रामसनेहीघाट :- भिटरिया चौराहे पर करीब आठ दशक से चली आ रही श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले की धार्मिक परंपरा का बुधवार को कृष्ण छठी के आयोजन के साथ समापन हुआ। छठी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेला परिसर पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण की झांकियों के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया। रावत परिवार की ओर से श्रद्धालुओं के लिए कढ़ी-चावल के प्रसाद का वितरण किया गया।
भिटरिया का यह प्रसिद्ध मेला जन्माष्टमी से शुरू होकर कृष्ण छठी तक चलता है। छह दिनों तक मेला परिसर दिन-रात श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों से गुलजार रहा। अंतिम दिन भी सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। शाम होते-होते मेला परिसर में भीड़ बढ़ गई। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने झांकियों के दर्शन किए और मेले में खरीदारी की।
*तीन पीढ़ियों से निभाई जा रही परंपरा*
स्थानीय लोगों के अनुसार भिटरिया में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले की शुरुआत स्वर्गीय सत्रोहन लाल रावत ने करीब 80 वर्ष पहले की थी। उनके द्वारा शुरू की गई धार्मिक परंपरा आज भी परिवार की तीसरी पीढ़ी पूरी श्रद्धा के साथ निभा रही है। स्वर्गीय लखन लाल रावत के बड़े पुत्र सूरज रावत मेले की व्यवस्था संभालने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। सुमित रावत और आदित्य रावत धार्मिक झांकियों को सजाने और आयोजन को आकर्षक बनाने में सहयोग करते हैं।
*झांकियों ने मोहा श्रद्धालुओं का मन*
मेले में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, जन्मोत्सव और उनकी लीलाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां सजाई गईं। रंग-बिरंगी रोशनी से सजे परिसर में झांकियां लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं। दूर-दराज के गांवों से भी लोग परिवार के साथ यहां पहुंचे।
*छठी पर कढ़ी-चावल का प्रसाद*
कृष्ण छठी के अवसर पर रावत परिवार की ओर से श्रद्धालुओं के लिए कढ़ी-चावल के प्रसाद की व्यवस्था की गई। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। देर तक प्रसाद वितरण चलता रहा। आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता और भाईचारे की भावना भी देखने को मिली।
आठ दशक पुराना यह आयोजन आज भी भिटरिया की पहचान बना हुआ है। बदलते समय के साथ मेले का स्वरूप भले ही बदला हो, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से जुड़ी श्रद्धा और परंपरा आज भी लोगों को एक सूत्र में बांधे हुए है।