नेपाल के जनकपुर धाम से शुरू हुए एक जागरूकता अभियान के तहत साइकिल चालकों की 15 सदस्यीय टीम, जिसमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं, बुधवार को बाराबंकी के रामसनेही घाट पहुंची। ‘प्रकृति ही ईश्वर है’ थीम पर आधारित इस रैली का नेतृत्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी कर रहे हैं।
पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता रत्नेश कुमार के समन्वय में टीम का स्वागत तहसीलदार शशांक कांत उपाध्याय और नगर पंचायत अध्यक्ष डॉ. ज्ञान प्रकाश यादव ने किया। इस दौरान टीम के सदस्यों को माला, तिलक और पारंपरिक अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
पर्यावरण जागरूकता के लिए 58 दिनों की यात्रा
यह 58 दिनों का अभियान सात राज्यों से होकर गुजरेगा और उत्तराखंड के देहरादून में समाप्त होगा। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना, नागरिकों को प्रकृति से फिर से जोड़ना और पारिस्थितिक संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है।
डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने जोर देकर कहा कि प्रकृति और दिव्यता अलग नहीं हैं और मानव अस्तित्व पूरी तरह से प्राकृतिक दुनिया पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि जिस तरह ईश्वर के प्रति श्रद्धा होती है, वैसी ही श्रद्धा प्रकृति के प्रति भी होनी चाहिए, क्योंकि ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक पर्यावरण का गंभीर क्षरण हो रहा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल चर्चा से काम नहीं चलेगा, बल्कि वास्तविक बदलाव के लिए व्यवहार और जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। इस अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण को एक जन आंदोलन बनाने के लिए सात राज्यों में विभिन्न समूहों के साथ संवाद किया जा रहा है। डॉ. जोशी ने बताया कि उन्होंने इन पहलों के बारे में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी चर्चा की है।
रामसनेही घाट पर आयोजित स्वागत कार्यक्रम में भाजपा जिला सचिव रूपी प्रताप सिंह, अमर बहादुर सिंह और दिनेश तिवारी सहित कई स्थानीय लोग शामिल हुए। उन्होंने साइकिल चालकों के साथ मिलकर जनता से पर्यावरण चेतना को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।









