Skip to main content

Naradsamvad

32 लाख लोगों की जिंदगी से खिलवाड़? बाराबंकी ट्रॉमा सेंटर की बदहाली पर भड़की भारतीय किसान मजदूर दशहरी यूनियन, CMO को सौंपा ज्ञापन

Naradsamvad
Naradsamvad - Narad news Agency
5 Min Read

करोड़ों की लागत से बना ट्रॉमा सेंटर आज भी अधूरा, ICU निष्क्रिय, रात में पैथोलॉजी बंद; जीवित और शवों के एक्स-रे एक ही मशीन पर होने के आरोपों की जांच की मांग

रिपोर्ट राहुल त्रिपाठी 

बाराबंकी :- जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय किसान मजदूर दशहरी यूनियन संगठन ने जिला अस्पताल एवं ट्रॉमा सेंटर की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए निहाल अहमद सिद्दीकी ने निष्पक्ष जांच और तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है। संगठन का आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित ट्रॉमा सेंटर वर्षों बाद भी अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहा है, जिसके कारण गंभीर मरीजों को उपचार के लिए लखनऊ और अन्य जनपदों की ओर रेफर किया जा रहा है।यूनियन के प्रदेश सचिव एवं जिलाध्यक्ष ने ज्ञापन में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य एवं जीवन सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है, लेकिन बाराबंकी में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।उन्होंने आरोप लगाया कि इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर परिसर में स्थापित लगभग 10 बेड का आईसीयू लंबे समय से पूर्ण क्षमता से संचालित नहीं हो रहा है। वहीं ट्रॉमा सेंटर में पैथोलॉजी सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद रात के समय आवश्यक जांच सेवाएं बंद रहती हैं, जिससे गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।ज्ञापन में ट्रॉमा सेंटर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन का कहना है कि स्वीकृत मानकों के अनुरूप विशेषज्ञ चिकित्सक, प्रशिक्षित स्टाफ और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं है। यही कारण है कि दुर्घटना, हृदयाघात, सिर की गंभीर चोट एवं अन्य आपातकालीन मामलों के मरीजों को तत्काल रेफर कर दिया जाता है।संगठन ने अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। स्थानीय स्तर पर मिली सूचनाओं का हवाला देते हुए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जीवित मरीजों और शवों के एक्स-रे के लिए एक ही मशीन का उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। यूनियन ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है ताकि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।महिला अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए संगठन ने कहा कि ओपीडी में आने वाली महिलाओं के साथ आए पुरुष परिजनों को प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया जाता है। वृद्ध, अशिक्षित और गंभीर रूप से बीमार महिला मरीजों के हित में इस व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है।दवा वितरण व्यवस्था को लेकर भी ज्ञापन में गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। संगठन का आरोप है कि चिकित्सकों द्वारा लिखी गई कई दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं होतीं, लेकिन मरीजों को इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती। इससे गरीब एवं ग्रामीण मरीजों को उपचार संबंधी भ्रम और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यूनियन ने उपलब्ध एवं अनुपलब्ध दवाओं की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की मांग की है।ज्ञापन में विशेष रूप से वर्ष 2016 में करोड़ों रुपये की लागत से बने ट्रॉमा सेंटर का उल्लेख करते हुए कहा गया कि लगभग एक दशक बाद भी यह केंद्र पूर्ण रूप से संचालित नहीं हो सका है। राष्ट्रीय राजमार्गों और व्यस्त यातायात मार्गों से जुड़े बाराबंकी जनपद में प्रतिदिन बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। इससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।

भारतीय किसान मजदूर दशहरी यूनियन ने मांग की है कि जिला अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू, पैथोलॉजी सेवाओं, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था एवं दवा वितरण प्रणाली की किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा सक्षम समिति से निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी स्तर पर लापरवाही अथवा अनियमितता पाई जाए तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाए और जांच रिपोर्ट को जनहित में सार्वजनिक किया जाए।संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जनपदवासियों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

सुशील कुमार, रमेश चंद वर्मा एडवोकेट, रिजवान, निधीश एडवोकेट, अलीम, दिलशाद, रविंद्र, सोनू, इमरान, जियाउद्दीन आदि कई लोग मौजूद रहे

ALSO READ  लद्दाख बना भारत का पहला 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक केंद्र शासित प्रदेश, रासायनिक खाद पर लगा पूर्ण प्रतिबंध
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
Account
Cart
Search
error: Content is protected !!