‘जिस अस्पताल में मेरी बेटी 4 साल से काम कर रही थी, वहीं उससे गैंगरेप हुआ। अस्पताल के डॉक्टरों और वार्ड बॉय ने उसे जहर का इंजेक्शन देकर मार डाला। बिटिया की लाश मिली तो उसकी गर्दन पर खरोचें थीं। हाथ पर चोट के निशान थे। शरीर के निचले हिस्से के कपड़े गाय
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ये यूपी के प्रतापगढ़ की रहने वाली गुड़िया की मां का दर्द है। 21 साल की गुड़िया शहर के प्राइवेट अस्पताल में नर्स थी। 27 मार्च को ड्यूटी के वक्त उसकी मौत हो गई। वो दलित समुदाय से थी, इसलिए उसकी मौत के बाद से इलाके में तनाव है। गुड़िया की मां आगे कहती हैं, ‘मैं विकलांग हूं, पति नहीं हैं। बेटी ही कमाती थी। उसकी मौत के बाद पुलिस केस दबाने में लगी है। कहती है मेरी बेटी का चाल-चलन ठीक नहीं था।‘
अस्पताल के डॉक्टर अमित कुमार पांडेय, मैनेजर सुनील यादव और वार्ड बॉय शहबाज पर गुड़िया से गैंगरेप और मर्डर का आरोप है। यूपी पुलिस तीनों को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है। उधर, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत की सही वजह पता नहीं चली है, इसलिए अब विसरा रिपोर्ट का इंतजार है।
दैनिक भास्कर प्रतापगढ़ जिले की रानीगंज तहसील में विक्टिम और आरोपियों के घर पहुंचा। हम उस अस्पताल में भी गए, जहां लड़की से गैंगरेप किए जाने के आरोप लगे हैं। गांववालों से लेकर मामले की जांच में जुटे पुलिस अधिकारियों से बात की। गैंगरेप का आरोप होने की वजह से नर्स की पहचान छिपाई गई है। गुड़िया बदला हुआ नाम है।

गुड़िया प्रतापगढ़ के इसी हॉस्पिटल में नर्स थी। यहां के डॉक्टर, मैनेजर और वार्ड बॉय पर गैंगरेप और मर्डर का आरोप है।
अस्पताल में उस रात क्या हुआ था… बेटी ड्यूटी पर गई, 2 घंटे बाद तबीयत बिगड़ने की खबर मिली 27 मार्च की बात है। शाम के 6 बज रहे थे। गुड़िया ड्यूटी पर जाने की तैयारी कर रही थी। मां और छोटी बहन रसोई में थीं। गुड़िया ने मां को बताया कि हॉस्पिटल में ज्यादा मरीज आ रहे हैं। डॉक्टर बोल रहे थे कि ड्यूटी का टाइम बढ़ा सकते हैं। इतना बोलकर वो 6:30 बजे साइकिल से हॉस्पिटल चली गई।
गुड़िया की मां कहती हैं, ‘बेटी के जाने के बाद मैंने और छोटी बेटी ने खाना खाया। रसोई साफ कर हम लेटने जा रहे थे कि रात 8:30 बजे अस्पताल से फोन आया। हमें बताया कि गुड़िया की तबीयत बिगड़ गई है। तुम लोग जल्दी अस्पताल आ जाओ। ये बात सुनकर हम तुरंत दुर्गागंज भागे, जहां अस्पताल था। रास्ते में यही सोच रहे थे कि 2 घंटे पहले तो सही-सलामत ड्यूटी पर गई थी, फिर अचानक क्या हो गया।‘
‘मैं अस्पताल पहुंची तो गेट पर मैनेजर साहब सुनील, विद्यासागर और शहबाज मिले। उन्होंने मुझे गेट पर ही रोक लिया। कहा- गुड़िया जहर खाकर बेहोश हो गई है, उसे प्रतापगढ़ ले जा रहे हैं।‘

आरोपी एंबुलेंस में ही डेडबॉडी छोड़कर भागने लगे, लोगों ने पकड़ा गुड़िया की मां आगे बताती हैं, ‘थोड़ी देर बाद अस्पताल से एंबुलेंस निकली। वो प्रतापगढ़ जाने की बजाय हमारे गांव के रास्ते पर मुड़ गई। एंबुलेंस में शहबाज और सुनील बैठे थे। मुझे कुछ शक हुआ तो मैंने एंबुलेंस को रोकने के लिए कहा।‘
‘एंबुलेंस रुकी तो भीड़ जुट गई। ये देखकर शहबाज और सुनील गुड़िया को एंबुलेंस में ही छोड़कर भागने लगे। गांववालों ने उन्हें पकड़ लिया। मैंने गुड़िया को देखा, वो स्ट्रेचर पर बेसुध पड़ी थी। उसकी सांस नहीं चल रही थी। उसके गले, हाथ और बदन पर जगह-जगह खरोंच लगी थीं। शरीर के निचले हिस्से के कपड़े गायब थे।‘

मैं बहुत डर गई थी, मैंने वहां मौजूद एक-दो लोगों को बुलाकर गुड़िया को देखने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि बेटी अब जिंदा नहीं है।
इतनी बात कहकर गुड़िया की मां जोर-जोर से रोने लगती हैं। छोटी बेटी उन्हें चुप कराती है।
गुड़िया की बहन के मुताबिक, वो रात में ही मां के साथ रानीगंज थाने पहुंची। उन्होंने 6 लोगों डॉ. अमित पांडेय, सुनील कुमार, विद्यासागर, शहबाज, दाई मनोरमा देवी और अस्पताल के मालिक के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
सड़क पर डेडबॉडी रखी, प्रदर्शन करने पर लाठियों से मारा गुड़िया की मौत हुए 10 घंटे बीत चुके थे, लेकिन अस्पताल चल रहा था। आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने से नाराज करीब 250 गांववाले 28 मार्च की सुबह अस्पताल पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया। गुस्साई भीड़ नारेबाजी करते हुए अस्पताल में घुस गई और तोड़फोड़ करने लगी।
उधर, घटना की सूचना मिलते ही CO रानीगंज विनय प्रभाकर साहनी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस लोगों को समझाने में जुटी थी, इसी बीच भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। लोगों को काबू करना मुश्किल हो गया था।
पत्थरबाजी के दौरान CO विनय प्रभाकर के सिर पर चोट आई। उनके अलावा 10 से ज्यादा पुलिसवाले घायल हो गए। इसके बाद दूसरे थानों की फोर्स बुलाई गई।

28 मार्च की सुबह कार्रवाई की मांग को लेकर विक्टिम के परिवार और गांववालों ने प्रदर्शन किया था। पुलिस को उन्हें कंट्रोल करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।
विक्टिम के गांव में रहने वाली शारदा सरोज लाठीचार्ज पर सवाल उठाती हैं। कहती हैं, ‘रात 8 बजे बिटिया की मौत हुई और सुबह 9 बजे तक FIR तक नहीं लिखी गई। अस्पताल पर भी कार्रवाई नहीं हुई। तभी हम लोगों ने सड़क पर गुड़िया का शव रखकर प्रदर्शन किया।‘
‘इतनी सी बात पर CO साहब गुस्सा हो गए और लाठीचार्ज कर दिया। पुरुष पुलिसकर्मी महिलाओं के सिर पर, शरीर पर लाठियां मार रहे थे। हमें इतना मारा कि खून जम गया।‘

ये तस्वीर भी 28 मार्च की है, जब प्रदर्शन और लाठीचार्ज के बीच CO विनय प्रभाकर के सिर पर चोट लग गई।
लाठीचार्ज के बाद पुलिस एक्शन में आई, 3 आरोपियों को अरेस्ट किया गांववालों के हंगामे की खबर प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पहुंची। SP डॉ. अनिल कुमार रानीगंज पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों को बाहर निकलवाकर सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया। सिचुएशन कंट्रोल में लाकर गुड़िया के परिवार से बात की। फिर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और प्राइवेट अस्पताल को सील करवाया।
घटना के बाद पुलिस ने अस्पताल के डॉक्टर अमित कुमार पांडेय, मैनेजर सुनील यादव और वॉर्ड बॉय शहबाज को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़ित परिवार की तहरीर पर 6 लोगों के खिलाफ SC-ST एक्ट, हत्या और गैंगरेप की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

प्रतापगढ़ पुलिस ने डॉक्टर अमित कुमार पांडेय, मैनेजर सुनील यादव और वार्ड बॉय शहबाज को गिरफ्तार किया है।
प्रतापगढ़ पुलिस क्या कह रही… मामले की जांच कर रहे रानीगंज थाने के सब-इंस्पेक्टर रोहित कुमार यादव कहते हैं, ‘मामले की शुरुआती जांच में पता चला है कि लड़की ने अस्पताल में ड्यूटी के दौरान जहर खाया था। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी। उसे बचाने के लिए डॉक्टर अमित और उसके साथियों ने इलाज किया, लेकिन उसकी मौत हो गई। लड़की की मौत पर ये लोग डर गए, खुद को बचाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने मौके से सबूत मिटा दिए।‘
SP बोले- गैंगरेप हुआ या नहीं, विसरा रिपोर्ट का इंतजार प्रतापगढ़ में नर्स की मौत को 7 दिन बीत चुके हैं। 3 आरोपी जेल में हैं। रानीगंज थाना पुलिस की टीम रोज पीड़ित परिवार से मिल रही है। SP डॉ. अनिल कुमार लगातार विक्टिम फैमिली के कॉन्टैक्ट में हैं। पुलिस ने अब तक 2 बड़े खुलासे किए हैं।
SP डॉ. अनिल कुमार कहते हैं, ‘लड़की के परिवार की तहरीर पर हमने अस्पताल सीज करवाया और मामले की जांच की गई। इन्वेस्टिगेशन में पता चला है कि लड़की और वार्ड बॉय शहबाज के बीच संबंध थे। वो शहबाज पर शादी का दबाव बना रही थी। लड़के ने इनकार कर दिया, तो उसने जहर खा लिया। इसके बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई।’
‘पूछताछ में शहबाज ने जुर्म कबूलते हुए बताया है कि उसने कई बार लड़की से संबंध बनाए थे। पुलिस को गुड़िया और शहबाज की वॉट्सएप चैट से पता चला है कि दोनों के बीच कई दिनों से शादी को लेकर झगड़ा हो रहा था। इसके सबूत हमारे पास हैं।’

क्या नर्स से गैंगरेप हुआ प्रतापगढ़ पुलिस अभी विसरा जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि लड़की से गैंगरेप हुआ था या नहीं। पुलिस की फोरेंसिक टीम इसकी जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच में अब तक गैंगरेप जैसी बात कन्फर्म नहीं हुई है, लेकिन हमने सभी आरोपियों पर गैंगरेप की धारा में ही केस दर्ज किया है।
आरोपी के पिता बोले- शहबाज अस्पताल पहुंचा, लड़की की मौत हो चुकी थी गुड़िया के परिवार से मिलने के बाद हम आरोपी शहबाज के घर पहुंचे। शहबाज का घर विक्टिम फैमिली के घर से 4 किलोमीटर दूर कौलपुर गांव में है। उसके दो भाई मुंबई में काम करते हैं। वो घर पर अम्मी और अब्बू के साथ रहता है।
कच्चे मकान में भाइयों के साथ बैठे सादिक बेटे शहबाज की गिरफ्तारी के बाद से परेशान हैं। वो प्रशासन पर बेटे को झूठे केस में फंसाने का आरोप लगाते हुए कहते हैं, ‘मेरे बेटे पर गैंगरेप की धाराएं लगाकर उसे बंद कर दिया है। उस पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं।‘
‘घटना के दिन शहबाज बाल कटवाने गया था। शाम को उसे बार-बार फोन करके ड्यूटी पर बुलाया गया। कहा गया कि एक मरीज की हालत बहुत सीरियस है, जल्दी आ जाओ। वो अस्पताल पहुंचा, तब तक लड़की की मौत हो चुकी थी।‘
पुलिस की जांच में सामने आया है कि शहबाज और लड़की के बीच संबंध थे, इस पर क्या कहेंगे? सादिक जवाब देते हैं, ‘शहबाज एक साल से अस्पताल में काम कर रहा था, अगर ऐसा कुछ होता तो अस्पताल के डॉक्टर हमें बताते।’

‘पुलिस हत्या को ‘लव-जिहाद’ का रंग दे रही’ प्रतापगढ़ की कुंडा विधानसभा सीट से विधायक राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का डेलिगेशन विक्टिम की मां की केस लड़ने में मदद कर रहा है। पार्टी की लीडर वंदना उपाध्याय इस केस को पुलिस की लापरवाही मानती हैं। वे कहती हैं, ’पुलिस पूरे मामले को दबाना चाहती है। प्रशासन अस्पताल के रसूखदारों पर कड़ी कार्रवाई करने के बजाय दूसरे धर्म के लड़के को गिरफ्तार कर मामले को लव-जिहाद का रंग देना चाह रहा है।’

वंदना उपाध्याय कहती हैं, ’जो बेटी अब दुनिया में नहीं है, पुलिस उसके चरित्र पर सवाल उठा रही है। इससे दुखद और कुछ नहीं हो सकता। आरोपियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए था। इसकी बजाय गरीब दलित परिवार का शोषण किया गया। उन पर लाठीचार्ज किया जा रहा है।’
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