नारद संवाद न्यूज़।बाराबंकी में हाजी वारिस अली शाह की विश्वप्रसिद्ध दरगाह पर करीब 120 वर्षों से चली आ रही पारंपरिक होली को लेकर बना संशय समाप्त हो गया है। इस वर्ष भी होली का आयोजन पूर्व परंपरा के अनुसार फूलों और गुलाल से किया जाएगा। करीब 40 वर्षों से जुलूस का नेतृत्व कर रही वारसी होली समिति द्वारा आयोजन से किनारा किए जाने के बाद कार्यक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी। इसके बाद स्थानीय लोगों ने नई कमेटी का गठन कर आयोजन की जिम्मेदारी संभाली। कमेटी अध्यक्ष पंडित अवध किशोर मिश्रा ने बताया कि होली जुलूस सुबह 9 बजे कौमी एकता गेट से रवाना होकर निर्धारित मार्गों से होते हुए दोपहर 12:10 बजे दरगाह परिसर पहुंचेगा, जहां फूलों और गुलाल से होली खेली जाएगी। 12:45 बजे जुलूस का समापन होगा। आयोजकों ने लोगों से शांति, आपसी भाईचारे और स्वेच्छा से होली खेलने की अपील की है। वहीं पूर्व अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि वृद्ध होने के चलते अब यह जिम्मेदारी नई पीढ़ी को सौंपी गई है जिससे ऊर्जावान नौजवान अब इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे ,,जो लोग यह भ्रम फैला रहे है कि देवां में खेली जानी वाली ऐतिहासिक होली नहीं होगी वे गैरजिम्मेदाराना हरकत कर रहे हैं ऐसा कुछ नहीं है आयोजन पूर्व की ही भांति निरंतर चलता रहेगा यह कौमी एकता का प्रतीक है जहां दूर दूर से लोग सम्मिलित होने आते हैं ।































