Tata Motors और Amazon ने 27 अक्टूबर, 2026 को भारत में Amazon लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के लिए 3,000 इलेक्ट्रिक ट्रक पेश करने के सहयोग की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य इलेक्ट्रिक फ्रेट ऑपरेशंस को मौजूदा लास्ट माइल डिलीवरी मॉडल से आगे बढ़ाकर 2040 तक Amazon के नेट जीरो कार्बन लक्ष्य को हासिल करने में मदद करना है।
यह साझेदारी एक सप्लाई और ऑपरेट मॉडल पर आधारित है, जिसमें Tata Motors वाहन उपलब्ध कराएगा और कैरियर पार्टनर्स दैनिक कामकाज का प्रबंधन करेंगे। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, इस बेड़े में Ultra E.7 मॉडल शामिल होगा। Amazon को उम्मीद है कि अगले एक साल में भारत में उसके कुल इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 20,000 यूनिट से अधिक हो जाएगी।
दिल्ली से बेंगलुरु और चेन्नई तक विस्तार की योजना
ऑपरेशंस की शुरुआत दिल्ली से त्योहारों के सीजन के साथ हो रही है। इस समय का चुनाव दिल्ली सरकार द्वारा दिए जा रहे पॉलिसी इंसेंटिव का लाभ उठाने के लिए किया गया है, जिसमें मीडियम ड्यूटी इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए एंट्री छूट शामिल है। यह पहल दिल्ली से बेंगलुरु और चेन्नई तक के 2,800 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को कवर करने की एक बड़ी योजना का पायलट प्रोजेक्ट है।
इंडस्ट्री एनालिस्ट्स का कहना है कि डीजल पर निर्भरता कम करने और फ्यूल सिक्योरिटी सुधारने के लिए फ्रेट को इलेक्ट्रिक पावर पर शिफ्ट करना जरूरी है। इस प्रोजेक्ट की सफलता हाई स्पीड चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर निर्भर करती है। इन ट्रांसपोर्ट हब के लिए चार्जिंग सपोर्ट देने में Yahhvi जैसी कंपनियां शामिल हैं।
संचालन की चुनौतियां और मुख्य फोकस क्षेत्र
इलेक्ट्रिक ट्रकों की ओर बढ़ने में कंपनियों को कई ऑपरेशनल चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। स्टेकहोल्डर्स के लिए फोकस के मुख्य क्षेत्र इस प्रकार हैं:
- सात राज्यों में फैले NH48 कॉरिडोर पर घने फास्ट चार्जिंग नेटवर्क का विकास।
- डीजल विकल्पों की तुलना में फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए कुल ओनरशिप लागत का निर्धारण।
- लॉजिस्टिक्स ड्राइवरों और फ्लीट मैनेजर्स के लिए विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था।
- लॉन्ग हॉल परफॉर्मेंस के लिए बैटरी रेंज और पेलोड क्षमता की निगरानी।
- लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में लंबे समय तक होने वाली एमिशन बचत का आकलन।
जैसे-जैसे यह बदलाव तेज होगा, पारंपरिक डीजल ट्रक ऑपरेटर्स पर प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ेगा। यदि कमर्शियल कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता बढ़ती है, तो इन फ्लीट मालिकों और फ्यूल सप्लायर्स की मार्केट हिस्सेदारी कम हो सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पर्यावरणीय प्रभाव सकारात्मक है, लेकिन देशभर में रोलआउट की सटीक समयसीमा पर अब भी सवालों के जवाब ढूंढने होंगे।
यह सहयोग Business Standard, CNBC TV18 और Mercom India के मौजूदा डेटा पर आधारित है, जिन्होंने 3,000 ट्रकों के लक्ष्य और डिप्लॉयमेंट रणनीति की पुष्टि की है। भविष्य के चरणों में चार्जिंग हब का विस्तार और ट्रकों को नेशनल हाईवे नेटवर्क से जोड़ना शामिल है। भविष्य में बेड़े में और गाड़ियां जोड़ने की रफ्तार परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग से तय होगी।









