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गेहूं खरीद में बड़ा फर्जीवाड़ा, सरकारी रिकॉर्ड में ‘लापता’ किसान ने बेच डाला 153 कुंतल गेहूं

फर्रुखाबाद: कायमगंज खाद्य विभाग का ‘जादू’: कागजों पर रामसेवक की जमीन, और सरकारी खजाने से गेहूं का पैसा ले गया ‘करन’!

बिना जमीन के ‘अन्नदाता’ बने करन बाबू! 9 खतौनियों में नाम नहीं, फिर भी खाद्य विभाग ने तौल लिया 153 कुंतल गेहूं

 रिपोर्ट:-   अनुराग राजू मिश्रा यूपी हेड 

कायमगंज (फर्रुखाबाद) :- सरकारी गेहूं खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता के दावों को धता बताते हुए कायमगंज में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। खाद्य विभाग के क्रय केंद्र (कायमगंज – कीमगंज नगर पालिका परिषद) पर ‘करन’ (KARAN) नामक एक कथित किसान के नाम पर 153 कुंतल गेहूं की बिक्री दर्ज की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी) की जांच में इस नाम के किसी भी व्यक्ति का दूर-दूर तक कोई अस्तित्व नहीं मिला है।

जांच में साफ हुआ है कि अलग-अलग गांवों की कुल 9 खतौनियों में दर्ज जमीनों का सहारा लेकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। पंजीकृत किसान का नाम किसी भी राजस्व रिकॉर्ड में न होने से यह स्पष्ट हो गया है कि यह पंजीकरण और गेहूं की बिक्री पूरी तरह फर्जी है।

दो गांवों की 9 खतौनियों का इस्तेमाल, मालिक कोई और.

मिली जानकारी के अनुसार, फर्जी किसान द्वारा तहसील कायमगंज के अंतर्गत दो गांवों—हजरतगंज और भटमई की जमीनों के कागजात (खतौनी) पोर्टल पर अपलोड किए गए थे। इन खतौनियों का विवरण और उनमें दर्ज वास्तविक भूस्वामियों के नाम इस प्रकार हैं:

1. ग्राम: हजरतगंज (कुल 2 खतौनी खाते)

खाता संख्या 20 (रकबा 0.397 हेक्टेयर): इसमें वास्तविक भूमिधर उदयवीर पुत्र फुलुआ और रामसेवक पुत्र रामरक्षपाल (निवासी भटमई) दर्ज हैं।

खाता संख्या 210 (रकबा 0.559 हेक्टेयर): इसमें रामसेवक पुत्र रक्षपालसिंह (निवासी भटमई) का नाम दर्ज है।

नोट: इन दोनों ही खातों में ‘करन’ नाम के किसी व्यक्ति का नाम शामिल नहीं है।

2. ग्राम: भटमई (कुल 7 खतौनी खाते)

खाता संख्या 23 (रकबा 1.259 हेक्टेयर): इसमें अबधेश सिंह, ऊषादेवी, आकाश सिंह, कृष्णवीर सिंह, रामसेवक और आदेशानुसार मृतक प्रहलाद के वारिसान (रंजीत सिंह, अजीत सिंह व केशवती) दर्ज हैं।

खाता संख्या 86 (रकबा 1.181 हेक्टेयर): इसमें प्रेमादेवी, राजेन्द्र सिंह, रामसेवक, श्रीमती महादेवी और सरला देवी के नाम दर्ज हैं।

खाता संख्या 166 (रकबा 1.526 हेक्टेयर): इसमें रामवती, रामसेवक और शिव कुमार के नाम दर्ज हैं।

खाता संख्या 148 (रकबा 0.526 हेक्टेयर): इसमें कु० वीना (नाबालिग), कृपाशंकर, धर्मेन्द्र, नरेश सिंह, नवाब सिंह, राजपाल, राजेन्द्र सिंह, रामसेवक, विचान सिंह, विश्राम, श्रीमती रामदेवी और सुरेन्द्र के नाम दर्ज हैं।

खाता संख्या 145 (रकबा 0.417 हेक्टेयर): इसमें रामसेवक पुत्र रामरक्षपाल सिंह दर्ज हैं।

खाता संख्या 89 (रकबा 0.393 हेक्टेयर): इसमें प्रेमा देवी और रामसेवक दर्ज हैं।

खाता संख्या 147 (रकबा 0.324 हेक्टेयर): इसमें रामसेवक पुत्र रामरक्षपाल सिंह दर्ज हैं।

खाता संख्या 146 (रकबा 0.316 हेक्टेयर): इसमें रामसेवक पुत्र रक्षपाल सिंह का नाम दर्ज है।

#सीधे तौर पर फर्जीवाड़े का संकेत

राजस्व विभाग और खाद्य विभाग के नियमों के अनुसार, गेहूं की सरकारी खरीद केवल उन्हीं किसानों से की जा सकती है जिनका नाम खतौनी में दर्ज हो और जिनका ऑनलाइन सत्यापन (सत्यापित रकबा) हुआ हो।

इस मामले में, सभी 9 खतौनी खातों में से किसी भी एक खाते में भी कथित किसान ‘करन’ का नाम दर्ज नहीं है।

ज्यादातर जमीनों पर रामसेवक, प्रहलाद के वारिसों या अन्य ग्रामीणों के नाम दर्ज हैं। इसके बावजूद खाद्य विभाग के क्रय केंद्र पर इस फर्जी नाम से 153 कुंतल गेहूं की तौल कैसे हो गई और इसका सत्यापन किसने किया, यह विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

इस खुलासे के बाद क्रय केंद्र के प्रभारियों और सत्यापन करने वाले राजस्व कर्मियों (लेखपाल/सप्लाई इंस्पेक्टर) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं:

बिना खतौनी में नाम हुए पोर्टल पर किसान का रजिस्ट्रेशन कैसे स्वीकार हुआ?

153 कुंतल गेहूं की खरीद का भुगतान किस बैंक खाते में भेजा गया?

क्या असली किसानों के नाम पर बिचौलियों और केंद्र प्रभारी ने मिलकर इस सरकारी धन का बंदरबांट किया है?

ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों और फर्जी किसान के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।

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