राघवेन्द्र मिश्रा(नारद संवाद न्यूज़ एजेंसी)
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रामनगर-कानूनी तौर पर फ़र्ज़ी दस्तावेज बनाने पर आईपीसी की धारा 464 के तहत, धोखाधड़ी के इरादे से झूठे दस्तावेज़ बनाने या रखने पर सात साल तक की जेल हो सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.?यह एक गैर-ज़मानती अपराध है.
इस धारा के तहत आरोपी होने की स्थिति में, इन बातों का ध्यान रखा जाता है:
धोखा देने या जालसाज़ी करने के लिए दस्तावेज़ों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना, बदलना या उनमें छेड़छाड़ करना
किसी को धोखाधड़ी वाला दस्तावेज़ या गलत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना
उचित प्राधिकरण के बिना किसी दस्तावेज़ को संशोधित करना
बेईमानी से किसी व्यक्ति को किसी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पर हस्ताक्षर, मुहर, निष्पादन या परिवर्तन करने के लिए मजबूर करना
हालांकि, धारा 464 में स्वयं कोई दंड निर्धारित नहीं है. अक्सर, झूठे दस्तावेज़ बनाने के मामले में जालसाज़ी (आईपीसी धारा 465) या गंभीर जालसाज़ी (आईपीसी धारा 467 या 468) के तहत आरोप लगाया जाता है. लेकिन यहां विहारी पुत्र सर्वजीत की जमीन हड़पने बाले भू माफियाओं द्वारा फ़र्ज़ी दास्ताबेज बनाकर फ़र्ज़ी बैनामा करा लिया लेकिन कोई भी ठोस कार्यवाही नही हुई है। बल्कि मामले को गुमराह कर दबाने का काम किया जा रहा है।कार्यवाही छोड़कर बैनामा कैंसिल कराने में जुटे भू-माफिया-सिविल कोर्ट में बाद दायर
रामनगर-कानूनी तौर पर फ़र्ज़ी दस्तावेज बनाने पर आईपीसी की धारा 464 के तहत, धोखाधड़ी के इरादे से झूठे दस्तावेज़ बनाने या रखने पर सात साल तक की जेल हो सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.?यह एक गैर-ज़मानती अपराध है.
इस धारा के तहत आरोपी होने की स्थिति में, इन बातों का ध्यान रखा जाता है:
धोखा देने या जालसाज़ी करने के लिए दस्तावेज़ों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना, बदलना या उनमें छेड़छाड़ करना
किसी को धोखाधड़ी वाला दस्तावेज़ या गलत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना
उचित प्राधिकरण के बिना किसी दस्तावेज़ को संशोधित करना
बेईमानी से किसी व्यक्ति को किसी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पर हस्ताक्षर, मुहर, निष्पादन या परिवर्तन करने के लिए मजबूर करना
हालांकि, धारा 464 में स्वयं कोई दंड निर्धारित नहीं है. अक्सर, झूठे दस्तावेज़ बनाने के मामले में जालसाज़ी (आईपीसी धारा 465) या गंभीर जालसाज़ी (आईपीसी धारा 467 या 468) के तहत आरोप लगाया जाता है. लेकिन यहां विहारी पुत्र सर्वजीत की जमीन हड़पने बाले भू माफियाओं द्वारा फ़र्ज़ी दास्ताबेज बनाकर फ़र्ज़ी बैनामा करा लिया लेकिन कोई भी ठोस कार्यवाही नही हुई है। बल्कि मामले को गुमराह कर दबाने का काम किया जा रहा है।
इस धारा के तहत आरोपी होने की स्थिति में, इन बातों का ध्यान रखा जाता है:
धोखा देने या जालसाज़ी करने के लिए दस्तावेज़ों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना, बदलना या उनमें छेड़छाड़ करना
किसी को धोखाधड़ी वाला दस्तावेज़ या गलत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना
उचित प्राधिकरण के बिना किसी दस्तावेज़ को संशोधित करना
बेईमानी से किसी व्यक्ति को किसी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पर हस्ताक्षर, मुहर, निष्पादन या परिवर्तन करने के लिए मजबूर करना
हालांकि, धारा 464 में स्वयं कोई दंड निर्धारित नहीं है. अक्सर, झूठे दस्तावेज़ बनाने के मामले में जालसाज़ी (आईपीसी धारा 465) या गंभीर जालसाज़ी (आईपीसी धारा 467 या 468) के तहत आरोप लगाया जाता है. लेकिन यहां विहारी पुत्र सर्वजीत की जमीन हड़पने बाले भू माफियाओं द्वारा फ़र्ज़ी दास्ताबेज बनाकर फ़र्ज़ी बैनामा करा लिया लेकिन कोई भी ठोस कार्यवाही नही हुई है। बल्कि मामले को गुमराह कर दबाने का काम किया जा रहा है।
कार्यवाही छोड़कर बैनामा कैंसिल कराने में जुटे भू-माफिया-सिविल कोर्ट में बाद दायर
किन्ही कारणों से ज़मीन की रजिस्ट्री को कैंसिल कराने के लिए 90 दिनों का समय होता है. अगर रजिस्ट्री में कोई आपत्ति आती है, तो उसे इसी समय सीमा में रद्द कराया जा सकता है. कई मामलों और जहगों पर ऑनलाइन तरीके से रजिस्ट्री कैंसिल करने की सुविधा होती है