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‘मेरा बेटा रोज की तरह दुकान बंद करके लौट रहा था। न उसकी कोई गलती थी। न ही वो किसी प्रदर्शन में शामिल होने गया था। फिर उसे गोली क्यों मारी?’
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बांग्लादेश के गोपालगंज में कपड़ा व्यापारी दिप्तो साहा को खो चुकी उनकी मां पुलिस और सरकार से जवाब मांग रही हैं। 16 जुलाई को गोपालगंज में नेशनल सिटिजन पार्टी यानी NCP की रैली में हिंसा भड़क गई। इसमें जिन 4 लोगों की मौत हुई, दिप्तो साहा भी उनमें से एक हैं। NCP उसी स्टूडेंट मूवमेंट से निकली पार्टी है, जिसने पिछले साल 5 अगस्त को शेख हसीना सरकार का तख्तापलट किया था।
गोपालगंज शेख हसीना का गृह जिला है। हिंसा फैलाने का आरोप शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग और उसकी स्टूडेंट विंग पर लगा। पार्टी समर्थकों ने रोड ब्लॉक की और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। NCP कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस और आर्मी पर भी हमला किया। जिसमें 50 से ज्यादा लोग घायल हुए। NCP समेत बाकी सियासी दलों का आरोप है कि अवामी लीग समर्थकों ने जानबूझकर निशाना बनाया।
हालांकि, अवामी लीग इसके लिए सरकार की सुरक्षा व्यवस्था में चूक को जिम्मेदार बता रही है। ऐसे में सवाल है कि अवामी लीग और बाकी पार्टियों की तनातनी के बीच क्या बांग्लादेश में हिंदू और अल्पसंख्यक फिर निशाने पर आ जाएंगे। ये हिंसा सिर्फ एक घटना है या किसी की साजिश? विक्टिम के परिवार क्या कह रहे हैं? पढ़िए बांग्लादेश से रिपोर्ट…

सबसे पहले जानिए हिंसा कैसे भड़की? बांग्लादेश में जल्द ही चुनाव होने की चर्चाओं के बीच NCP और जमात-ए-इस्लामी देश भर में रैलियां और प्रदर्शन कर रही हैं। वहीं हिंदुओं की समर्थक मानी जाने वाली शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। NCP बांग्लादेश में ‘राष्ट्र निर्माण के लिए जुलाई पदयात्रा’ कर रही है। इसी सिलसिले में 16 जुलाई को गोपालगंज में भी रैली थी।
NCP नेता सरजिस आलम गोपालगंज की जनता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘2024 जुलाई की क्रांति के दौरान बनाए गए जनआंदोलन के लक्ष्य अब भी अधूरे हैं। इसलिए हम अभी सड़कें छोड़ने के लिए तैयार नहीं।’ स्टेज पर NCP के कन्वीनर नाहिद इस्लाम भी मौजूद थे। उन्होंने भी नव राष्ट्र निर्माण को लेकर लोगों में जोश भरा।
इसके बाद दोपहर के करीब 2:30 बजे जैसे ही पदयात्रा गोपालगंज से आगे बढ़ने लगी। सैकड़ों लोगों की भीड़ शहर के एंट्री गेट पर जमा हो गई। बांग्लादेश के जर्नलिस्ट अतीक बताते हैं,
जब पदयात्रा बड़ा बाजार के पास आस-पास पहुंची, तभी सैकड़ों अवामी लीग समर्थकों ने रास्ता रोक दिया। दोनों पक्षों के बीच पहले नारेबाजी और धक्कामुक्की हुई, देखते ही देखते पथराव और लाठियां चलने लगीं।

‘पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर भीड़ को काबू में करने की कोशिश की। पुलिस की टीम पर भी हमला हुआ। सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड फेंके। हालात बेकाबू होने पर फायरिंग भी की। आर्मी की मदद से नाहिद और बाकी लीडर्स को गाड़ी में बैठाकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया।’

NCP नेताओं को सुरक्षा के लिहाज से सेना के बख्तरबंद वाहन से ले जाया गया। बाद में सुरक्षा बलों की निगरानी में उन्हें पड़ोसी जिले पहुंचाया गया।
हिंसा में 4 लोगों की मौत परिवार बोले- न प्रदर्शन में गए, न हिंसा से वास्ता, फिर भी गोली मारी रैली के दौरान भड़की हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई। इनमें कपड़ा व्यापारी 30 साल के दिप्तो साहा भी थे। घटना के दिन वो दुकान बंद करके घर लौट रहे थे। तभी उन्हें गोली लगी और अस्पताल में उनकी मौत हो गई। उनका परिवार गोपालगंज के उदयन रोड पर रहता है।
दिप्तो की मां बिबा रानी साहा रोते हुए कहती हैं, ‘मेरा बेटा किसी प्रदर्शन में शामिल होने नहीं गया था। वो तो दुकान बंद करके लौट रहा था। उसकी कोई गलती भी नहीं थी। फिर उसे गोली क्यों मारी? उसका कपड़ों का कारोबार था।’

हिंसा की चपेट में आए 24 साल के रमजान काजी ने भी जान गंवा दी। उन्हें भी गोली लगी थी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। रमजान कोटालिपारा के रहने वाले थे और रिक्शा चलाकर गुजारा कर रहे थे। चश्मदीदों ने बताया कि हिंसा से कुछ वक्त पहले रमजान को पुलिस अफसरों के साथ-साथ चलते हुए देखा गया था।
उनके पिता कमरुल काजी कहते हैं, ‘मेरे बेटे ने कुछ गलत नहीं किया। वो रिक्शा लेकर घर लौट रहा था, तभी हिंसा की चपेट में आ गया और गोली लग गई। हम विरोध जताना चाहते थे। हमने अस्पताल से उसकी डेडबॉडी पुलिस स्टेशन ले जाने की कोशिश की, लेकिन गेट बंद था।’
जब पोस्टमॉर्टम कराने गए तो वहां से भी अस्पताल कर्मचारियों ने लौटा दिया। कहा- अब घर ले जाओ, यहां मुश्किल हो सकती है। इसलिए पोस्टमॉर्टम तक नहीं हो पाया। रमजान घर पर कमाने वाला अकेला था। अब उसके बिना हमारा कोई सहारा नहीं है?

40 साल के सोहेल मोल्लाह गोपालगंज के मियापारा में मोबाइल फोन पार्ट्स की दुकान चलाते थे। हिंसा के दौरान वो भी पुलिस की गोली का शिकार हुए। उन्हें भी नाजुक हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जान नहीं बच सकी।
उनके साथी जोनी खान बताते हैं, ‘हिंसा थमने के बाद हमें सोहेल का शव मिला। उनके बुजुर्ग माता-पिता बेटे को खोने का गम भूल नहीं पा रहे। वे बार-बार बेहोश हो जाते हैं। उन्हें संभालना मुश्किल हो गया है। सोहेल की मौत से पूरे परिवार को बड़ा धक्का लगा है।‘
सोहेल की पत्नी निशी बेगम के कंधों पर अब दो छोटे बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी आ गई है। वे कहती हैं, ‘हमारी आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक है।’

मरने वालों में गोपालगंज के रहने वाले 24 साल के इमोन तालुकदार भी हैं। वो बर्तन की दुकान पर मजदूरी करते थे। वो भी पुलिस की गोली लगने से जख्मी हुए और फिर दम तोड़ दिया।
अब सवाल कि आखिर हिंसा क्यों भड़की… अवामी लीग की ऑनलाइन मीटिंग में बना रैली रोकने का प्लान गोपालगंज सिर्फ एक जिला नहीं बल्कि एक पॉलिटिकल सिंबल भी है। ये बांग्लादेश के राष्ट्रपिता माने जाने वाले और देश के पहले प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर्रहमान की जन्मस्थली है। साथ ही अवामी लीग की मुखिया शेख हसीना का गृहनगर है। इसलिए गोपालगंज कई सालों से अवामी लीग का मजबूत गढ़ रहा है।
यहां NCP की रैली को लेकर बांग्लादेश की जर्नलिस्ट नूर वीली कहती हैं,
NCP का प्रोग्राम सिर्फ सियासी नहीं था। ये सत्ता के सेंटर पॉइंट को सीधा चैलेंज था। उन्हें विचारधारा की लड़ाई को असल जमीन पर लाना था। इसलिए यहां टकराव होना तय था।

‘रैली के ऐलान से कुछ दिन पहले से सोशल मीडिया पर ये अफवाह भी फैलने लगी थी कि NCP के लोग शेख मुजीबुर्रहमान का घर और उनकी स्मृतियां तोड़ने आ रहे हैं। सोर्सेज का कहना है कि इसी के चलते अवामी लीग के समर्थकों ने ऑनलाइन मीटिंग की थी। बताया जा रहा है कि मीटिंग में शेख हसीना भी थीं। इसी मीटिंग में रैली रोकने का सारा प्लान बना।’

हिंसा की तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि हसीना समर्थक और अवामी लीग के कार्यकर्ता हथियारों और डंडों से लैस थे। वे पुलिस पर हमला कर रहे थे और वाहनों को आग लगा रहे थे।
हिंसा में 475 के खिलाफ FIR, अब तक 90 से ज्यादा अरेस्ट घटना के तुरंत बाद पुलिस ने गोपालगंज में कर्फ्यू लगाने के निर्देश दे दिए। हालांकि अब हालात कंट्रोल में हैं और कर्फ्यू हटा लिया गया है। सुरक्षा के लिए चार प्लाटून BGB (बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश) भी तैनात किए गए हैं। पुलिस IG बहरुल अलम ने बताया, ‘हम गोपालगंज के हालात को काबू में बनाए रखने की कोशिश में लगे हैं। हथियारों का इस्तेमाल किए बिना स्थिति संभालना हमारी प्राथमिकता है।’
‘हमने 75 नामजद और 400 से ज्यादा अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पहले दिन हमने 20 लोगों को हिरासत में लिया था। जिनमें से 15 को सेना और 5 को पुलिस ने हिरासत में लिया। अब तक (19 जुलाई) कुल 90 से ज्यादा गिरफ्तारियां कर ली गई हैं। इनमें से ज्यादातर मकसूदपुर और काशियनि उपजिले के हैं।’

गोपालगंज में कर्फ्यू हटा दिया है, लेकिन अब भी वहां बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात है।
अब जानिए हिंसा को लेकर पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं घटना के बाद अंतरिम सरकार ने स्टेटमेंट जारी कर कहा कि छात्रों पर हमला करने वालों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा। देश के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस ने X पर एक पोस्ट में कहा, ‘युवाओं को उनके क्रांतिकारी आंदोलन की एक साल की सालगिरह मनाने के लिए शांतिपूर्ण रैली करने से रोकना उनके मौलिक अधिकार छीनना है।’ यूनुस ने हिंसा के लिए हसीना की अवामी लीग पार्टी को जिम्मेदार ठहराया।
NCP: ये हमला जनता के सपनों और न्याय के आंदोलन पर NCP के संयोजक नाहिद इस्लाम ने कहा, ‘ये हमला सिर्फ हम पर नहीं हुआ, बल्कि ये जनता के सपनों और न्याय के आंदोलन पर हमला है। हमें रोकने की ये कोशिशें बताती हैं कि सत्ता कितनी डरी हुई है।’
पार्टी ने 5 अगस्त को एक राष्ट्रीय सरकार के गठन का प्रस्ताव दिया था ताकि देश को बांटने से ऊपर उठाकर पुनर्निर्माण किया जा सके, लेकिन अवामी लीग और BNP जैसी पार्टियां सिर्फ सत्ता में हिस्सेदारी चाहती हैं, सुधार नहीं।

पार्टी ने ये भी आरोप लगाया कि हिंसा के दौरान बल का इस्तेमाल सिर्फ उनके कार्यकर्ताओं पर हुआ, जबकि बाकियों को खुली छूट दी गई। वहीं पार्टी के सहसचिव मुश्फिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, ‘हम किसी से नहीं डरते। हमारे सभी नेता सुरक्षित हैं। इसके लिए मैं आर्मी का धन्यवाद देना चाहता हूं।’
अवामी लीग: बंगबंधु पर हमलों को बंगाली माफ नहीं करेंगे अवामी लीग की लीडर और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने X पर लिखा, ‘गोपालगंज में हिंसा के पीछे यूनुस सरकार की शेख मुजीब के समाधि स्थल को अपवित्र करने की साजिश थी। देश ने देखा कि किसने हमारे झंडे, हमारे संविधान और राष्ट्रपिता की समाधि का अपमान किया। यूनुस को समझ लेना चाहिए कि बंगबंधु और बांग्लादेश एक हैं। बंगबंधु पर कोई भी हमला इस देश की आत्मा पर हमला है और बंगाली इसके लिए माफ नहीं करेंगे।’
‘यूनुस सरकार में आतंकियों और कट्टरपंथियों को बढ़ावा मिल रहा है। यूनुस के नेतृत्व में जो हो रहा है, वो भयावह है।’

BNP: अवामी लीग का हमला प्री-प्लान BNP ने भी हिंसा की कड़ी निंदा की। पार्टी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा, ‘ये अवामी लीग समर्थकों का जानबूझकर किया हमला है। ये लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने की साजिश है। हमले में कॉकटेल बम विस्फोट, वाहनों में आगजनी और पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं। ये सब अव्यवस्था फैलाने की कोशिश का हिस्सा हैं। ये सब प्री प्लान था।’
शेख हसीना को सत्ता से बेदखल हुए एक साल होने वाला पिछले साल 5 अगस्त को बांग्लादेश के स्टूडेंट मूवमेंट को एक साल पूरा होने वाला है। इस जनांदोलन ने तब की प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भारत भागने के लिए मजबूर कर दिया था। वो आंदोलन ‘जुलाई क्रांति’ के नाम से जाना गया। आंदोलन की शुरुआत 5 जून 2024 को तब हुई, जब हाईकोर्ट ने जॉब में 30% कोटा सिस्टम लागू किया था।
छात्रों ने कोटा सिस्टम में सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किए, जो जल्द ही हिंसक हो गए। इस आंदोलन के दौरान एक हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवा दी। आंदोलन का नतीजा ये हुआ कि शेख हसीना को 5 अगस्त को देश छोड़ना पड़ा। इस दौरान हिंदुओं के खिलाफ जमकर हिंसा हुई थी।

सैनिकों और राष्ट्रपति के मार्गदर्शन में नेशनल इमरजेंसी लागू कर अंतरिम सरकार का गठन हुआ। नोबल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस इस सरकार की अगुआई कर रहे हैं और देश के चीफ एडवाइजर हैं। अंतरिम सरकार में छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरे नाहिद इस्लाम, आसिफ महमूद और महफूज आलम को भी जगह मिली।
हालांकि देश में अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने का आदेश है। जिसके बाद नाहिद इस्लाम ने फरवरी 2025 में सरकार से इस्तीफा देकर नई पार्टी NCP बना ली। अब जब चुनाव नजदीक हैं और जुलाई क्रांति को एक साल पूरा होने वाला है, ऐसे में NCP छात्रों को एकजुट करने में लगी है।
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‘उस रात मम्मी-पापा एक धार्मिक कार्यक्रम में गए थे। भाई भी काम से लौटा नहीं था। घर पर सिर्फ मैं और मेरे बच्चे थे। किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैंने डर की वजह से नहीं खोला। थोड़ी देर बाद फजोर (फजर) दरवाजा तोड़कर घर में घुस आया। मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा। मैं चिल्ला रही थी, लेकिन उसने मुझे नहीं छोड़ा।’ बांग्लादेश के कुमिल्ला जिले के रामचंद्रपुर पंचकीत्ता गांव में रहने वाली रीता 29 जून की घटना याद कर सिहर उठती हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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