी। अन्य खाताधारकों द्वारा शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं और पीड़ितों को बैंक तथा कानून प्रवर्तन की अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।









