भारत सरकार ने अप्रैल 2029 से नई कारों और SUV के लिए सख्त BS VII उत्सर्जन मानकों का प्रस्ताव रखा है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य देश की हवा की गुणवत्ता में सुधार करना है। इसके लिए वाहनों के प्रदूषण को मापने के लिए नए और कड़े नियमों को लागू किया जाएगा।
इन नए नियमों के तहत अब केवल इंजन ही नहीं, बल्कि वाहनों के ब्रेक और टायरों से निकलने वाले प्रदूषण पर भी सीमा तय की जाएगी। साथ ही, प्रदूषण की जांच के लिए वास्तविक दुनिया (real world) में टेस्टिंग की प्रक्रिया को भी अनिवार्य बनाया जाएगा।
यह पूरी योजना एक चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। अधिकारियों की योजना है कि 2035 तक इन कड़े मानकों को अन्य श्रेणियों के वाहनों पर भी लागू किया जाए। यह कदम भारतीय ऑटोमोटिव मानकों को दुनिया के पर्यावरण संबंधी रुझानों के साथ जोड़ने की एक बड़ी कोशिश है।
गाड़ियों की कीमत और निर्माताओं पर असर
इन नए मानकों को पूरा करने के लिए कंपनियों को रिसर्च और डेवलपमेंट पर काफी पैसा खर्च करना होगा। इस वजह से शॉर्ट टर्म में वाहनों की कीमतें बढ़ने की संभावना है। ग्राहक जब शोरूम से गाड़ी खरीदेंगे, तो उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
ऑटोमोबाइल कंपनियां फिलहाल अपने मौजूदा कामकाज की चुनौतियों से जूझ रही हैं। वे इन नई तकनीकी मांगों को अपनाने के लिए सरकार से अतिरिक्त समय की मांग कर रही हैं। हालांकि, लंबे समय में प्रदूषकों में कमी आने से सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण को बड़ा लाभ होगा।
जो कंपनियां इन मानकों को सफलतापूर्वक अपना लेंगी, उन्हें बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक को सही तरीके से लागू करने के लिए कंपनियों को पर्याप्त समय देना बहुत जरूरी है।
सरकार की योजना और कार्यान्वयन की प्रक्रिया
सरकार ने अभी तक कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां साझा नहीं की हैं। अभी तक सटीक मानकों, अनुपालन के लिए मिलने वाले प्रोत्साहन या इलेक्ट्रिक वाहनों और पेट्रोल-डीजल इंजन के बाजार पर पड़ने वाले असर की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
इस नीति बदलाव के शुरुआती चरणों में सभी संबंधित पक्ष आपस में बातचीत कर रहे हैं। वर्तमान में अधिकारियों का मुख्य ध्यान निम्नलिखित विभागों और संस्थाओं के बीच परामर्श करने पर है:
- Ministry of Road Transport
- ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियां
- पर्यावरण नियामक (Environmental Regulators)
- कंपोनेंट सप्लायर्स
इन चर्चाओं के बाद औपचारिक नोटिफिकेशन जारी किए जाएंगे, जिससे समय सीमा को अंतिम रूप दिया जा सके। जनता और उद्योग जगत के जानकारों को सलाह दी गई है कि वे परामर्श प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ सरकार की अगली घोषणाओं पर नजर रखें।

























