समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनाव परिणामों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि छह सीटें जीतने के बावजूद सत्ताधारी पार्टी को प्रभावी रूप से 50 जिलों में हार का सामना करना पड़ा है।
30 अक्टूबर 2026 को परिणामों पर बोलते हुए यादव ने BJP के प्रदर्शन को “फ्लॉप शो” और सरकार के लिए “दोहरी हार” बताया। उन्होंने विशेष रूप से वाराणसी स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी की हार का जिक्र किया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।
सीटों का गणित और सपा की जीत
23 अक्टूबर 2026 को हुए इन चुनावों में विधान परिषद की 11 सीटों पर मुकाबला था, जिनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। BJP ने छह सीटें जीतीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें हासिल कीं, जो उसके 2020 के आंकड़ों से दो सीटें अधिक हैं।
- आगरा शिक्षक सीट पर सपा की जीत हुई।
- इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा विजयी रही।
- लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी सपा ने जीत दर्ज की।
गड़बड़ी के आरोप और 2027 की तैयारी
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि BJP की जीत हेरफेर का परिणाम थी और ऐसी युक्तियों के बिना पार्टी छह सीटों तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने वाराणसी की मतगणना का मुद्दा उठाया, जो 50 घंटे से अधिक चली और जिसमें BJP कार्यकर्ताओं द्वारा अनियमितताओं के आरोप और फिर दोबारा गिनती हुई।
यादव ने कहा, “हमारा कोई भी उम्मीदवार वास्तव में नहीं हारा है; वे बस BJP के हेरफेर के सामने जीत नहीं सके।” उन्होंने शिक्षकों और युवा मतदाताओं की सतर्कता के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
इन दावों के जवाब में यूपी मंत्री सुरेश खन्ना ने सपा की बढ़त को मामूली बताया। उन्होंने कहा कि NDA ने विपक्ष से अधिक सीटें जीती हैं और समाजवादी पार्टी को जरूरत से ज्यादा जश्न न मनाने की सलाह दी। दूसरी ओर, यादव ने इन परिणामों को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की प्रस्तावना बताया। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी और उसका PDA—पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक—गठबंधन आगामी राज्य चुनावों में रिकॉर्ड जीत हासिल करने के लिए तैयार है।









