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‘मैं अपने घर में चाय पी रहा था। तभी एक लड़की भागते हुए घर की तरफ आई। वो जल रही थी। भागते-भागते वो दरवाजे पर आकर गिर गई। उसने पानी मांगा। बोली- भैया मुझे बचा लो। मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या करूं। मैंने उस पर पानी डाला। उसके कपड़े जल गए थे। मेरी बीवी
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दुखिश्याम सेनापति जिस लड़की के बारे में बता रहे हैं, वो ओडिशा के बयाबर गांव में रहती है। ये गांव पुरी जिले में आता है। फैमिली के मुताबिक, लड़की की उम्र 15 साल है। 19 जुलाई को सुबह 9 बजे वो अपनी दोस्त के घर जा रही थी। रास्ते में तीन लड़कों ने उसे अगवा किया, हाथ-पैर बांधे, मुंह में कपड़ा ठूंसा और पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी।
दुखिश्याम पहले शख्स थे, जिनके पास लड़की मदद के लिए पहुंची थी। इसके बाद पहले उसे भुवनेश्वर एम्स में एडमिट किया गया। फिर 20 जुलाई को दिल्ली एम्स रेफर कर दिया गया। वो 70% जली हालत में है। तीनों आरोपियों की पहचान नहीं हो पाई है।

दुखिश्याम ने लड़की को अपने घर में बिठाया। जलन कम करने के लिए लोग उसकी हवा करते रहे।
इस पूरे मामले को समझने के लिए दैनिक भास्कर पीड़िता के गांव पहुंचा।
सबसे पहले लड़की को बचाने वाले दुखिश्याम की बात दुखिश्याम का घर विक्टिम लड़की के घर से सिर्फ एक किमी दूर है। वे बताते हैं, ‘मैंने लड़की को देखा, तब वो बुरी तरह तड़प रही थी। मैंने उससे पूछा कि उसका घर कहां है। उसने बताया कि वो नयागोपालपुर बस्ती में रहती है। उसने अपने पिता का नाम बताया। तब तक गांव के लोग भी आ गए थे।’

दुखिश्याम आगे बताते हैं, ‘हमने लड़की से पूछा था कि उसके साथ क्या हुआ है। उसने बताया कि वो दोस्त के यहां किताब देने जा रही थी। रास्ते में तीन लड़कों ने उसे जबरदस्ती बाइक पर बिठा लिया। वे दो बाइक से आए थे। फिर मुझे सुनसान एरिया में ले गए और आग लगा दी।’
गांव के ही तरुण बताते हैं, ‘जहां लड़की को आग लगाई गई, वहां कोई नहीं जाता। किसी ने लड़कों को नहीं देखा। यहां जले कपड़ों के टुकड़े भी मिले हैं। आग लगने के बाद लड़की दौड़ते हुए निकली।’

पीड़ित लड़की की मुताबिक, आरोपी उसे इसी जगह लेकर आए थे। यहीं उसे आग लगाई गई।
गांव के ही आनंद भी उस वक्त मौजूद थे। वे बताते हैं कि यहां से एक बोतल और माचिस मिली है। खबर मिलने के बाद फोरेंसिक टीम आई थी। उसने यहां मार्किंग भी की है। पुलिस ने जली घास, बोतल जैसी कुछ चीजें सबूत के तौर पर ली हैं।
पुरी पुलिस ने जांच के लिए SIT बना दी है। लड़की को आग लगाने वालों की मंशा के बारे में पता नहीं चला है। पुलिस डॉग स्क्वॉड की मदद से आरोपियों की तलाश में जुटी है। हालांकि, अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
लड़की की फैमिली बोली- हमारी तो किसी से दुश्मनी नहीं गांववालों से बात करने के बाद हम पीड़िता के घर पहुंचे। उसके माता-पिता दिल्ली में हैं। घर में उसके चचेरे भाई मोहम्मद अशरफ (बदला हुआ नाम) मिले। वे बताते हैं, ‘मेरी बहन सुबह करीब 8- 8.30 बजे घर से निकली थी। वो बोलकर गई थी कि दोस्त के घर जा रही है। उसकी दो ही दोस्त हैं। घर के पास ही रहती हैं। वो अक्सर उनके घर जाती थी।’
‘करीब एक घंटे बाद किसी का फोन आया कि आपकी बच्ची जली हालत में मिली है। फिर पता चला कि तीन लड़कों ने उसे रास्ते से उठा लिया था। हम तुरंत वहां पहुंचे। देखा कि मेरी बहन बुरी तरह जली हुई है। उसके कपड़े शरीर से चिपक गए थे। हम उसे पीपली हॉस्पिटल ले गए। उसकी हालत ठीक नहीं थी, इसलिए डॉक्टरों ने भुवनेश्वर एम्स रेफर कर दिया।’

गांववालों की मदद से पीड़ित लड़की को हॉस्पिटल भेजा गया।
अशरफ आगे बताते हैं, ‘मेरी बहन बहुत शर्मीली थी। घर में कोई बड़ा मौजूद होता था, तो वो कमरे से बाहर नहीं निकलती थी। किसी अनजान लड़के से बात करना तो बहुत दूर की बात है। हमारी किसी से दुश्मनी नहीं रही। बहन के पास पर्सनल फोन भी नहीं था।’
बहन को याद करते हुए अशरफ कहते हैं, ‘उसे इलाज के लिए एयरलिफ्ट करके दिल्ली भेजा है। वो बहुत शांत है। कभी अपने घर से ज्यादा दूर नहीं जाती थी। हमेशा घर के आसपास रहती थी। पुलिस उसकी दोनों दोस्तों से पूछताछ कर रही है।’
‘गांव की एक लड़की उसे बुलाया करती थी। पुलिस ने उस लड़की को भी पूछताछ के लिए थाने में बिठाया है। वो लड़की 8 बजे तक घर पर थी। लगभग 8:30 बजे यह घटना घट गई। गांव वालों ने उसे नदी किनारे जाते देखा था।’
‘यह तो तय है कि मेरी बहन को पहले से प्लानिंग करके जलाया गया है। मुझे लगता है कि बदमाश पहले से उस पर नजर रख रहे थे। पुलिस उन्हें अब तक खोज नहीं पाई है। उन्हें पकड़कर फांसी दे देना चाहिए।’
पीड़िता के पड़ोस में रहने वाली तालिमुन बीबी कहती हैं, ‘वो बच्ची घर से निकलती ही नहीं थी। महीने-दो महीने में एक बार दिख जाती थी। उसने कभी किसी से खराब बर्ताव नहीं किया। वो स्कूल नहीं जाती थी। 8वीं तक पढ़ाई की थी, फिर पढ़ाई छोड़ दी थी।’

हॉस्पिटल में पिता से पूछा- क्या मैं ठीक हो जाऊंगी विक्टिम का गांव नीमापारा विधानसभा सीट में आता हे। यहां से विधायक प्रभाती परिदा ओडिशा की डिप्टी CM हैं। उन्होंने बताया कि मैंने पीड़िता के पिता से बात की थी। उन्हें भरोसा दिया कि दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। मैंने ही हॉस्पिटल में लड़की को एडमिट कराया था। फार्म पर साइन किए थे।
डिप्टी CM बताती हैं, ‘डॉक्टर ने मुझे बताया था कि लड़की 70% जल चुकी है। हमने कहा कि हम इलाज कराना चाहते हैं। डॉक्टरों ने उसे ICU में एडमिट कर दिया। उस वक्त वो होश में नहीं थी। होश में आकर बार-बार बेहोश हो रही थी। ज्यादा कुछ बोल भी नहीं पा रही थी।’

डॉक्टर बोले- हालत सीरियस, लेकिन हालत में सुधार हो रहा पीड़िता को 20 जुलाई को शाम 4:30 बजे एम्स दिल्ली में भर्ती करवाया गया। उसे डॉक्टरों की निगरानी में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।
एम्स भुवनेश्वर के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. आशुतोष बिस्वास के मुताबिक लड़की की स्थिति में थोड़ा सुधार आ रहा है। इसीलिए लड़की को एयरलिफ्ट करके दिल्ली भेजने की सलाह दी गई। इसके लिए पुलिस ने भुवनेश्वर एयरपोर्ट और हॉस्पिटल के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनवाया। इससे मरीज को सिर्फ 10 मिनट में एयरपोर्ट पहुंचाया जा सका।

पीड़ित लड़की जली हालत में भी पैदल चलकर एम्बुलेंस तक पहुंची। डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी हालत नाजुक है।
पुलिस बोली- लड़की से सेक्शुअल हैरेसमेंट नहीं इस केस में पीड़िता की मां ने FIR दर्ज करवाई है। IG प्रवीण कुमार बताते हैं, ‘पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। आग लगाने से पहले आरोपियों ने लड़की को केमिकल पिलाने की कोशिश की थी।
हालांकि, जांच से पता चला है कि पीड़िता का यौन उत्पीड़न नहीं किया गया। हम इस एंगल से भी जांच कर रहे हैं कि क्या लड़की ने खुद को आग लगाई है। आग लगने के बाद पीड़िता कुछ समय के लिए होश में आई थी। हम हर डिटेल वेरिफाई कर रहे हैं।’
वहीं पुरी के SP पिनाक मिश्रा ने कहा, ‘यह बहुत संवेदनशील मामला है। हर पहलू से जांच की जा रही है। पीड़िता की तबीयत में सुधार होने के बाद उसका बयान दर्ज किया जाएगा। पुलिस उसके दोस्तों, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों से जानकारी जुटा रही है।’
CM ने मदद का भरोसा दिया, नवीन पटनायक बोले- सरकार सिर्फ बयानबाजी कर रही मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी विक्टिम के परिवार से मिले थे। उन्होंने कहा, ‘इस अपराध के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। जांच के लिए SIT बना दी गई है। राज्य सरकार पीड़िता के इलाज और परिवार की हर जरूरत का ख्याल रखेगी।’
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और BJD नेता नवीन पटनायक ने कहा-
जबसे BJP सरकार आई है, राज्य में महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है। यह घटना बताती है कि कानून व्यवस्था चरमरा चुकी है। राज्य सरकार सिर्फ बयानबाजी में लगी है।

कांग्रेस ने मामले में CBI जांच की मांग की है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शरत पटनायक ने राज्य सरकार की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार बेटी बचाओ के नारे देती है, लेकिन बेटियों को जलाए जाने पर संवेदनशील कार्रवाई नहीं करती। इस घटना की निष्पक्ष जांच तभी संभव है, जब यह केस CBI को सौंपा जाए।’
एक हफ्ते पहले प्रोफेसर से परेशान स्टूडेंट ने आग लगाई बीती 12 जुलाई को बालासोर जिले में एक स्टूडेंट ने आग लगा ली थी। 14 जुलाई को उसकी मौत हो गई। ये स्टूडेंट बालासोर के फकीर मोहन ऑटोनॉमस कॉलेज से BEd कर रही थी। उसने अपने HoD समीर राजन साहू पर सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया था।
विक्टिम ने कॉलेज प्रिंसिपल दिलीप कुमार घोष से लेकर इंटरनल कंप्लेंट कमेटी तक सभी से मामले की शिकायत भी की। पिता का आरोप है कि कॉलेज ने हर बार शिकायत को नजरअंदाज कर दिया। प्रोफेसर समीर और प्रिंसिपल दिलीप ने ही अपराजिता को जान देने के लिए मजबूर किया।

12 जुलाई को स्टूडेंट कॉलेज गई थी। प्रिंसिपल से भी मिली। इसके बाद उसने कैंपस में ही खुद को आग लगा ली।
स्टूडेंट के पिता एक स्कूल में क्लर्क हैं और भाई एमआर है। वो खुद पढ़ाई के साथ-साथ कॉलेज में कराटे सिखाती थी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़ी थी।
पिता बताते हैं कि वो हमेशा से कुछ बड़ा करना चाहती थी। सरकारी नौकरी की भी तैयारी कर रही थी। उसने मुझसे वादा लिया था कि मैं उसे कभी शादी के लिए मजबूर नहीं करूंगा। वो डांस, ड्रामा और कराटे सब करती थी। कई जगहों पर उसे बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड भी मिला।‘
शिकायत को लेकर वे कहते हैं, ‘अपराजिता ने लगभग 6 महीने पहले हमें प्रोफेसर की हरकतों के बारे में बताया था। उसने बताया कि उसे परेशान किया जा रहा है। इसके बाद मैंने अपने बेटे के साथ कॉलेज जाकर मामले में शिकायत भी की थी। प्रिंसिपल को सारी बात बताई।‘
‘मुझे अप्रैल में ही उसकी दोस्त ने बताया कि बेटी के साथ कुछ गलत हो रहा है। प्रोफेसर उसे जानबूझकर क्लास से निकाल देता था। अगर वो क्लास के लिए एक मिनट भी लेट हो जाए तो सबके सामने बेइज्जती करता था। मेरी बेटी को मेंटली और फिजिकली दोनों तरह से टॉर्चर किया जा रहा था।’
‘ये सुनकर जब मैं उससे मिलने पहुंचा तो वो कॉलेज की कैंटीन में बैठी रो रही थी। उसने अपने साथ हो रही हिंसा और शोषण के बारे में बताया था।’
मामला तूल पकड़ता देख पुलिस ने घटना के दिन के बाद ही आरोपी HoD समीर को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, 14 जुलाई को कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल दिलीप कुमार घोष को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

घटना पर कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल और आरोपी दिलीप कुमार घोष ने अरेस्ट होने से पहले कहा था, ’30 जून को मेरे पास HoD समीर राजन साहू के खिलाफ शिकायत आई थी। कुछ स्टूडेंट्स ने बताया कि समीर उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहा है।’
‘एक लड़की ने यहां तक कहा था कि गार्डन के पास शिक्षक ने फिजिकल रिलेशन बनाने की मांग की थी। उसी दिन स्टूडेंट्स ने घेराव किया था और पुलिस को बुलाया गया था।’
’12 जुलाई को स्टूडेंट मुझसे मिलने आई, मैंने 20 मिनट तक उसे समझाया, लेकिन वो कहने लगी कि अब और इंतजार नहीं कर सकती और यहां से चली गई। करीब 15-20 मिनट बाद पता चला कि उसने खुद को आग लगा ली।’
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