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थाना समाधान दिवस: सुबेहा थाने में खाली पड़ी कुर्सियाँ, फरियादी मायूस – चार शिकायतें भी ठंडे बस्ते में!

राघवेन्द्र मिश्रा (एडिटर)

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बाराबंकी। सुबेहा थाना परिसर में शनिवार को आयोजित थाना समाधान दिवस औपचारिकता साबित हुआ। प्रभारी निरीक्षक कृष्णकांत सिंहऔर उपनिरीक्षक संतोष सिंह व राजस्व निरीक्षक उमेश कुमार साहू की अध्यक्षता में बैठक तो हुई, लेकिन नज़ारा यह था कि कुर्सियाँ खाली पड़ी रह गईं, जिसमे लेखपाल भी मौजूद रहे। न कोई संभ्रांत व्यक्ति पहुँचा और न ही अपेक्षित भीड़।
फरियादी मात्र कहने को तो जरूर पहुँचे, लेकिन उनकी उम्मीदों को झटका तब लगा जब उनकी शिकायतों का तत्काल निस्तारण नहीं हो सका। पुलिस व राजस्व विभाग से संबंधित कुल 4 प्रार्थना पत्र आए, लेकिन मौके पर एक भी मामले का समाधान नहीं निकला। सभी शिकायतों को टीम गठित कर आगे बढ़ा दिया गया।

#पुरानी तस्वीर, बदला माहौल
लोगों को आज भी याद है जब इंस्पेक्टर कृष्णकांत सिंह ने हाल ही में सुबेहा थाने का चार्ज संभाला था। उस समय समाधान दिवस पर भीड़ उमड़ती थी और भरोसा साफ दिखता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं—न भीड़, न भरोसा। सवाल यह है कि जनता की भागीदारी क्यों घट गई?

#फरियादियों की पीड़ा
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समाधान दिवस पर ही समस्याओं का निस्तारण न हो और मामलों को आगे टाल दिया जाए, तो फिर ऐसे आयोजनों का मतलब ही क्या रह जाता है? कई लोगों ने इसे केवल “खानापूर्ति का मंच” बताते हुए निराशा जताई।

प्रभारी निरीक्षक कृष्णकांत सिंह ने बताया कि “शासन की मंशा के अनुरूप जमीन से जुड़े विवादों का राजस्व विभाग के सहयोग से निदान कराया जाएगा। टीम गठित कर दी गई है, जल्द समस्याओं का समाधान किया जाएगा।”

लेकिन बड़ा सवाल अभी भी कायम है—क्या समाधान दिवस जनता को न्याय दिलाने का मंच है या केवल औपचारिक कागज़ी प्रक्रिया? यही बो बजह की पुलिस से जनता का विश्वास उठ रहा है।

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