राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने 29 अक्टूबर 2026 को एक सरकारी कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। उस पर 2022 की फिजिकल एजुकेशन टीचर (PTI) भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट के तौर पर शामिल होने का आरोप है।
यह गिरफ्तारी एक संगठित धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़ी है, जिसमें मध्य प्रदेश की एक निजी यूनिवर्सिटी द्वारा जारी 66 फर्जी डिग्री शामिल हैं। इन डिग्रियों की मदद से अयोग्य लोगों ने राज्य के शिक्षण पदों पर कब्जा किया था।
लाखों रुपये लेकर दी परीक्षा
ADG विशाल बंसल ने पुष्टि की है कि आरोपी 45 वर्षीय जूनियर असिस्टेंट वीरमा राम बिश्नोई ने असली उम्मीदवार भारमल राम की जगह परीक्षा देने के लिए 12 लाख रुपये लिए थे। इसके बाद भारमल राम को राज्य शिक्षा विभाग में फिजिकल एजुकेशन टीचर का पद मिल गया।
जांच में पता चला है कि वेरिफिकेशन के दौरान उम्मीदवार द्वारा जमा की गई डिग्री मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्य साई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज से थी। बिश्नोई ने पुलिस हिरासत में जाने से पहले स्थानीय अदालत में सरेंडर किया था।
अधिकारियों के अनुसार, बिश्नोई पहले भी ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है। उस पर जालोर जिले में साल 2004 की सीनियर सेकेंडरी परीक्षा में डमी कैंडिडेट के रूप में भूमिका निभाने का आरोप है।
यूनिवर्सिटी के बड़े अधिकारी गिरफ्तार
SOG जांचकर्ताओं ने इस डिग्री रैकेट का खुलासा करते हुए सीहोर स्थित यूनिवर्सिटी के तीन बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें कुलपति मुकेश तिवारी, परीक्षा नियंत्रक संजय राठौर और एक कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं।
यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड के फॉरेंसिक ऑडिट में फीस लेजर के साथ छेड़छाड़ और पिछली तारीखों में दर्ज प्रविष्टियां पाई गईं। कथित तौर पर इन दस्तावेजों के जरिए उन चुनिंदा उम्मीदवारों को 66 फर्जी डिग्री दी गईं, जिन्होंने 2022 की PTI परीक्षा पास की थी।
राजस्थान स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड (RSSB) ने 25 दिसंबर 2022 को इस भर्ती प्रक्रिया का संचालन किया था। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान भारमल राम ने पहले किसी अन्य संस्थान का जिक्र किया और फिर श्री सत्य साई यूनिवर्सिटी की फर्जी B.P.Ed डिग्री पेश की।
भर्ती धोखाधड़ी की व्यापक जांच
SOG के आंकड़ों के अनुसार यह मामला भर्ती धोखाधड़ी की एक बड़ी जांच का हिस्सा है। इसमें 2020 की फॉरेस्ट गार्ड भर्ती और मेडिकल रजिस्ट्रेशन की अनियमितताएं भी शामिल हैं।
ऐसे घोटाले सार्वजनिक परीक्षाओं की ईमानदारी को नुकसान पहुंचाते हैं, जो लाखों उम्मीदवारों के करियर का मुख्य रास्ता होते हैं। जब डमी कैंडिडेट सिस्टम में घुस जाते हैं, तो राज्य उन लोगों की सैलरी पर सरकारी पैसा खर्च करता है जो ईमानदारी से तैयारी कर चयन पाने के योग्य नहीं थे।
इन रैकेटों के कारण कक्षाओं में कम योग्य शिक्षक पहुँच रहे हैं, जिससे बच्चों को मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के सुझाव
पुलिस विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर कमजोर पहचान सत्यापन और निजी यूनिवर्सिटी की डिग्री जारी करने की सीमित बाहरी ऑडिटिंग के कारण ये रैकेट पनपते हैं। सिस्टम को मजबूत करने के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं:
- बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू करना।
- सभी केंद्रों पर रियल-टाइम CCTV मॉनिटरिंग अनिवार्य करना।
- स्वतंत्र डिग्री ऑथेंटिकेशन पाइपलाइन शुरू करना।
राज्य शिक्षा विभाग अब उन सभी कार्यरत शिक्षकों के खिलाफ औपचारिक विभागीय कार्यवाही शुरू कर सकता है, जिनके पास फर्जी योग्यता पाई गई है। SOG अधिकारी इस मामले से जुड़े ब्रोकरों और अन्य लाभार्थियों के नेटवर्क का पीछा कर रहे हैं।
आगे की जांच से यह पता लगाया जाएगा कि क्या इंजीनियरिंग, मेडिसिन और B.E.d जैसे अन्य प्रोफेशनल कोर्स के लिए भी इसी तरह की फर्जी डिग्री पाइपलाइन काम कर रही है।









