रिपोर्ट/नारद संवाद एजेंसी
रामनगर (बाराबंकी)। रामनगर पीजी कॉलेज में तैनात एसोसिएट प्रोफेसर पर लगे गंभीर आरोप साबित होने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। तथ्यों को छिपाकर नौकरी हासिल करने और पदोन्नति पाने के मामले में जांच में दोषी पाए जाने पर डॉ. अखिलेश वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।जानकारी के अनुसार, हरदोई जनपद निवासी राजेंद्र प्रसाद ने बीते वर्ष जिला प्रशासन, शासन और उच्च शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पीजी कॉलेज रामनगर में तैनात डॉ. अखिलेश वर्मा पर उनके भाई नरेंद्र के अपहरण का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जिसमें वादी उनके पिता भगवानदीन निवासी ग्राम थमरवा, हरदोई हैं।शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि डॉ. वर्मा ने वर्ष 2010 में अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे की जानकारी छिपाकर पहले बहराइच जिले के रसिया में अध्यापन कार्य किया और बाद में रामनगर पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति प्राप्त कर ली।मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। करीब सात माह तक चली विस्तृत जांच के बाद समिति ने अप्रैल माह में अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई।रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डॉ. अखिलेश वर्मा को निलंबित कर दिया है। साथ ही उन्हें डीआईओएस कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। पूरे प्रकरण की विस्तृत अनुशासनिक जांच के लिए भी अधिकारी नामित कर दिए गए हैं।इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।































