प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2,300 करोड़ रुपये के ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट की जांच के सिलसिले में कर्नाटक कांग्रेस विधायक केसी वीरेंद्र की 23.35 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। यह कार्रवाई उन अवैध प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जांच का हिस्सा है, जिन्होंने कथित तौर पर शेल कंपनियों और हवाला चैनलों के जरिए मासूम लोगों से भारी रकम निकाली।
बेंगलुरु जोनल ऑफिस के अधिकारियों ने 23 अक्टूबर 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया। इस कार्रवाई की सार्वजनिक रिपोर्ट 27 और 28 अक्टूबर 2026 के बीच सामने आई। इस आदेश में 13.76 करोड़ रुपये की बैंक जमा और निवेश जैसी चल संपत्ति और 9.58 करोड़ रुपये की रियल एस्टेट और जमीन जैसी अचल संपत्तियां शामिल हैं।
सट्टेबाजी सिंडिकेट और सबूत
अधिकारियों ने इस ऑपरेशन से जुड़े 2,300 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध अपराध की कमाई की पहचान की है। द हिंदू, द इंडियन एक्सप्रेस, ANI और डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, यह रैकेट King567 और Raja567 जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए चलाया जा रहा था।
- इन ऐप्स में खिलाड़ियों को पैसे जमा करने के लिए लुभाया जाता था।
- इसके बाद गेम के नतीजों में हेरफेर किया जाता था।
- उपयोगकर्ताओं का नुकसान सुनिश्चित करने के लिए विड्रॉल रिक्वेस्ट ब्लॉक कर दी जाती थी।
जांचकर्ताओं ने पाया कि यह सिंडिकेट म्यूल बैंक खातों, पेमेंट गेटवे और ऑफशोर संस्थाओं के एक जटिल जाल के जरिए फंड ट्रांसफर करता था। गुलशन खट्टार, जो Fonepaisa Payment Solutions Private Limited से जुड़े हैं, ने कथित तौर पर गेटवे सेवाएं देने के लिए कमीशन शुल्क प्राप्त किया। सिमीटेक और सनटेक आईटी सॉल्यूशंस की डायरेक्टर नेहा टंडन का नाम भी जांच में आया है, एजेंसी का दावा है कि उनके पति का इन फर्मों पर वास्तविक नियंत्रण था।
केसी वीरेंद्र चित्रदुर्ग निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्हें अक्सर वीरेंद्र पप्पी के नाम से जाना जाता है। मीडिया रिपोर्टों में उन्हें कन्नड़ अभिनेता डोडन्ना का दामाद और कर्नाटक मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का सहयोगी बताया गया है। केंद्रीय जांचकर्ताओं ने 23 अगस्त 2025 को गंगटोक, सिक्किम में उन्हें गिरफ्तार किया था, जब वे कैसीनो लीजिंग से जुड़ी यात्रा पर थे, हालांकि 30 दिसंबर 2025 को उन्हें सशर्त जमानत पर रिहा कर दिया गया।
जांच की वर्तमान स्थिति
एजेंसी ने अपनी चल रही जांच के तहत 60 से अधिक अलग-अलग परिसरों की तलाशी ली है। 18 अक्टूबर 2025 को एक औपचारिक अभियोजन शिकायत दर्ज की गई थी, जिसके बाद 20 फरवरी 2026 को एक पूरक शिकायत दर्ज की गई। 4 मई 2026 को एक विशेष अदालत ने इस मामले का आधिकारिक संज्ञान लिया।
इस ताजा कार्रवाई के बाद इस मामले में कुल जब्त संपत्तियों का मूल्य 343 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। पिछले प्रोविजनल अटैचमेंट में लगभग 177.3 करोड़ रुपये शामिल थे, जिसकी पुष्टि एडजूडिकेटिंग अथॉरिटी ने की है। 29 जनवरी 2026 को एक अलग आदेश में Fonepaisa से जुड़े 33 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए थे।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ये कुर्की प्रारंभिक कदम हैं ताकि ट्रायल के दौरान संपत्तियों के मूल्य को सुरक्षित रखा जा सके। अंतिम जब्ती अदालत के फैसले और लाभकारी स्वामित्व के सत्यापन पर निर्भर करती है। वर्तमान कुर्की को प्रभावित पक्षों द्वारा कानूनी चुनौती दी जा सकती है। भविष्य की कार्यवाही संभवतः 2,300 करोड़ रुपये के अवैध फंड के शेष हिस्सों का पता लगाने पर केंद्रित होगी। विशेष PMLA कोर्ट इस मामले की निगरानी कर रहा है और आने वाले हफ्तों में विधायक और उनके सहयोगियों की जांच से राजनीतिक असर पड़ने की संभावना है।









