विशेष ब्यूरो रिपोर्ट( अनुराग राजू मिश्रा पत्रकार,यूपी हेड)
उत्तर प्रदेश :- मेहनत किसान की, मलाई बिचौलियों की! सरकारी खजाने को चूना लगाने और अन्नदाता की छाती पर मूंग दलने वाले सिंडिकेट के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। धान खरीद में लाखों क्विंटल की ‘सफल डकैती’ डालने और गेहूं खरीद में ‘हाथ की सफाई’ दिखाने के बाद, भ्रष्ट तंत्र का अगला सबसे बड़ा इवेंट शुरू होने जा रहा है—”मिशन मक्का लूट 2026!”
सोमवार, 15 जून से इस नए खेल का बकायदा श्रीगणेश होने जा रहा है, जहाँ ईमानदारी का जनाजा निकाला जाएगा और फर्जी किसानों की लॉटरी लगेगी।
धान से मक्का तक की ‘सफलता’ की कहानी
सरकारी क्रय केंद्रों और बिचौलियों की जुगलबंदी का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। आइए नजर डालते हैं
धान खरीद (महालूट का पहला सीजन): असली किसान मंडियों के चक्कर काटते रहे और कागजों पर ‘फर्जी किसानों’ ने एंट्री मारकर लाखों क्विंटल धान बेच दिया। यह सीधे-सीधे सरकारी खजाने पर दिनदहाड़े डाली गई डकैती थी।
गेहूं खरीद (छोटी-मोटी चोरी): यहाँ खेल जरा शातिर था। असली किसान जब गेहूं लेकर पहुंचे, तो उन्हें ‘वारदाना (बोरे) नहीं है’ या ‘प्रमाणित खसरा लाओ’ जैसे सरकारी नियमों के मकड़जाल में ऐसा उलझाया गया कि हताश होकर किसान ने अपना गेहूं औने-पौने दाम में आढ़तियों और मिलर्स को बेच दिया।
मास्टरस्ट्रोक: जैसे ही असली किसान का गेहूं खत्म हुआ, क्रय केंद्रों पर जादू से वारदाना भी आ गया और फर्जी किसानों की फसल भी! हालांकि, यहाँ मार्जिन सिर्फ ₹85 से ₹100 प्रति क्विंटल था, इसलिए इस घोटाले को इस सिंडिकेट ने ‘छोटी-मोटी चोरी’ मानकर संतोष कर लिया।
मक्का खरीद: ₹600 का बंपर मार्जिन, मिलर्स तैयार!
अब बारी मक्का की है, और इस बार का जैकपॉट बहुत बड़ा है। गणित बेहद सीधा और आकर्षक है:
खुला बाजार भाव: ₹1800 प्रति क्विंटल
सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): ₹2400 प्रति क्विंटल
सीधा मुनाफा (मार्जिन): ₹600 प्रति क्विंटल!
इतने बड़े मुनाफे को देखकर भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों की राल टपकना लाजमी है। सूत्रों की मानें तो मिलर्स पहले से ही ₹200 प्रति क्विंटल का ‘कमीशन’ जेब में दबाकर तैयार बैठे हैं। यही वजह है कि मक्का के क्रय केंद्र आनन-फानन में खोलने की कवायद युद्ध स्तर पर शुरू हो चुकी है।
क्या फिर मूकदर्शक बनेगी सरकार?
यह समाचार केवल एक रिपोर्ट नहीं, बल्कि उस लाचार किसान का चीत्कार है जो खेत में खून-पसीना बहाता है ताकि क्रय केंद्रों पर बैठे दलाल मोटे हो सकें।
क्या इस बार भी असली किसान को ‘बारदाने’ और ‘कागजी कार्रवाई’ का रोना रोकर भगा दिया जाएगा?
क्या ₹600 प्रति क्विंटल की यह खुली लूट शासन-प्रशासन की नाक के नीचे यूं ही चलती रहेगी?
आखिर कब तक फर्जी किसान असली अन्नदाता का हक मारते रहेंगे?
तैयार रहिए! सोमवार, 15 जून से मक्का खरीद का पर्दा उठने वाला है। देखना बस यह है कि इस बार लूट के पिछले सारे रिकॉर्ड टूटते हैं या प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागकर इस महालूट को रोकने की कोई जहमत उठाता है।