महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने 14 अक्टूबर 2026 को राज्य के 358 तालुकों में से 305 तालुकों में आधिकारिक तौर पर सूखा घोषित कर दिया है। इस कदम का असर राज्य के कृषि क्षेत्र के एक बहुत बड़े हिस्से पर पड़ेगा। इसका मुख्य उद्देश्य दिवाली के त्योहार से पहले लाखों किसानों को तुरंत आर्थिक मदद पहुंचाना है।
सरकार ने इससे पहले 26 सितंबर 2026 को सूखा घोषित किया था, जिसमें 265 तालुके शामिल थे। इसके बाद कैबिनेट के एक फैसले में 40 और क्षेत्रों को इस सूची में जोड़ दिया गया। अब कुल 305 तालुके सूखे की चपेट में माने गए हैं।
किसानों के लिए नकद सहायता और राहत पैकेज
सूखे से प्रभावित इन क्षेत्रों के किसानों को 5,000 रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए दी जाएगी। सरकार ने इसे शुरुआती राहत के तौर पर दिया है, जबकि लंबे समय के सुधार उपायों पर काम चल रहा है।
नकद भुगतान के अलावा प्रशासन ने संकट के प्रभाव को कम करने के लिए 12 मानक सूखा राहत रियायतें भी दी हैं। इन उपायों को ग्रामीण परिवारों को राहत देने के लिए तैयार किया गया है, जो इस समय फसलों के भारी नुकसान से जूझ रहे हैं।
सरकारी रियायतें और सहायता के मुख्य बिंदु
सरकार ने किसानों और छात्रों के लिए कई तरह की छूट और सुविधाएं तय की हैं। इन रियायतों के जरिए ग्रामीण इलाकों में आर्थिक बोझ को कम करने की कोशिश की गई है। राहत उपायों की सूची इस प्रकार है:
- भूमि राजस्व में राहत देना।
- फसल ऋण (Crop Loan) का पुनर्गठन करना।
- लोन रिकवरी पर अनिवार्य रोक लगाना।
- खेती के पंपों के बिजली बिलों में छूट देना।
- छात्रों के लिए परीक्षा शुल्क में छूट देना।
- पीने के पानी और पशुओं के चारे के लिए व्यवस्थित इंतजाम करना।
मानसून की कमी और प्रशासनिक कार्रवाई
इस संकट का बड़ा कारण मानसून की बारिश में भारी कमी है। इस साल बारिश सामान्य स्तर से 18.8 प्रतिशत कम दर्ज की गई। इस वजह से Marathwada और Vidarbha जैसे क्षेत्रों में खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
राज्य सरकार ने ऐतिहासिक औसत समय की तुलना में सूखा पहले घोषित कर दिया है। इस फैसले में वर्तमान बारिश के आंकड़ों और El Niño से जुड़े मौसम के पैटर्न को ध्यान में रखा गया है। राज्य का वित्त विभाग अब इन राहत उपायों के लिए जरूरी कुल बजट का आकलन कर रहा है।
प्रशासनिक टीमों को अब सभी 305 प्रभावित तालुकों में फसल नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए पंचनामा शुरू करने का काम सौंपा गया है। बैंक भी कृषि ऋणों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं ताकि किसानों को वित्तीय संकट से बचाया जा सके। अधिकारी आगे भी जलाशयों के जल स्तर और चारे की उपलब्धता की निगरानी करते रहेंगे। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि दिवाली की छुट्टियों से पहले मदद की राशि किसानों के खातों में पहुंच जाए।

























