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महादेवा महोत्सव में भजनों व लोकगीतों ने बांधा समा

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Naradsamvad - Narad news Agency
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रामनगर बाराबंकी। महादेवा महोत्सव का सांस्कृतिक पांडाल बुधवार की रात भक्ति और लोकधुनों से गूँज उठा, जब पूर्णिमा एवं सरगम ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में मशहूर लोकगायिका पुष्पा त्रिवेदी ने अपने सहयोगी कलाकारों के साथ एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियाँ दीं। जैसे ही कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पा त्रिवेदी के मार्मिक भजन “करुणा निधान रउवा जगत के दाता” से हुई, श्रोताओं ने श्रद्धा भाव से तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया।

इसके बाद जब उन्होंने “मेरी विनती सुनो सांवरे राम जी” प्रस्तुत किया, तो पूरा पांडाल भक्ति रस में भाव–विभोर हो उठा। लोकगीत “तोहार दूल्हा गौरा सबसे निराला” की ऊर्जामयी प्रस्तुति ने वातावरण में उत्साह भर दिया और दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट से पांडाल गुंजायमान करते रहे।

कार्यक्रम में तेजस्वी त्रिवेदी ने शिव भक्ति से ओतप्रोत गीत “लाईके शिव के मनाई हो” प्रस्तुत कर भक्तिमय माहौल को और गहराई दी। वहीं आशा त्रिवेदी ने महादेवा लोधेश्वर धाम की महिमा का वर्णन करते हुए गीत “चलो चली भइय्या महादेवा लोधेश्वर की शिवनगरी” से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

पूरी प्रस्तुतियों में संगीत टीम का उत्कृष्ट सहयोग रहा। मंच पर कीबोर्ड पर गौरव मिश्रा, ढोलक पर अंकुल यादव, पैड पर दीपक श्रीवास्तव और कोरस में सचिन शर्मा ने अपनी लय और ताल से हर गीत को और भी प्रभावशाली बना दिया। कलाकारों की संगति इतनी सुरीली और सधी हुई थी कि दर्शक देर तक मंत्रमुग्ध होकर तालियाँ बजाते रहे।

रात देर तक चले इस कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि महादेवा महोत्सव की यह संध्या उन्हें लंबे समय तक याद रहेगी। आयोजकों ने कलाकारों को सम्मानित करते हुए उनके योगदान को सराहा और बताया कि ऐसे कार्यक्रम महोत्सव की शोभा बढ़ाते हैं तथा लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं।

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