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बरेली के बाद बदायूं में राज्यपाल की जमीन पर फर्जी किसान ने बेचा लाखों का बाजरा

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Naradsamvad - Narad news Agency
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महाघोटाला: अब ‘महामहिम’ भी नहीं सुरक्षित!

खाद्य विभाग की विपणन शाखा के क्रय केंद्र वजीरगंज मंडी द्वितीय

अनुराग राजू मिश्रा यूपी हेड।

बदायूं :- उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और सरकारी तंत्र की साठगांठ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले की साख को तार-तार कर दिया है। बरेली में महामहिम राज्यपाल की जमीन पर फर्जी किसान बनकर गेहूं बेचने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब बदायूं जनपद से भी ऐसा ही एक शर्मनाक और हैरान करने वाला कारनामा सामने आया है। यहाँ जालसाजों ने किसी आम आदमी या गरीब किसान को नहीं, बल्कि प्रदेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन महामहिम राज्यपाल महोदय की सरकारी जमीन को ही अपना शिकार बना डाला!

9 खतौनियों में नाम नहीं, फिर भी हो गया पंजीकरण

मामला बदायूं जनपद के खाद्य विभाग की विपणन शाखा के क्रय केंद्र वजीरगंज मंडी द्वितीय का है। खबरों के मुताबिक, मोनी नामक एक तथाकथित किसान ने दिनांक 26 नवंबर 2025 को इस केंद्र पर 111 कुंतल बाजरा बेचकर सीधे ₹3 लाख का भुगतान डकार लिया।

इस फर्जीवाड़े की स्क्रिप्ट बदायूं तहसील के ग्राम ढ़किया से लिखी गई, जहाँ इस फर्जी किसान का पंजीकरण कराया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पंजीकरण के लिए एक-दो नहीं, बल्कि नौ खतौनियों (खाता) का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया। सबसे बड़ा तमाचा इस भ्रष्ट व्यवस्था पर यह है कि इनमें से किसी भी खतौनी में इस पंजीकृत किसान का नाम तक दर्ज नहीं था

**जब महामहिम राज्यपाल के नाम पर बिक गया बाजरा

 आम तौर पर छोटे-मोटे फर्जीवाड़े की खबरें आती रहती हैं, लेकिन जब प्रदेश के मुखिया यानी महामहिम राज्यपाल महोदय के नाम दर्ज सरकारी जमीन पर ही डाका डाल दिया जाए, तो इसे आप क्या कहेंगे?

पंजीकरण प्रपत्रों पर साफ-साफ महामहिम राज्यपाल का नाम अंकित होने के बावजूद, सत्यापन करने वाले राजस्व कर्मियों और क्रय केंद्र प्रभारी ने इसे ‘नजरअंदाज’ कर दिया। यह महज एक लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और गहरी साजिश की बू दे रहा है।

हौसले बुलंद या अफसरों की खुली छूट?

इस घटना ने सीधे तौर पर प्रशासनिक सत्यापन प्रक्रिया की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं:

क्या पंजीकरण का ऑनलाइन सत्यापन करने वाले अधिकारियों की आँखों पर पट्टी बंधी थी?

क्रय केंद्र प्रभारी की भूमिका संदिग्ध: जब कागजों पर स्पष्ट रूप से ‘महामहिम’ का नाम दर्ज था, तो क्रय केंद्र प्रभारी ने बिना किसी जांच के ₹3 लाख का बाजरा कैसे खरीद लिया और भुगतान भी कर दिया?

बरेली टू बदायूं कनेक्शन: बरेली के बाद बदायूं में हूबहू इसी तरह की वारदात का होना यह साबित करता है कि इसके पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है, जिसे खादी का पूरा संरक्षण प्राप्त है।

 जहाँ एक तरफ असली किसान अपनी फसल बेचने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर चप्पलें घिस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भू-माफिया और फर्जी किसान राज्यपाल तक के नाम का इस्तेमाल कर लाखों रुपये की सरकारी चपत लगा रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि इस मामले में दोषी अधिकारियों और उस फर्जी किसान ‘मोनी’ पर क्या सख्त कार्रवाई होती है।

 हर बार की तरह इस बार भी फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा!

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