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लखीमपुर खीरी में धान खरीद में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा, मुख्य सचिव और जिलाधिकारी समेत उच्चाधिकारियों से जवाब तलब

आई जी आर एस शिकायत के फर्जी निस्तारण के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल:-

अधिकारी मस्त, बिचौलिए चुस्त किसान पस्त लखीमपुर में ‘डिजिटल भूतों’ ने सरकार को बेचा करोडो रुपये का हजारों क्विंटल धान।”

अनुराग राजू मिश्रा (यूपी ब्यूरो)

प्रयागराज/लखीमपुर खीरी : उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के सरकारी धान खरीद केंद्रों पर चल रहे कथित भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और बिचौलियों की संलिप्तता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। इस याचिका में किसानों के मौलिक अधिकारों के हनन और विभागीय डेटाबेस में हेरफेर कर फर्जी किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये की धान खरीद दिखाने का गंभीर आरोप लगाया गया है।  

मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, खाद्य एवं रसद विभाग के आयुक्त, लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी (DM) और जिला खाद्य विपणन अधिकारी (DFMO) को पक्षकार (उत्तरदाता) बनाते हुए नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई है।  

फर्जी किसानों के नाम पर धान खरीद का आरोप

 सामाजिक कार्यकर्ता तथा वरिष्ठ पत्रकार द्वारा अधिवक्ता ज्ञान चंद्र और सौरभ कुमार मिश्रा के माध्यम से दाखिल इस याचिका में राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी) और खाद्य विभाग के डेटाबेस के मिलान के साथ कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। याचिका के अनुसार:  

लखीमपुर मंडी समिति के विभिन्न केंद्रों पर वास्तविक भूस्वामियों (किसानों) को जानकारी दिए बिना, उनके खतौनी नंबरों का गलत इस्तेमाल करके दूसरे लोगों के नाम पर सैकड़ों क्विंटल धान की फर्जी बिक्री दर्ज कर दी गई।  

उदाहरण 1: लखीमपुर मंडी-V में बलजीत कौर नामक एक कथित फर्जी किसान के नाम पर 190 क्विंटल धान की बिक्री दिखाई गई, जबकि उस खतौनी के असली मालिक सुंदर लाल, मेवालाल और प्रकाश जैसे अन्य ग्रामीण हैं।  

उदाहरण 2: लखीमपुर मंडी-VII में छवि गुप्ता नामक फर्जी नाम पर 187 क्विंटल धान की खरीद दर्ज की गई, जबकि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार उस जमीन के असली मालिक नूर मोहम्मद और इब्राहिम आदि हैं।  

इसके अलावा अमित कुमार (164 क्विंटल), हरीश कुमार मिश्रा (214 क्विंटल) और मजीद अली (190 क्विंटल) जैसे कई अन्य संदिग्ध और फर्जी नामों के जरिए सरकारी केंद्रों पर बड़े पैमाने पर धान की तौल कागजों में दिखाई गई है।  

प्रशासन की निष्क्रियता पर उठाए सवाल याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस घोटाले और विसंगतियों के संबंध में उन्होंने बीते मार्च और अप्रैल महीनों में लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को IGRS के माध्यम से साक्ष्यों के साथ कई लिखित शिकायतें भेजी थीं। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों व बिचौलियों के खिलाफ कोई ठोस या प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई,उल्टा शिकायतों को फर्जी तरह से सरकारी दस्तावेज को एडिट करके शिकायत निस्तारित कर दी गई।जिससे यह अवैध धंधा लगातार चलता रहा।  

जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया है कि सरकारी खरीद केंद्रों पर कुप्रबंधन के चलते असली किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। नमी या गुणवत्ता के मनमाने बहाने बनाकर अधिकारियों द्वारा असली किसानों की फसल खरीदने से मना कर दिया जाता है, जिससे तंग आकर गरीब किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से बेहद कम दामों पर बिचौलियों और निजी व्यापारियों को औने-पौने दाम में फसल बेचने को मजबूर हैं। 

याचिका में की गई मुख्य मांगें

याचिकाकर्ता ने माननीय न्यायालय से गुहार लगाई है कि:

लखीमपुर खीरी जिले के सभी सरकारी खरीद केंद्रों पर फसलों की खरीद को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और तत्काल सुनिश्चित कराया जाए।  

सरकारी डेटाबेस में किए गए संदिग्ध फर्जीवाड़े और राजस्व रिकॉर्ड की हेराफेरी की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों व बिचौलियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।  

धान खरीद में हुए इस बड़े खेल के सामने आने के बाद अब शासन और जिला प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। हाईकोर्ट द्वारा इस मामले में सख्त रुख अपनाए जाने की उम्मीद है।

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