विदेश मंत्री S Jaishankar ने पुष्टि की है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। एक साल से अधिक समय तक चली गहन चर्चाओं के बाद दोनों देश अब एक निश्चित नतीजे के करीब हैं।
यह प्रगति दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक संभावित बदलाव का संकेत देती है। भारत और अमेरिका बाजार तक पहुंच और टैरिफ से जुड़े पुराने विवादों को सुलझाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
विदेश मंत्री ने 13 से 14 अक्टूबर, 2026 के आसपास इस बात का संकेत दिया कि द्विपक्षीय जुड़ाव अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। उन्होंने Bloomberg fireside chat समेत विभिन्न प्लेटफार्मों पर अपनी बात रखी और अमेरिकी सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नीतिगत बदलावों के प्रति एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया।
टैरिफ और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की कोशिश
टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं जैसे जटिल मुद्दों को हल करने के लिए साल 2025 की शुरुआत से ही बातचीत चल रही है। इन frictions या आपसी मतभेदों का समाधान होना दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक संबंधों के लिए बहुत जरूरी माना जा रहा है।
Straits Times और Business Standard की रिपोर्टों के अनुसार, यह कदम निर्यातकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। अधिकारी अब एक ऐसा संतुलित ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो दोनों देशों के बाजारों के लिए प्रभावी ढंग से काम कर सके।
रूस के साथ संबंध और रणनीतिक स्वायत्तता
अपने हालिया दौरों के दौरान S Jaishankar ने रूस के साथ भारत की जारी साझेदारी को लेकर जताई गई चिंताओं पर भी बात की। उन्होंने इस रिश्ते का बचाव करते हुए कहा कि यह भारत को आवश्यक रणनीतिक स्वायत्तता प्रदान करता है।
उनके अनुसार, यह साझेदारी भारत को वैश्विक स्तर पर अधिक विकल्प देती है, जिसमें चीन जैसी अन्य शक्तियों के साथ जुड़ने की क्षमता भी शामिल है। वैश्विक समीकरणों के बीच भारत के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा एक प्राथमिकता बनी हुई है।
चीन के साथ सीमा विवाद और शांति की शर्त
विदेश मंत्री ने बताया कि चीन के साथ सीमा और व्यापार संबंधी मुद्दों पर प्रगति हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि Line of Actual Control (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना नई दिल्ली और बीजिंग के बीच व्यापक संबंधों को सामान्य बनाने की प्राथमिक शर्त है।
आगे बढ़ने के लिए उच्च स्तरीय संवाद जारी रखने की योजना है ताकि महीनों की बातचीत से मिले लाभ को मजबूत किया जा सके। इस प्रक्रिया में शामिल मुख्य पक्ष और हितधारक इस प्रकार हैं:
- भारत सरकार और संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार।
- विभिन्न व्यापारिक क्षेत्र जिन्हें व्यापारिक तनाव कम होने से लाभ मिलेगा।
उम्मीद की जा रही है कि अक्टूबर के अंत में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio की आगामी यात्रा इन चर्चाओं को और आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी। यदि औपचारिक समझौता नहीं हो पाता है, तो वर्तमान टैरिफ दबाव जारी रह सकता है। यह स्थिति उन व्यवसायों के लिए चिंता का विषय है जो इन दोनों देशों की सीमाओं के पार काम करते हैं। अब दोनों पक्षों के अधिकारी इस महीने के अंत में होने वाली अगली उच्च स्तरीय बैठकों से पहले विवरणों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

























