इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री Jitin Prasada ने 14 अक्टूबर, 2026 को घोषणा की कि सरकार डेटा सेंटर के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय नीति तैयार कर रही है। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही बिजली की मांग को नियंत्रित करना है।
सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बिजली की दरों में होने वाली किसी भी बढ़ोतरी का असर आम उपभोक्ताओं पर न पड़े। वर्तमान में भारत के पास इस उद्योग के लिए कोई अलग या स्टैंडअलोन पॉलिसी नहीं है।
अब तक डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को विभिन्न बिल्डिंग और पर्यावरण नियमों के तहत मंजूरी दी जाती रही है। Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ राज्यों ने निवेश को आकर्षित करने के लिए अपनी अलग प्रोत्साहन योजनाएं भी शुरू की हैं।
डिजिटल हब बनने का लक्ष्य और स्थानीय चुनौतियां
डेटा सेंटर प्रधानमंत्री Narendra Modi के भारत को एक ग्लोबल डिजिटल हब बनाने के विजन का एक बहुत बड़ा हिस्सा हैं। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह सेक्टर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए 200 बिलियन डॉलर का अवसर लेकर आ सकता है।
हालांकि, इस क्षेत्र के तेजी से विस्तार की वजह से कई इलाकों में स्थानीय विरोध भी शुरू हो गया है। The Economic Times के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई के निवासियों ने बिजली और पानी के अत्यधिक उपयोग को लेकर चिंता जताई है। इसी तरह के विरोध प्रदर्शन Visakhapatnam में भी देखे गए हैं।
बिजली की खपत और नए नियामक नियम
NITI Aayog के एक सदस्य ने बताया कि वर्तमान में डेटा सेंटर देश की कुल बिजली आपूर्ति का लगभग 0.5 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल करते हैं। अनुमान है कि अगले दस वर्षों के भीतर यह आंकड़ा बढ़कर 1 से 2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
Reuters के अनुसार विशेषज्ञों का कहना है कि नई नीति की जरूरत इसलिए है क्योंकि क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग, रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ने की रफ्तार से कहीं ज्यादा तेज है। सरकार डिजिटल विकास और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगी।
इस नई पॉलिसी के तहत निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
- प्रोजेक्ट्स को औपचारिक रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टेटस देना।
- मंजूरी मिलने की प्रक्रिया को और अधिक सरल और तेज बनाना।
- बिजली की सोर्सिंग के लिए नए नियमों को परिभाषित करना।
Business Today की रिपोर्ट के अनुसार, इन उपायों से Amazon और Google जैसे बड़े ऑपरेटरों को नियमों की स्पष्टता मिलेगी। सरकार ने इस विकास को समर्थन देने के लिए टैक्स लाभ भी तय किए हैं, जिसमें योग्य विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे की सुविधा जारी रहेगी।
पॉलिसी निर्माण की प्रक्रिया और भविष्य के कदम
Jitin Prasada ने ये तमाम जानकारियां पावर सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान साझा कीं। अब केंद्र सरकार औपचारिक रूप से नीति निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की योजना बना रही है।
इस पूरी प्रक्रिया में विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श किया जाएगा। इसमें पावर यूटिलिटीज, राज्य सरकारों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की राय शामिल होगी। जब तक राष्ट्रीय नीति पूरी तरह तैयार नहीं हो जाती, तब तक अलग-अलग राज्य अपनी मौजूदा गतिविधियों को समानांतर रूप से जारी रखेंगे।
मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय नीति की अंतिम घोषणा के लिए अभी कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है। अधिकारियों ने भविष्य के साइट्स के लिए पर्यावरण मानकों, पानी के आवंटन और बिजली वितरण के सटीक नियमों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया है।

























