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BPACS RITHORA MOHANPUR BAREILLY MANDI 02 – बिथरी चैनपुर’

महामहिम राज्यपाल की बाढ़ खंड की जमीन पर भी ‘फर्जी किसान’ ने बेच डाला गेहूं! बरेली में बड़ा गेहूं क्रय घोटाला उजागर

रिपोर्ट अनुराग राजू मिश्रा यूपी हेड

बरेली :- उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं, इसका एक और सनसनीखेज उदाहरण बरेली जनपद में सामने आया है। सरकारी खरीद प्रणाली (MSP) में सेंधमारी करते हुए एक फर्जी किसान ने न केवल आम ग्रामीणों की जमीनों पर फर्जीवाड़ा किया, बल्कि महामहिम राज्यपाल महोदय के नाम दर्ज ‘बाढ़ खंड’ की सरकारी भूमि को भी नहीं बख्शा। कागजों पर हुए इस खेल के जरिए लाखों रुपये के सरकारी धन का बंदरबांट कर लिया गया।

98 कुंतल गेहूं की ‘कागजी’ तौल, खतौनी से असली मालिक गायब

मामला जनपद बरेली की तहसील बरेली के अंतर्गत आने वाले ग्राम गुरऊ का है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, दिनांक 09 जून 2026 को क्रय केंद्र ‘BPACS RITHORA MOHANPUR BAREILLY MANDI 02 – बिथरी चैनपुर’ (क्रय एजेंसी: उत्तर प्रदेश सहकारी संघ – PCF) पर तरुण साहू (TARUN SAHU) नामक एक पंजीकृत किसान द्वारा 98 कुंतल गेहूं बेचा गया।

जब इस पंजीकरण और उसके साथ संलग्न खतौनी खातों की पड़ताल की गई, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। इस तथाकथित किसान तरुण साहू ने पंजीकरण में जिन खतौनी खातों को अपनी मिल्कियत दिखाकर सत्यापन कराया, उनमें से किसी भी खाते में इस किसान का दूर-दूर तक नाम दर्ज नहीं है।

#महामहिम_राज्यपाल की जमीन पर भी डाल दिया डाका

सबसे हैरान करने वाली और संवैधानिक व्यवस्था को मुंह चिढ़ाने वाली बात यह है कि फर्जीवाड़े के लिए खतौनी खाता संख्या 190, 238 और 67 का इस्तेमाल किया गया। इन तीनों ही खातों में “महामहिम राज्यपाल बाढ खण्ड / बरेली” के नाम जमीन दर्ज है।

एक आम भूमाफिया या बिचौलिए ने सरकारी सिस्टम के साथ मिलकर देश के महामहिम राज्यपाल के नाम आरक्षित बाढ़ खंड की सरकारी जमीन को अपनी कृषि भूमि बताकर पोर्टल पर दर्ज कर दिया और केंद्र प्रभारी ने आंखें मूंदकर इसका सत्यापन भी कर दिया।

इन खतौनी खातों का हुआ दुरुपयोग (असली हकदार गायब)

पंजीकरण में कुल 10 खतौनी खातों का खेल रचा गया, जिनमें दर्ज असल काश्तकारों का नाम हटाकर बैकडोर से गेहूं की तौल दिखा दी गई:

#खाता संख्या 190: गंगासहाय, रामेश्वर, श्रीमती उर्मिला देवी तथा महामहिम राज्यपाल बाढ खण्ड के नाम दर्ज।

#खाता संख्या 108: इन्द्रपाल, कृपाल सिंह, चन्द्रपाल, चुन्नी लाल, झांजन, धर्मपाल, नन्कू, प्रेमकुमार, भव देई, भूरे, मायादेवी, रामचन्द्र, रामदेव, रामसरित, रूपलाल, लल्लू, वीर पाल, वीरपाल, श्यामलाल समेत 19 ग्रामीणों के नाम दर्ज।

#खाता संख्या 111: कु0 अंजलि, कंुवरसेन, जितेन्द्र कुमार सोनकर, तारावती, दुर्गाप्रसाद, फूलसिह, मनोहर लाल के नाम दर्ज।

#खाता संख्या 49: जसोदा नन्दन, प्रसादी के नाम दर्ज।

#खाता संख्या 238: महामहिम राज्यपाल बाढ खण्ड एवं होशियार सिंह के नाम दर्ज।

#खाता संख्या 67: दीनदयाल एवं महामहिम राज्यपाल बाड खण्ड के नाम दर्ज।

#खाता संख्या 114: महामहिम राज्यपाल वाढ खण्ड एवं महेन्द्र पाल के नाम दर्ज।

#खाता संख्या 30: अमर सिंह, जमुनाप्रसाद, राकेश कुमार, राम बहादुर, विटौली देवी के नाम दर्ज।

#खाता संख्या 140: छोटे लाल, राजपाल के नाम दर्ज।

#खाता संख्या 93: बाबूराम के नाम दर्ज।

#सबसे बड़ा सवाल

इन सभी खतौनी खातों में दर्जनों असली काश्तकारों और सरकारी विभागों के नाम दर्ज हैं, लेकिन इनमें कहीं भी ‘तरुण साहू’ का नाम नहीं है। फिर इस नाम पर 98 कुंतल गेहूं का भुगतान कैसे तय हो गया?

‘केंद्र प्रभारी ही रक्षक, वही भक्षक

इस वित्तीय वर्ष गेहूं खरीद के पंजीकरण के ऑनलाइन भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी खुद क्रय केंद्र प्रभारी को सौंप दी गई। और केंद्र पर आने वाले अनाज को खरीदने और तौलने का अधिकार भी उसी के पास होता है।

 इसी नियम का नाजायज फायदा क्रय केंद्र प्रभारी और बिचौलियों ने उठाया। “सौ रुपये प्रति कुंतल” के फिक्स कमीशन के लालच में केंद्र प्रभारी ने खुद ही किसी की भी जमीन (यहां तक कि राज्यपाल महोदय की जमीन) का फर्जी सत्यापन कर डाला, खुद ही तौल दिखाई और सरकारी खजाने से भुगतान का रास्ता साफ कर दिया।

महामहिम राज्यपाल के नाम दर्ज सुरक्षित भूमि पर इस तरह डाका डालना सीधे तौर पर शासन-प्रशासन के इकबाल को चुनौती है। अब देखना यह है कि इस गंभीर और उच्च स्तरीय फर्जीवाड़े पर जिला प्रशासन और खाद्य रसद विभाग के आला अधिकारी केंद्र प्रभारी और फर्जी किसान के खिलाफ क्या कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

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