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सरकारी जमीन पर खड़ा अवैध दो मंजिला स्कूल! सुबेहा में शिक्षा के नाम पर खुली लूट-एकता पब्लिक स्कूल को किसका संरक्षण?

IGRS में शिकायत, लेखपाल की रिपोर्ट में सरकारी भूमि की पुष्टि, फिर भी बुलडोजर नही चला-आखिर क्या बजह??

 राघवेन्द्र मिश्रा एडिटर(नारद संवाद न्यूज़)

समाचार सुबेहा जनपद बाराबंकी की नगर पंचायत सुबेहा के वार्ड-जवाहरनगर में संचालित “एकता पब्लिक स्कूल” अब गंभीर सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ता रोहित कुमार वैश्य द्वारा 08 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर दर्ज कराई गई शिकायत संख्या 40017625045398 के बाद लेखपाल की रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि विद्यालय का निर्माण सरकारी बंजर भूमि गाटा संख्या 1717 व 1718 पर अवैध रूप से किया गया है। हैरान करने वाली बात ये है कि इतना स्पष्ट तथ्य सामने आने के बावजूद कोई भी सक्षम अधिकारी न तो कार्रवाई को तैयार है और न ही कोई बुलडोजर की गूंज सुनाई दे रही है। आखिर ऐसा कौन है जिसका सरंक्षण एकता पब्लिक स्कूल के स्वामी को प्राप्त है।

शिकायत के अनुसार, विद्यालय संचालक राजेश तिवारी व विनोद तिवारी ने पास की निजी जमीन का बैनामा तो करवाया, लेकिन बीच की सरकारी भूमि पर भी दो मंजिला अवैध निर्माण खड़ा कर दिया, जो सीधा-सीधा राजस्व संहिता का उल्लंघन है। इस विद्यालय को कक्षा 1 से 5 तक की मान्यता भी मिली हुई है, जिससे सवाल और गंभीर हो जाते हैं कि जब ज़मीन सरकारी है तो मान्यता किस आधार पर दी गई? क्या शिक्षा विभाग ने बिना भू-अधिकार सत्यापन के स्कूल को हरी झंडी दे दी? अगर नहीं, तो फिर इसमें किस अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है?

 

इस अवैध विद्यालय में बीजेपी विधायक दिनेश रावत सहित कई पदाधिकारियों का हालिया आगमन भी दर्ज किया गया है, जिससे राजनीतिक संरक्षण की बू भी तेज़ हो गई है। सवाल उठता है कि जब किसी गरीब की झोपड़ी सरकारी ज़मीन पर बनती है तो बुलडोजर दौड़ पड़ता है, लेकिन जब सत्ता का वरदहस्त लिए लोग दो मंजिला अवैध स्कूल खड़ा कर बच्चों का भविष्य गिरवी रख दें, तो प्रशासन मौनव्रत धारण क्यों कर लेता है? क्या इस पर DM Barabanki  शशांक त्रिपाठी कोई ठोस कार्यवाही करेंगे या फिर मामला सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगा।
लेखपाल की 23 जुलाई 2025 को प्रस्तुत रिपोर्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि “शिकायत में अंकित विद्यालय गाटा संख्या 1717 एवं 1718, जो बंजर सरकारी भूमि है, पर निर्मित पाया गया है। निर्माण अवैध है।”
फिर भी नगर पंचायत सुबेहा, शिक्षा विभाग और तहसील प्रशासन की चुप्पी यह दर्शाती है कि या तो यह मामला सत्ता के संरक्षण में है या फिर भ्रष्टाचार ने कार्रवाई को निगल लिया है।ऐसे में कहीं न कहीं संरक्षण के साथ पैसों की दम पर भी खेला किया गया होगा। मीडिया में समाचार प्रकशित होने के बाबजूद अधिकारी टस से मस करने को तैयार नही है।फिलहाल आये दिन मामला तूल पकड़ता है।अब जनता का सवाल स्पष्ट है—
क्या योगी सरकार का बुलडोजर केवल गरीबों के लिए है? क्या “जीरो टॉलरेंस” सिर्फ भाषणों तक सीमित है?
अगर लेखपाल व कानूनगो की रिपोर्ट के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं होती, तो ये कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।शिकायतकर्ता रोहित वैश का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिलाधिकारी से मिलकर सीधे मुख्यमंत्री तक यह मुद्दा पहुंचाएंगे। अब ज़रूरत है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराकर स्कूल की मान्यता रद्द करे, और बुलडोजर वाली कार्यवाही कर निर्माण ध्वस्त कराए और दोषियों पर विधिसम्मत कार्रवाई करे। यह मामला अब सिर्फ ज़मीन पर अवैध कब्जे का नहीं, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ और शासन को चुनौती देने का बन गया है।अब जनता चुप नहीं बैठेगी — बुलडोजर चले, संरक्षण हटे, सच्चाई उजागर हो। क्योंकि बच्चों के भविष्य के साथ कोई समझौता नही होगा। यही कारण है कि जैसे जैसे लोगों को इस बात की  जानकारी मिल रही है कि स्कूल सरकारी जमीन पर बना है और अवैध मान्यता है जनता बायकॉट करना शुरू कर रही है, साथ ही जनता कार्यवाही की मांग कर रही है।

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