बाराबंकी के रामनगर में बुधवार को श्री राम कथा के दूसरे दिन वक्ता अतुल कृष्ण भारद्वाज ‘महाराज’ ने पारिवारिक जीवन और आध्यात्मिकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सलाह दी कि व्यक्तियों को भगवान शिव से गृहस्थ जीवन जीने का तरीका सीखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मनुष्य भौतिक सुखों की चाह में अक्सर कदाचार, भ्रष्टाचार और अनैतिकता जैसे दोषों में फंसकर जीवन के उद्देश्य को भूल जाते हैं, जिससे वे जन्म और मृत्यु के चक्र में फंसे रहते हैं।
भक्ति और आपसी रिश्तों की अहमियत
भारद्वाज ने बताया कि कलियुग में श्रीमद्भागवतम और रामचरितमानस संसार रूपी सागर को पार करने के साधन हैं। राम नाम के जाप और सत्संग के जरिए ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता आसान हो जाता है।
पारस्परिक संबंधों पर चर्चा करते हुए उन्होंने पति-पत्नी के बीच आपसी समझ, संयम और धैर्य की आवश्यकता बताई। उन्होंने परिवारों से विवादों को शांत मन से सुलझाने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि छोटी-छोटी बातों पर झगड़े रिश्तों की गरिमा को कम करते हैं।
उन्होंने जोर दिया कि माता-पिता, जीवनसाथी और बच्चों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए परिवार की एकता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
जीवन के आश्रम और आध्यात्मिक मार्ग
भारद्वाज ने कहा कि मनुष्य की औसत आयु 70 वर्ष होती है और इसके बाद का कोई भी समय बोनस है। उन्होंने जीवन के चार आश्रमों का सही उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने समझाया कि ‘संन्यास’ का अर्थ परिवार का त्याग करना नहीं है, बल्कि अपने घर को ही वैकुण्ठ बनाने का प्रयास करना है।
उन्होंने हनुमान जी के उदाहरण का पालन करते हुए निरंतर भगवान के नाम का जाप और गान करने की सलाह दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शरीर अस्थायी है, लेकिन आत्मा का ईश्वर के साथ संबंध शाश्वत है। उन्होंने ‘सियाराम में सब जग जानी’ के सिद्धांत का समर्थन करते हुए कहा कि सभी जीवों में ईश्वर को देखना चाहिए।
इस कार्यक्रम में मेजबान रविकांत पांडेय और उनकी पत्नी पूनम पांडेय के साथ शहर अध्यक्ष रामशरण पाठक, टिकैतनगर अध्यक्ष जगदीश कुमार गुप्ता, संतोष सिंह, श्रवण पांडेय, कमलेश पांडेय, निखिल, अखिल, अनुपम पांडेय, पवन ओझा, सत्यम ओझा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।









