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इंस्टाग्राम के संपादक और पत्रकारिता की बदलती तस्वीर

सोशल मीडिया के दौर में बढ़ी फर्जी पत्रकारों की चुनौती, पत्रकारिता की साख पर उठ रहे सवाल

बाराबंकी। डिजिटल युग में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के तेजी से विस्तार के साथ पत्रकारिता का स्वरूप भी बदल रहा है। हालांकि इसके सकारात्मक पहलुओं के साथ-साथ कुछ ऐसी प्रवृत्तियां भी सामने आ रही हैं, जो पत्रकारिता की विश्वसनीयता और गरिमा के लिए चुनौती बनती जा रही हैं।वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि पहले पत्रकारिता में आने के लिए वर्षों तक प्रशिक्षण, अनुभव और सामाजिक सरोकारों की समझ विकसित करनी पड़ती थी। समाचार संकलन, तथ्य सत्यापन और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता देना पत्रकारिता की मूल पहचान मानी जाती थी। लेकिन वर्तमान समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पेज या चैनल बनाकर स्वयं को संपादक अथवा पत्रकार घोषित करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है।विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोग सोशल मीडिया का उपयोग जनसरोकारों की बजाय व्यक्तिगत लाभ के लिए भी कर रहे हैं। आरोप हैं कि कई बार किसी व्यक्ति, व्यवसाय या संस्थान से जुड़े आरोपों को लेकर वीडियो अथवा पोस्ट प्रसारित की जाती है और बाद में वह सामग्री अचानक हटा दी जाती है। इससे ऐसे मामलों में पारदर्शिता और मंशा को लेकर सवाल खड़े होते हैं।मीडिया जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि मान्यता प्राप्त समाचार पत्रों, चैनलों और मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों को समाचारों के प्रकाशन और प्रसारण से पहले कई स्तरों की जांच-पड़ताल और संपादकीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। वहीं सोशल मीडिया आधारित कुछ मंचों पर ऐसी व्यवस्था का अभाव दिखाई देता है।सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पत्रकारिता से संबंधित पहचान पत्र और मान्यता के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है। जानकारों का मानना है कि बिना वैधानिक अधिकार के स्वयंभू प्रेस कार्ड जारी करना अथवा उनका उपयोग करना जांच का विषय हो सकता है।मीडिया विशेषज्ञों ने प्रशासन से मांग की है कि फर्जी पहचान पत्रों, कथित ब्लैकमेलिंग और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल पत्रकारिता की साख मजबूत होगी, बल्कि समाज में जिम्मेदार और विश्वसनीय पत्रकारिता को भी बढ़ावा मिलेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में वास्तविक पत्रकारों की प्रतिष्ठा और मीडिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार, प्रशासन, मीडिया संस्थानों और समाज सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।

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