Boxing Federation of India के अध्यक्ष Ajay Singh ने 14 अक्टूबर 2026 को सचिव जनरल Pramod Kumar को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह प्रशासनिक कार्रवाई राष्ट्रीय खेल संस्था के भीतर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बाद की गई है।
Pramod Kumar पर वित्तीय गड़बड़ी करने, जांच में सहयोग न करने और अपने पद की शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने के आरोप हैं। फेडरेशन के लिए शासन की स्थिरता एक मुख्य चिंता बनी हुई है क्योंकि यह एक प्रमुख ओलंपिक खेल का संचालन करता है।
नेतृत्व में आए इस बदलाव और विवाद का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। इसके साथ ही संस्था के हितधारकों के बीच संगठन की विश्वसनीयता भी प्रभावित होने की आशंका है।
प्रशासनिक आरोपों और आंतरिक विवाद का विवरण
India Today की रिपोर्ट के अनुसार, यह सस्पेंशन आंतरिक टकरावों की एक लंबी श्रृंखला के बाद आया है। सूत्रों का कहना है कि Pramod Kumar ने वर्तमान नेतृत्व टीम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव शुरू किया था।
उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में एक औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई थी। इस शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि Ajay Singh और कार्यकारी निदेशक Col. Arun Malik द्वारा उन्हें डराया और धमकाया गया।
The Hindu के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि BFI नेतृत्व ने फेडरेशन के संविधान में दिए गए विशिष्ट क्लॉज का हवाला देते हुए सस्पेंशन ऑर्डर जारी किया। इसमें निम्नलिखित मुख्य आरोप शामिल हैं:
- बिना अनुमति के ब्रॉडकास्टिंग वर्क ऑर्डर जारी करना।
- एक चैंपियनशिप रद्द होने से जुड़ी जांच के दौरान सहयोग करने में विफलता।
- बिना अनुमति के बैठकें आयोजित करना।
सत्ता संघर्ष और भविष्य की चुनौतियां
Sportstar की रिपोर्ट के मुताबिक, फेडरेशन के भीतर सत्ता का संघर्ष बढ़ता जा रहा है। इस खींचतान की वजह से राज्य संघ और एथलीट भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति में हैं।
Economic Times के जानकारों का मानना है कि इस प्रशासनिक गतिरोध के कारण प्रतिस्पर्धी एथलीटों के लिए जरूरी सहायता रुकने का जोखिम पैदा हो गया है।
नेतृत्व संकट से जुड़ी मुख्य समयसीमा इस प्रकार है:
- 14 अक्टूबर: अध्यक्ष Ajay Singh ने Pramod Kumar के खिलाफ औपचारिक सस्पेंशन ऑर्डर जारी किया।
- 14 अक्टूबर से पहले: Pramod Kumar ने प्रधानमंत्री को शिकायत भेजी और अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी की।
- 28 अक्टूबर: इस तारीख को इन विवादों को सुलझाने के लिए एक संभावित स्पेशल जनरल मीटिंग तय की गई है।
जांच और बाहरी निगरानी की जरूरत
PTI के अनुसार, पेशेवर खेल प्रशासकों ने इस तरह के मामलों में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की जरूरत पर जोर दिया है। खेल निकायों में जनता का भरोसा वापस लाने के लिए बाहरी निगरानी को एक आवश्यक कदम माना जाता है।
अब यह देखना होगा कि चल रही जांच का परिणाम क्या निकलता है। जांच के नतीजों से ही तय होगा कि फेडरेशन अपने आंतरिक झगड़ों को सुलझा पाएगा या इसमें सरकार का हस्तक्षेप जरूरी होगा।
आगे की राह पूरी तरह से कथित कदाचार की आधिकारिक जांच के परिणामों पर टिकी है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जांच की रिपोर्ट आने के बाद आगे के कानूनी या प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे। तब तक फेडरेशन में नेतृत्व की कमी बनी रहेगी, जिससे आने वाली चैंपियनशिप प्रभावित हो सकती हैं।

























