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Sitapur Journalist Murder Case | Raghvendra Bajpaye | पत्रकार राघवेंद्र हत्याकांड- 162 दिन बीते, मास्टरमाइंड का पता नहीं: ब्लैकमेलिंग की थ्योरी, पत्नी बोली- पुलिस करप्ट अफसरों को बचा रही

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‘उस दिन शनिवार था, तारीख 8 मार्च। मेरे पति राघवेंद्र ने बच्चों के साथ खाना खाया। फिर आराम करने चले गए। कुछ देर बाद बोले कि कपड़े ला दो, सीतापुर जाना है। फिर तैयार होकर चले गए। दोपहर करीब 3 बजे उनके दोस्त का फोन आया कि राघवेंद्र का हाईवे पर एक्सीडेंट ह

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राघवेंद्र वाजपेयी की पत्नी रश्मि पति की मौत के बारे में बताते हुए जितना दुखी हैं, उतना ही गुस्से में भी हैं। राघवेंद्र की हत्या को 5 महीने 9 दिन बीत गए, लेकिन पुलिस अब भी कह रही है कि हत्या की साजिश किसने रची, इसकी जांच चल रही है। इस बीच दो बदमाशों का एनकाउंटर भी हुआ, जिन्हें राघवेंद्र की हत्या करने वाला शूटर बताया गया।

पुलिस ने एक थ्योरी और दी कि राघवेंद्र ने एक मंदिर के पुजारी को सेवादार से संबंध बनाते देख लिया था। वे उससे 20 लाख रुपए मांग रहे थे। इस वजह से पुजारी ने सुपारी देकर उनकी हत्या करा दी। पुलिस ने पुजारी समेत तीन लोगों को अरेस्ट किया है। हालांकि पुलिस की थ्योरी पर राघवेंद्र के परिवार को यकीन नहीं है।

घर के बाहर पुलिस तैनात, बच्चों की पढ़ाई छूटी यूपी के सीतापुर जिले से 25 किलोमीटर दूर महोली कस्बा है। यहां के विकासनगर मोहल्ले में पत्रकार राघवेंद्र वाजपेयी रहते थे। राघवेंद्र की हत्या के बाद घरवालों की सुरक्षा के लिए घर के बाहर 4-5 पुलिसवाले तैनात रहते हैं।

हम यहां पहुंचे तो पुलिसवालों ने कुछ देर पूछताछ की, फिर अंदर जाने दिया। राघवेंद्र के दो बच्चे हैं। 4 साल का छोटा बेटा घर के बाहर खेल रहा था। अंदर सोफे पर राघवेंद्र की मां किरण और पत्नी रश्मि बैठी थीं। राघवेंद्र की मौत के बाद से परिवार डरा हुआ है। रश्मि बताती हैं कि अब हम बच्चों को स्कूल भी नहीं भेज रहे हैं।

‘घोटालों पर खबर लिखते थे, उन्हें अक्सर धमकी मिलती थी’ रश्मि बताती हैं, ‘राघवेंद्र एक अखबार में काम करते थे। 2 साल से तहसील ऑफिस में जमीन की धांधली और धान खरीद में हो रहे घोटाले पर खबरें लिख रहे थे। ज्यादातर खबरें तहसील ऑफिस के अधिकारियों के खिलाफ रहती थीं। उनकी खबरों के बाद लेखपाल और तहसीलदारों के ट्रांसफर भी हुए थे। इसी बात से अधिकारी नाराज थे। राघवेंद्र को कई बार जान से मारने की धमकियां मिल चुकी थीं।’

रश्मि को शक हैं कि इन्हीं अफसरों ने भूमाफिया के साथ मिलकर राघवेंद्र के मर्डर की सुपारी दी है। वे कहती हैं, ‘सीतापुर के SP चक्रेश मिश्रा ने कहा था कि हमें इंसाफ मिलेगा, लेकिन पुलिस अब तक असली अपराधियों तक नहीं पहुंच पाई है। सिर्फ एनकाउंटर करके वाहवाही लूट रही है।’

मां बोलीं- तीन बेटे थे, तीनों छोड़कर चले गए राघवेंद्र के दो बड़े भाइयों का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार की जिम्मेदारी राघवेंद्र के पास ही थी। उनकी मां किरण वाजपेयी कहती हैं, ‘राघवेंद्र ही हमारे बुढ़ापे का सहारा था। मैंने अस्पताल में उसे आखिरी बार देखा था। उसे तीन गोलियां लगी थीं। दो सीने और कंधे पर, तीसरी कमर पर। एक गोली उनके कपड़े में फंसी थी।’

‘राघवेंद्र बच्चों की पढ़ाई का, हम सबका बहुत ख्याल रखता था। उसे मार डाला। CM योगी से हाथ जोड़कर गुजारिश है कि मेरे बेटे के कातिलों को सजा दिलवाएं।’

राघवेंद्र के मर्डर के 33 दिन बाद 3 गिरफ्तारी, 2 शूटर्स का एनकाउंटर पुलिस के मुताबिक महोली में बाइक से आए बदमाशों ने हेमपुर ओवरब्रिज पर राघवेंद्र को गोलियां मारी थीं। शुरुआत में घटना को एक्सीडेंट बताया गया। पोस्टमॉर्टम से मर्डर की बात पता चली। मुद्दा विधानसभा में उठा, तो पुलिस पर दबाव बढ़ा।

इसके बाद सीतापुर के SP रहे चक्रेश मिश्रा ने 5 टीमें बनाईं। CCTV खंगालने शुरू किए गए। राघवेंद्र की कॉल डिटेल्स चेक की गईं। 33 दिन तक पुलिस ने राघवेंद्र के परिवार सहित 20 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की। 10 अप्रैल, 2025 को तीन आरोपी बाबा शिवानंद उर्फ विकास राठौड़, निर्मल सिंह और असलम गाजी को गिरफ्तार कर लिया गया।

इन गिरफ्तारियों के बाद पुलिस ने दावा किया कि बाबा शिवानंद के मंदिर के एक सेवादार से संबंध थे। इसका पता राघवेंद्र को चल गया था। वे बाबा को ब्लैकमेल कर रहे थे। खबर न छापने के लिए पैसों की डिमांड कर रहे थे। इससे परेशान होकर बाबा शिवानंद ने असलम और निर्मल की मदद से शूटर्स को सुपारी दी और राघवेंद्र की हत्या करवा दी।

राघवेंद्र की हत्या के 153 दिन बाद 7 अगस्त को पुलिस ने शूटर राजू तिवारी उर्फ रिजवान खान और संजय तिवारी उर्फ अकील खान को एनकाउंटर में मार गिराया। दावा किया कि ये दोनों राघवेंद्र के मर्डर में शामिल हो सकते हैं। दोनों पर सीतापुर में 40 केस दर्ज हैं।

पुलिस ने बताया कि राजू और संजय बाइक से हरदोई के पिहानी की तरफ जा रहे थे। हमने घेराबंदी की, तो उन्होंने कार्बाइन और पिस्टल से पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी फायरिंग में दोनों बदमाश मारे गए। दोनों सगे भाई थे।

उनके पास मिले बैग से एक डायरी और डॉक्यूमेंट मिले हैं, जिनकी जांच हो रही है। हालांकि राघवेंद्र के परिवार का आरोप है कि पुलिस लेखपाल और तहसील के अफसरों को बचाने के लिए एनकाउंटर और ब्लैकमेलिंग की झूठी थ्योरी बना रही है।

मंदिर के महंत बोले- शिवानंद ने गलती की है, तो उसे फांसी पर चढ़ा दो आखिर में हम कारेदेव मंदिर भी गए, जिसे राघवेंद्र की हत्या से जोड़ा जा रहा है। ये महोली कस्बे का प्रसिद्ध देवस्थल है। राघवेंद्र के घर से ये मंदिर 4 किमी दूर है। राघवेंद्र अक्सर यहां पूजा करने आते रहते थे। इसी दौरान उनकी पहचान बाबा शिवानंद से हो गई।

गिरफ्तारी के बाद बाबा शिवानंद ने पुलिस को बताया कि राघवेंद्र ने दिसंबर-जनवरी में मुझे एक सेवक के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया। उसने हमारी फोटो ले ली थी। इस बात को दबाने के लिए वह 20 लाख रुपए मांग रहा था। मैंने कुछ पैसे देकर मामला खत्म करने के लिए कहा, लेकिन राघवेंद्र नहीं माना। बदनामी के डर से मैंने असलम और निर्मल के जरिए शूटर्स को 4 लाख देकर उसे मरवा दिया।

इस मामले पर हमने कारेदेव मंदिर के महंत रमाकांत से बात की। वे कहते हैं, ‘राघवेंद्र जब भी मंदिर आते थे, शिवाकांत से जरूर मिलते थे। शिवानंद ने 4 साल पहले मंदिर में अनुष्ठान करवाया था। इसके बाद से वह यहीं रहता था।

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मंदिर में रुद्राभिषेक, कथा और शनि-राहू दोष मुक्ति के लिए लोग शिवानंद से मिलते थे। मंदिर में ही उसका कमरा था। अनुष्ठान के समय वह 17-18 साल के सेवकों के साथ रहता था।

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शिवानंद पर लगे आरोपों पर महंत रमाकांत कहते हैं, ‘इस बारे में हम नहीं जानते, लेकिन ये बात सच है कि शिवानंद सेवकों के साथ ही कमरे में रहता था। अगर उसने मंदिर परिसर में ऐसी गंदी हरकत की है, तो उसे तुरंत फांसी पर चढ़ा देना चाहिए। अगर हमें पता होता, तो उसे मंदिर में घुसने नहीं देते।’

पत्रकार बोले- राघवेंद्र की ईमानदारी उसकी मौत की वजह बनी राघवेंद्र की हत्या के विरोध में सीतापुर के पत्रकारों ने महोली में प्रदर्शन किया। सीतापुर के सीनियर जर्नलिस्ट जीशान कदीर कहते हैं, ‘राघवेंद्र बहुत बेबाकी से खबर लिखते थे। उन्होंने सीतापुर में जमीन खरीद में हुए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। इसमें सरकारी कर्मचारी, भूमाफिया के साथ मिलकर विवादित जमीनों की खरीद और उनका अवैध बैनामा कर रहे थे।’

‘राघवेंद्र पत्रकार के साथ-साथ RTI एक्टिविस्ट भी थे। उन्होंने सीतापुर में धान खरीद में धांधली और घोटालों की बिना डरे रिपोर्टिंग की थी।’

सीतापुर SP का दावा- जिनका एनकाउंटर हुआ, उन्होंने ही राघवेंद्र को मारा राघवेंद्र हत्याकांड के वक्त सीतापुर के SP रहे चक्रेश मिश्रा ने शुरुआती जांच के बाद खुलासा किया था कि आरोपी बाबा शिवानंद ने शूटर्स के जरिए हत्या करवाई थी। वहीं जिले के नए SP अंकुर अग्रवाल का कहना है कि मर्डर के लिए शूटरों को पैसा किसने दिया, हत्याकांड की साजिश किसने रची, इसकी जांच चल रही है।

अंकुर अग्रवाल कहते हैं, ‘अब तक की जांच में पता चला है कि राघवेंद्र पर गोलियां चलाने वाले शूटर ही 7 अगस्त को एनकाउंटर में मारे गए। हमारे पास उनका CCTV फुटेज और टेक्निकल एविडेंस हैं। इससे पता चलता है कि शूटर उस दिन घटना वाली जगह मौजूद थे और हत्या करके भाग गए थे।’

पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं… राघवेंद्र की हत्या सीतापुर-दिल्ली हाईवे पर की गई। यहां लगातार वाहन गुजरते हैं। हाईवे पर दिनदहाड़े हत्या होने से विपक्ष लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल खड़े कर रहा है।

समाजवादी पार्टी: पत्रकार सुरक्षित नहीं, सरकार खामोश समाजवादी पार्टी के मुखिया और यूपी के पूर्व CM अखिलेश यादव ने राघवेंद्र के परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा, ‘इस सरकार में इतना भ्रष्टाचार है कि गंभीर मामलों को उजागर करने वाले पत्रकारों को धमकियां मिल रही है। उनकी हत्या तक हो जाती है। सीतापुर में पत्रकार की हत्या पर सरकार खामोश है। अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की क्या स्थिति होगी।’

कांग्रेस: जनता की आवाज उठाने वाले यूपी में सुरक्षित नहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा, ‘यूपी में डर का माहौल है। कोई भी सुरक्षित नहीं है। राघवेंद्र लगातार धान खरीद में हो रही गड़बड़ियों पर खबरें लिख रहे थे। इसी वजह से उनकी हत्या करवाई गई। ये दिखाता है कि प्रदेश में अपराधी बेलगाम हो चुके हैं।’

सरकार का जवाब: राघवेंद्र के हत्यारे बख्शे नहीं जाएंगे यूपी के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने कहा, ‘सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। हत्याकांड में शामिल अपराधी बख्शे नहीं जाएंगे। सबकी गिरफ्तारी होने पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाया जाएगा, ताकि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सके।’

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