रिपोर्ट/नारद संवाद न्यूज़ एजेंसी।

रामनगर बाराबंकी।तहसील क्षेत्र के ग्राम कोरिनपुरवा के पास सरयू नदी किनारे कटान रोकने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से कराए जा रहे पिचिंग, स्टड और परकोपाइन निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार और बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का खुला बंदरबांट किया जा रहा है, जबकि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।बुधवार शाम निर्माण स्थल पर मजदूर बालू से भरी बोरियां लगाने का कार्य कर रहे थे, लेकिन मौके पर विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। केवल मेट के भरोसे कार्य संचालित होता दिखा। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर ठेकेदार घटिया सामग्री का प्रयोग कर रहे हैं और मनमाने तरीके से कार्य करा रहे हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार नदी से भरी गई कई बोरियां लगाने से पहले ही फट चुकी हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अभी सरयू नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू भी नहीं हुआ है और कार्य की खामियां सामने आने लगी हैं। ऐसे में बाढ़ और कटान के दौरान यह परियोजना कितनी प्रभावी साबित होगी, इसे लेकर लोगों में चिंता है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए जारी किए जा रहे करोड़ों रुपये के बजट को ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ठिकाने लगाया जा रहा है। यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई तो बाढ़ के दौरान नदी किनारे बसे गांवों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच करवाने तथा दोषी ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगाया गया तो सरकार की महत्वाकांक्षी कटानरोधी योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।































