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बाराबंकी:बनगांव झील आर्द्रभूमि में 38 यूकेलिप्टस पेड़ों की कटान पर मुकदमा, कई नामजद आरोपियों पर कार्रवाई

नारद संवाद न्यूज एजेंसी एडिटर जर्नलिस्ट केके शुक्ला 

बाराबंकी जनपद के दरियाबाद क्षेत्र स्थित बनगांव झील आर्द्रभूमि में अवैध रूप से पेड़ों की कटान का मामला सामने आने के बाद वन विभाग के तेज तर्रार ईमानदार जिला वन अधिकारी आकाश दीप बाधवान के सख्त आदेश पर वन कर्मचारियों द्वारा टिकैत नगर थाने में शिकायत की तहरीर पर पुलिस ने कई लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह कटान उस भूमि पर की गई है जो राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है तथा अधिसूचित आर्द्रभूमि (वेटलैंड) क्षेत्र का हिस्सा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम बनगांव, परगना दरियाबाद, तहसील रामसनेहीघाट स्थित गाटा संख्या 1463/12.240 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में तालाब के नाम दर्ज है। यह क्षेत्र बनगांव झील आर्द्रभूमि के रूप में अधिसूचित है। वन विभाग के अनुसार इस भूमि पर लगे लगभग 38 यूकेलिप्टस के पेड़ों को काटकर गिरा दिया गया।

वन विभाग की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि ग्राम बनगांव निवासी मुन्ना उर्फ रियाज पुत्र अबरार अहमद तथा अनावरुल हक पुत्र मुख्तार अहमद ने कथित रूप से उक्त पेड़ों को ठेकेदार अनवर अली निवासी सहदनपुर एवं ठेकेदार अंसार अहमद निवासी सुबीपुर, टिकैतनगर के हाथों बेच दिया। इसके बाद ठेकेदारों द्वारा मौके पर पेड़ों की कटान कराई गई।

बताया गया कि घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कटान रुकवाने का प्रयास किया। आरोप है कि इस दौरान संबंधित लोगों द्वारा सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की गई तथा अभद्र व्यवहार किया गया। वन विभाग कर्मचारियों का कहना है कि पेड़ों की कटान से अधिसूचित आर्द्रभूमि क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचा है और संरक्षित क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हुई है।

मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 352 एवं धारा 121(1) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों में वृक्षों का संरक्षण अधिनियम, 1976 की धारा 4 एवं धारा 10 शामिल की गई हैं।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। टीम में उप क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक गौड़ वन दरोगा सचिन पटेल वन रक्षक रमन तिवारी शामिल थे वहीं स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि आर्द्रभूमि क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इस घटना के बाद पर्यावरण संरक्षण और आर्द्रभूमि क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों को लेकर प्रशासन की सतर्कता पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की निगाहें जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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