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वाह रे व्यवस्था! असली किसान दर-दर भटके, ‘कागजी’ किसानों ने लूटी मण्डी; वजीरगंज में गेहूं खरीद का महा-घोटाला!

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Naradsamvad - Narad news Agency
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रिपोर्ट :- अनुराग राजू मिश्रा (यूपी व्यूरो हेड)

वजीरगंज (बदायूं) :- भगवान हर जगह नहीं हो सकते, इसलिए उन्होंने मां को बनाया। शायद इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव साहब ने सोचा कि राजस्व विभाग हर जगह कैसे जांच करेगा, इसलिए उन्होंने इस वित्तीय वर्ष गेहूं पंजीकरण के सत्यापन की ‘पवित्र जिम्मेदारी’ सीधे क्रय केंद्र प्रभारियों को सौंप दी। बस फिर क्या था? आपदा में अवसर तलाशने वाले अफसरों की लॉटरी लग गई!

खाद्य विभाग की विपणन शाखा के क्रय केंद्र वजीरगंज मण्डी द्वितीय (वजीरगंज नगर पंचायत) पर इन दिनों ‘जादुई’ गेहूं की बंपर खरीद हुई है। इस जादुई खेल के मुख्य सूत्रधार हैं क्षेत्रीय विपणन अधिकारी मुरारी सिंह, जो मण्डी 1 और 2 दोनों के प्रभारी हैं। आइए देखते हैं कि कैसे असली किसानों के आंसू पोंछने वाली सरकारी योजना ने बिचौलियों और फर्जी किसानों के घर में चांदी काट दी।

**असली किसान को ‘वारदाना’ नहीं, फर्जी को ‘मलाई’

अगर आप पसीना बहाने वाले असली किसान हैं, तो आपके लिए वजीरगंज मण्डी के नियम किसी आईआईटी (IIT) की प्रवेश परीक्षा से भी कठिन थे। असली किसानों को कभी ‘वारदाना नहीं है’ कहकर भगाया गया, तो कभी ‘प्रमाणित खसरा’ लाने के नाम पर सरकारी दफ्तरों के चक्कर कटवाए गए। थक-हारकर, टूटकर असली किसान अपना गेहूं औने-पौने दामों पर आढ़तियों और मिलों को बेचने पर मजबूर हो गया।

लेकिन, अगर आप ‘फर्जी किसान’ हैं, तो आपके लिए क्रय केंद्र पर लाल कालीन बिछी थी। अन्य किसानों की खतौनी चुराओ, फर्जी पंजीकरण कराओ और बिना एक दाना उगाए हजारों कुंतल गेहूं सरकारी गोदाम में ‘कागजों पर’ बेच दो!

चमत्कार: 2 हेक्टेयर जमीन से ‘हजारों कुंतल’ गेहूं की पैदावार!

कृषि वैज्ञानिकों को अपनी डिग्रियां फाड़ देनी चाहिए, क्योंकि जो चमत्कार बदायूं में हुआ है, वो दुनिया में कहीं नहीं हुआ। आइए इस फर्जीवाड़े के कुछ ‘दिग्गज’ किरदारों से मिलते हैं:

किरदार नंबर 1: सोनम गुप्ता (बेवफा नहीं, अब ‘किसान’ हैं!)

गत 22 मई को इस तथाकथित किसान ने अकेले 180 कुंतल गेहूं बेच डाला। पंजीकरण हुआ अलीगंज से, जिसमें खतौनी खाता संख्या 10, 46, 41, 58, और 90 का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया। मजे की बात? इन सरकारी कागजातों (खतौनियों) में दूर-दूर तक सोनम गुप्ता का नाम ही दर्ज नहीं है!

खाता संख्या 10 का ‘महा-चमत्कार’ अलीगंज के खाता संख्या 10 का कुल रकबा मात्र 2.24 हेक्टेयर है। खेती की सामान्य समझ रखने वाले जानते हैं कि इसमें अधिकतम 120 कुंतल गेहूं हो सकता है। लेकिन मुरारे सिंह की ‘कृपा’ और साठगांठ देखिए—इस अकेले खाते पर बदायूं जनपद के अलग-अलग केंद्रों पर हजारों कुंतल गेहूं की बिक्री दिखा दी गई!

किनके नाम की जमीनों पर हुआ डाका? चोरी की गई खतौनियों में करन सिंह (खाता 10), मुन्ना सिंह (खाता 46), राम सिंह (खाता 58), और सत्यपाल सिंह (खाता 90) जैसे सीधे-साधे ग्रामीणों के नाम दर्ज हैं। हद तो तब हो गई जब खाता संख्या 41 में दर्ज ‘दीपक एजूकेशनल वेलफेयर सोसाइटी’ (प्रबंधक: बृजेश यादव, निवासी नेकपुर सिविल लाइंस, बदायूं) की जमीन पर भी फर्जी तरीके से गेहूं तौल दिया गया। यानी शिक्षा की जमीन पर भी भ्रष्टाचार की फसल लहलहा उठी!

सोते रहे ‘डिप्टी आरएमओ’, चकबंदी गांवों में हुई ‘कागजी’ बंपर खरीद

अब तक इन दोनों केंद्रों पर लगभग 16 हजार कुंतल गेहूं खरीदा जा चुका है। इसमें से अधिकतम खरीद उन चकबंदी गांवों की है, जहां जमीनों के विवाद और कागजी हेरफेर का फायदा उठाना सबसे आसान था।

सवालों के घेरे में सिर्फ केंद्र प्रभारी मुरारी सिंह ही नहीं हैं, बल्कि जिले के सबसे बड़े जिम्मेदार अधिकारी डिप्टी आरएमओ (Deputy RMO) भी हैं। जनता पूछ रही है कि जब इतना बड़ा फर्जीवाड़ा खुलेआम चल रहा था, जब एक ही खाते पर लिमिट से हजार गुना ज्यादा गेहूं तौला जा रहा था, तब डिप्टी आरएमओ साहब एसी दफ्तर में बैठकर कौन सी फाइलें पलटा रहे थे? क्या उनकी नाक के नीचे हुए इस महाघोटाले में उनकी खामोशी ‘मौन सहमति’ थी या कुछ और?

फरियाद और सबूत तैयार, अब कार्रवाई का इंतजार

पीड़ित किसानों और जागरूक नागरिकों ने इस महा-फर्जीवाड़े की प्रमाणित प्रतियों (खतौनियों की सर्टिफाइड कॉपी) के साथ मोर्चा खोल दिया है। देखना यह है कि योगी सरकार का भ्रष्टाचार पर चलने वाला ‘बुलडोजर’ इन फर्जी किसानों और उन्हें संरक्षण देने वाले विपणन अधिकारियों की कुर्सी तक पहुंचता है या फिर कागजों का यह ‘गेहूं’ फाइलों के चूहे खा जाएंगे!

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