रिपोर्ट:- राहुल त्रिपाठी
बाराबंकी: सट्टी बाजार स्थित कार्यालय पर ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के तत्वावधान में परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद इद्रीसी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं समाज सुधारक अब्दुल कय्यूम अंसारी की जयंती के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दोनों महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने शहीद अब्दुल हमीद को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध में अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के कई पैटन टैंकों को नष्ट किया और मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके इस अद्भुत शौर्य के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया। उनका जीवन आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
वहीं अब्दुल कय्यूम अंसारी के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि वे स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानी, समाज सुधारक और पसमांदा समाज की सशक्त आवाज थे। उन्होंने सामाजिक समानता, शिक्षा और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। मोमिन आंदोलन के माध्यम से उन्होंने सामाजिक न्याय और बराबरी की लड़ाई को मजबूती प्रदान की।
कार्यक्रम में बताया गया कि अब्दुल कय्यूम अंसारी का जन्म 1 जुलाई 1905 को बिहार के डेहरी में हुआ था और उन्होंने कम उम्र से ही स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेना शुरू कर दिया था। वे कई बार जेल गए और बाद में राजनीति में सक्रिय रहते हुए राज्यसभा सदस्य, विधायक और मंत्री भी बने। जेल मंत्री के रूप में उन्होंने कैदियों के सुधार के लिए शिक्षा व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया, जो उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है।
गोष्ठी के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं ने दोनों महान हस्तियों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। साथ ही सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता, शिक्षा के प्रसार और पसमांदा समाज के उत्थान से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में महमूद चौधरी, शफीक राईन, नगर अध्यक्ष निसार राईन, मैनुद्दीन अंसारी, जिलासचिव अब्दुल्ला राईन, हारून राईन, सद्दाम इदरीसी, इरफान अंसारी, मुख्तार मंसूरी, नईम सिद्दीकी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में युवाओं से आह्वान किया गया कि वे इन महान विभूतियों के आदर्शों को अपनाकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

























