रिपोर्ट:- विवेक शुक्ला
रामनगर बाराबंकी :- विकासखंड रामनगर में स्थायी बीडीओ की तैनाती नहीं होने से ब्लॉक की व्यवस्थाएं पटरी से उतरती नजर आ रही हैं। पिछले दो माह से अधिक समय से रामनगर और सूरतगंज दोनों विकासखंडों की जिम्मेदारी बीडीओ देवेंद्र प्रताप सिंह के पास है। दो-दो ब्लॉकों की जिम्मेदारी संभालने के कारण रामनगर में अपनी समस्याएं लेकर पहुंचने वाले ग्रामीणों को जिम्मेदार अधिकारी का इंतजार करना पड़ रहा है।कई फरियादी बिना समाधान के ही बैरंग लौटने और बार-बार ब्लॉक कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं
दूरदराज के गांवों से किराया खर्च कर शिकायत और विकास कार्यों से जुड़े मामलों को लेकर ग्रामीण ब्लॉक मुख्यालय पहुंचते हैं, लेकिन बीडीओ के दूसरे ब्लॉक में होने अथवा व्यस्तता के चलते उनकी फरियाद समय से नहीं सुनी जा पा रही है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।स्थायी बीडीओ नहीं होने का असर केवल फरियादियों तक ही सीमित नहीं है। ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की निगरानी, योजनाओं की समीक्षा, भुगतान से जुड़े मामले और विभिन्न विभागीय कार्य भी प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। दो ब्लॉकों की जिम्मेदारी एक अधिकारी के कंधों पर डालकर व्यवस्था चलाने से कार्यों की गति और प्रभावी निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि जब एक अधिकारी के पास दो विकासखंडों का जिम्मा है तो दोनों जगह के कार्यों को समान रूप से समय देना मुश्किल है।ऐसे में रामनगर जैसे बड़े विकासखंड में स्थायी बीडीओ की तैनाती जरूरी है।ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि रामनगर विकासखंड में तत्काल स्थायी बीडीओ की तैनाती की जाए, ताकि कार्यालय की व्यवस्थाएं पटरी पर लौटें और
जनसमस्याओं का समय से निस्तारण हो सके।
























