भारत में जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान ट्रांसमिशन और शेड्यूलिंग की लगातार समस्याओं के कारण करीब 1.8 अरब यूनिट अक्षय बिजली का उपयोग नहीं किया जा सका। यह मात्रा कुल सौर ऊर्जा उत्पादन के लगभग 4.2 प्रतिशत के बराबर है।
देश के कई हिस्सों में शाम के समय बिजली की कमी बनी हुई है, फिर भी ऊर्जा संक्रमण के रास्ते में यह एक बड़ी रुकावट बनकर सामने आया है। गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता में तेजी से विस्तार हुआ है और इसने सरकार के मूल लक्ष्यों से पहले ही 50 प्रतिशत की सीमा को पार कर लिया है।
इस बड़ी सफलता के बावजूद, वर्तमान ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर अक्षय ऊर्जा संयंत्रों के लगने की रफ्तार के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा है। ग्रिड की क्षमता अभी भी पीछे है।
बिजली की उपलब्धता और ग्रिड की मौजूदा चुनौतियां
ब्लूमबर्गएनईएफ इंडिया ट्रांजिशन फैक्टबुक और एबीसी लाइव पीपल एनर्जी रिपोर्ट की रिपोर्टों में कहा गया है कि संरचनात्मक सीमाएं अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। पावर मिनिस्ट्री के अधिकारियों और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के विश्लेषकों का मानना है कि ग्रिड की विश्वसनीयता तय करने में अब भी कोयले के स्टॉक और ऑफलाइन पावर क्षमता की बड़ी भूमिका है।
साल 2026 की शुरुआत में कुल मांग का एक-तिहाई हिस्सा अक्षय ऊर्जा से पूरा हुआ था। इसके बावजूद, ग्रिड को संतुलित करने के लिए कोयले से होने वाली बिजली उत्पादन ही सबसे प्रमुख स्रोत बना हुआ है।
बिजली उत्पादन करने वाले डेवलपर्स को इस समय राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रिड में बिजली न भेज पाने की वजह से उनके निवेश फंसे हुए हैं। जब अक्षय ऊर्जा का उत्पादन बेकार जाता है, तो इसका असर उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है क्योंकि वे नेटवर्क के अन्य हिस्सों में बिजली की कमी महसूस करते हैं।
बिजली क्षेत्र के अलग-अलग हितधारकों पर असर
बिजली क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के लिए वर्तमान ग्रिड स्थिति कई तरह की चुनौतियां पैदा कर रही है। अक्षय ऊर्जा डेवलपर्स को उत्पादन कम होने से सीधे तौर पर कमाई का नुकसान हो रहा है।
- ट्रांसमिशन कंपनियों को क्षमता के हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार में तेजी लानी होगी।
- डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को रुक-रुक कर होने वाली सप्लाई और मांग के बीच संतुलन बनाने में मुश्किल आ रही है।
- उपभोक्ताओं को ग्रिड की अक्षमताओं और सप्लाई की कमी के कारण अप्रत्यक्ष लागत झेलनी पड़ रही है।
- क्लीन पावर का उपयोग न हो पाने के कारण जलवायु लक्ष्यों में देरी होने की संभावना है।
ग्रिड स्थिरता और भविष्य के समाधान
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की चर्चाओं में शामिल विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि अक्षय ऊर्जा की अनिश्चितता को संभालने के लिए स्टोरेज टेक्नोलॉजी में निवेश करना बहुत जरूरी है। उच्च उत्पादन वाले क्षेत्रों से अधिक खपत वाले केंद्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए बेहतर ट्रांसमिशन लाइनों की जरूरत है।
ग्रिड लोड को मैनेज करने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक संभावित उपकरण के रूप में उभर रहा है। समर्थकों का तर्क है कि मशीन लर्निंग की मदद से बिजली उत्पादन के पैटर्न का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है और शेड्यूलिंग में सुधार करके बिजली की बर्बादी को कम किया जा सकता है।
आगे की राह में क्षमता विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड दोनों पर एक साथ ध्यान देना होगा। पॉलिसी बनाने वाले अब ग्रिड लचीलेपन पर ध्यान दे रहे हैं ताकि भविष्य की अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं राष्ट्रीय ऊर्जा पूल में भरोसेमंद योगदान दे सकें।
जब तक ग्रिड-स्तर के स्टोरेज और स्मार्ट ट्रांसमिशन नेटवर्क पूरी तरह चालू नहीं हो जाते, तब तक कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता बनी रहेगी। डेवलपर्स इस तत्काल समस्या को हल करने के लिए ट्रांसमिशन लाइनों की रेगुलेटरी मंजूरी में तेजी लाने की मांग कर रहे हैं।

























