रिपोर्ट/नारद संवाद एजेंसी
रामनगर (बाराबंकी)। सरयू नदी पर बने संजय सेतु की मरम्मत का कार्य शुरू होते ही आवागमन प्रभावित हो गया है। छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पीपा पुल तैयार कराया है, लेकिन यह व्यवस्था लोगों के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है।सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए अस्थायी मार्ग पर उड़ती धूल और गर्द ने राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऑटो रिक्शा, बाइक सवार और अन्य खुले वाहनों से गुजरने वाले लोगों को धूल फांकनी पड़ रही है, जिससे कपड़े खराब हो रहे हैं और सफर भी दूभर हो गया है।स्थिति यह है कि छोटे लोडेड वाहनों पर भी पाबंदी लगा दी गई है। ‘छोटा हाथी’ और पिकअप जैसे वाहन खाली होने पर भी पुल से गुजरने नहीं दिए जा रहे हैं। इससे स्थानीय व्यापार और दैनिक आवागमन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।इन दिनों गेहूं की कटाई का सीजन चल रहा है और कई किसानों के खेत नदी के उस पार हैं। ऐसे में फसल को घर तक लाना और पशुओं के लिए भूसा एकत्र करना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। किसानों का कहना है कि समय पर फसल न पहुंच पाने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि राहगीरों और किसानों की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। संबंधित कंपनी ने तय समयसीमा के भीतर कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन पीपा पुल पर धूल और अव्यवस्था ने परेशानी बढ़ा दी है।उधर, आवागमन कम होने से कई ढाबा संचालकों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए हैं, जिससे स्थानीय रोजगार पर भी असर पड़ा है।लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पीपा पुल पर नियमित पानी का छिड़काव कराया जाए और छोटे वाहनों के आवागमन में राहत दी जाए, ताकि किसानों और आम जनता को हो रही दिक्कतों से निजात मिल सके।































