Skip to main content

Naradsamvad

[post-views]

“बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच ‘नए गांधी’ की तलाश: शांति और संवाद के नेतृत्व का गहराता संकट”

उत्तर प्रदेश रामनगर बाराबंकी।

Ad image

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हिंदी दैनिक आज (रामकुमार शुक्ला)

विश्व स्तर पर बढ़ते तनाव और संघर्षों के बीच एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति उभरकर सामने आ रही है।प्रबुद्ध जनों सामाजिक चिंतकों और शांतिप्रिय नागरिकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अहिंसा संवाद और शांति का संदेश देने वाले सशक्त नेतृत्व का अभाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है।विशेष रूप से ईरान इज़रायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने विश्व शांति को लेकर चिंताओं को और गहरा कर दिया है।स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि इतिहास साक्षी रहा है कि जब-जब विश्व संकट में पड़ा तब तब महान व्यक्तित्वों ने अहिंसा और सत्य के मार्ग से समाज को दिशा दी।महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के बल पर स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी वहीं मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला ने भी समानता न्याय और शांति के लिए संघर्ष करते हुए पूरी दुनिया को प्रेरित किया। इन नेताओं की विचारधारा केवल उनके देशों तक सीमित नहीं रही बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और सहअस्तित्व का संदेश बनी।हालांकि वर्तमान समय में ऐसे प्रभावशाली शांतिदूतों की कमी महसूस की जा रही है।आज की वैश्विक राजनीति अधिकतर शक्ति प्रदर्शन सैन्य संतुलन और रणनीतिक हितों के इर्द-गिर्द केंद्रित होती जा रही है जिससे संवाद और कूटनीति का महत्व कहीं पीछे छूटता नजर आता है।वसुधैव कुटुंबकम् जैसे भारतीय दर्शन जो पूरे विश्व को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है अब केवल भाषणों और विचारों तक सीमित होता जा रहा है।रामनगर क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आज आवश्यकता ऐसे नेतृत्व की है जो केवल अपने देश के हितों तक सीमित न रहकर वैश्विक शांति और मानवता को प्राथमिकता दे।उनका मानना है कि यदि विश्व के नेता इस सिद्धांत को व्यवहार में उतारें तो बड़े से बड़े संघर्षों को भी संवाद और समझदारी के माध्यम से रोका जा सकता है।विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि शांति स्थापित करने की जिम्मेदारी केवल सरकारों या नेताओं की ही नहीं है बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की भी उतनी ही भूमिका है।यदि आम नागरिक सामाजिक संगठन और विशेषकर युवा वर्ग अहिंसा सहिष्णुता और आपसी सम्मान के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं तो विश्व स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन संभव है।आज के डिजिटल युग में जब लोगों के पास सोशल मीडिया जैसे अनेक सशक्त मंच उपलब्ध हैं तब भी विश्व शांति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक जनचर्चा और पहल का अभाव दिखाई देता है।यह स्थिति कहीं न कहीं समाज की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़ा करती है।गौरतलब है कि भारत सदैव से शांति और सहअस्तित्व का संदेश देने वाला देश रहा है।विश्वगुरु बनने का स्वप्न देखने वाला भारत अपने सांस्कृतिक मूल्यों में हर पूजा यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान की समाप्ति शांति पाठ के साथ करता है जो इस बात का प्रतीक है कि जीवन के हर क्षेत्र में शांति सर्वोपरि है।अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि वर्तमान समय में विश्व को एक बार फिर ऐसे सशक्त और प्रेरणादायक शांतिदूतों की आवश्यकता है जो सीमाओं स्वार्थों और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मानवता के हित में कार्य करें और वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को पुनः जीवंत बनाते हुए विश्व को शांति और सौहार्द की दिशा में अग्रसर करें।

ALSO READ  Reliance Jio का IPO 21 अक्टूबर को आएगा, 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी

अन्य खबरे

गोल्ड एंड सिल्वर

Our Visitors

1609792
Total Visitors
error: Content is protected !!