फर्रुखाबाद। फर्रुखाबाद के ऐतिहासिक बारहदरी बहादुरगंज में रविवार को शहर का 311वां स्थापना दिवस पूरे हर्षोल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। जश्न-ए-फर्रुखाबाद कार्यक्रम में इतिहास, विरासत और सांस्कृतिक एकता की झलक देखने को मिली।
बताया गया कि 1714 में नवाब मोहम्मद ख़ान बंगश ने फर्रुखाबाद की नींव रखी थी। इस अवसर पर देश के विभिन्न जिलों से आए स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों, इतिहासकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

काला पानी की सजा के दौरान शहीद हुए महान क्रांतिकारी महावीर राठौर की भतीजी स्नेहलता राठौर ने कार्यक्रम में शिरकत कर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग साझा किए।
शाहजहांपुर से आए स्वतंत्रता सेनानी अशफाक उल्ला ख़ां के पौत्र अशफाक उल्ला, रायपुर से जावेद शाह ख़ां, दिल्ली से इतिहासकार डॉ. अज़हर हुसैन और अरशद हुसैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस दौरान अशफाक उल्ला ने कहा कि “अपनी कुर्बानियों और इतिहास को कभी नहीं भूलना चाहिए।”


कार्यक्रम उस समय चर्चा में आ गया जब पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तहसीन सिद्दीकी ने मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि फर्रुखाबाद का नाम बदलकर ‘पांचाल नगर’ किए जाने का प्रयास हुआ, तो इसका खुला और संगठित विरोध किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि “फर्रुखाबाद का नाम बदलना 311 वर्षों के इतिहास, बलिदानों और साझा विरासत का क़त्ल होगा।”
पूर्व जिला पंचायत सदस्य विजय यादव ने स्वतंत्रता सेनानियों पर हुए अत्याचारों और काला पानी की सजा के दौरान बने भयावह माहौल पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष नदीम अहमद फ़ारूखी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य विजय यादव, अधिवक्ता जवाहर सिंह गंगवार, डॉ. रामकृष्ण राजपूत, सपा महानगर अध्यक्ष राघव दत्त मिश्र सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में फर्रुखाबाद की गंगा-जमुनी तहज़ीब और साझा विरासत को बचाए रखने की अपील की।

कार्यक्रम के आयोजन में अध्यक्ष नवाब काज़िम हुसैन ख़ां, उपाध्यक्ष अनीस अहमद एडवोकेट, संयुक्त सचिव जावेद ख़ां बंगश, कोषाध्यक्ष मुफ़ीद ख़ां, आसिफ़ ख़ां, शरीक अली, मीडिया प्रभारी वसीम जमा ख़ां, अनवर पठान सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।































