राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध पहचान मजबूत करने की रणनीति पर हुई चर्चा !
रिपोर्ट राहुल त्रिपाठी।
बाराबंकी :- श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय (एसआरएमयू) में शनिवार को आयोजित रिसर्च डिग्री कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ करने, प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशनों की संख्या बढ़ाने तथा विश्वविद्यालय के एच-इंडेक्स में वृद्धि करने पर व्यापक मंथन किया गया।
विश्वविद्यालय के चांसलर इंजीनियर पंकज अग्रवाल एवं प्रो-चांसलर इंजीनियर पूजा अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी ने की। बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों के डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष एवं शोध से जुड़े वरिष्ठ शिक्षाविद मौजूद रहे।
कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी ने कहा कि शोध केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, उद्योग और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का प्रभावी साधन है। उन्होंने शोधार्थियों एवं शोध-निर्देशकों से अनुसंधान में नवीनता, मौलिकता, सामाजिक उपयोगिता और अकादमिक उत्कृष्टता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उन्होंने स्कोपस, वेब ऑफ साइंस तथा अन्य प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में अधिकाधिक शोध-पत्र प्रकाशित करने पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध और प्रभावशाली प्रकाशन विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान को मजबूत करेंगे। साथ ही विश्वविद्यालय के एच-इंडेक्स को बढ़ाने को महत्वपूर्ण लक्ष्य बताते हुए शोधकर्ताओं से ऐसे अनुसंधान कार्य करने की अपील की, जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से संदर्भित हों।
बैठक में अनुसंधान एवं परामर्श के निदेशक प्रो. (डॉ.) नबील अहमद ने विभिन्न एजेंडा बिंदुओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इस दौरान एफआरडीसी एवं एसआरएसी के गठन और कार्यप्रणाली, शोधार्थियों की प्रगति, कोर्सवर्क, सिनॉप्सिस एवं शोध प्रबंधों की स्थिति, जुलाई-2026 बैच के लिए पीएचडी सीट मैट्रिक्स, शोध-निर्देशकों की सूची, पीएचडी प्रवेश कार्यक्रम तथा अध्यादेश में प्रस्तावित संशोधनों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के शैक्षणिक एवं शोध कार्यों में उपयोग संबंधी नई गाइडलाइन पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान एआई के नैतिक, पारदर्शी और जिम्मेदार उपयोग पर विशेष बल दिया गया।
बैठक के अंत में शोध गतिविधियों की नियमित समीक्षा, शोधार्थियों को समयबद्ध मार्गदर्शन उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और यूजीसी मानकों के अनुरूप विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट शोध संस्कृति को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया।