‘साल में दो बार नवरात्रि आती है। इस मौके पर तो मैं चाहूंगा कि पूरी दिल्ली में मीट की दुकानें बंद रखी जाएं। अगर ऐसा संभव न हो तो कम से कम मेरी विधानसभा में तो बंद रहे।’
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दिल्ली के पटपड़गंज से BJP विधायक रविंद्र सिंह नेगी ने 25 मार्च को पहले प्रशासन और नगर निगम को लेटर लिखा। फिर मीट की दुकानों पर जाकर दुकानदारों से बात भी की। दिल्ली में त्योहार पर मीट दुकानें बंद करने की मांग करने वाले नेगी अकेले नहीं हैं। त्रिलोकपुरी से BJP विधायक रविकांत उज्जैनवाल भी उनके साथ हैं।
नवरात्रि के साथ ही ईद भी है। दुकानदारों को डर था कि अगर दुकानें बंद हुईं तो ईद पर भी असर पड़ेगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ।
दिल्ली से शुरू हुई ये मांग अब देश के दूसरे हिस्सों में भी पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश में CM योगी के निर्देश के बाद नवरात्रि भर मंदिरों के 500 मीटर के दायरे में कोई मांस-मछली की दुकान नहीं खुलेगी। रामनवमी को सभी दुकानें बंद रहेंगीं। मध्य प्रदेश में भी भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में रामनवमी पर मीट दुकानें बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, दिल्ली में अब तक कहीं ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। मीट दुकानें बंद करने की मांग का यहां के बाजार में क्या असर है। इलाके के दुकानदार और लोग इसे कैसे देख रहे हैं। ये जानने के लिए हम दिल्ली में विधायक नेगी के पटपड़गंज इलाके में पहुंचे।

दिल्ली के पटपड़गंज से BJP विधायक रविंद्र सिंह नेगी अपने इलाके की मीट दुकानों पर जा रहे हैं और नवरात्रि भर दुकानदारों से दुकानें बंद रखने के लिए कह रहे हैं।
दिल्ली का पटपड़गंज… दुकानदार बोले- किराया कैसे भरेंगे, रोजी-रोटी कैसे चलेगी सबसे पहले हम पटपड़गंज पहुंचे। यहां मीट की दुकान चलाने वाले ज्यादातर दुकानदारों ने कैमरे पर बात करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वे बात करके अपना कारोबार नहीं खराब करना चाहते। हालांकि कुछ दुकानदार बातचीत करने को राजी हुए। वे कहते हैं, ‘ये सिर्फ राजनीति के लिए किया जा रहा है। दुकानें बंद करने से सिर्फ हमारा कारोबार खराब होगा।’
पटपड़गंज के वेस्ट विनोद नगर इलाके में मीट की दुकान चलाने वाले मोहम्मद साबिल कहते हैं, ‘अब तक सरकार की ओर से कोई गाइडलाइन नहीं आई है। अगर कोई सरकारी आदेश आता है तो उसका पालन करेंगे। हालांकि इससे हमारी दिक्कत ही बढ़ेगी।‘

पटपड़गंज से BJP विधायक रविंद्र नेगी ने इससे पहले मंगलवार को इलाके में मटन की दुकानें बंद कराने के लिए भी अभियान चलाया था। तब से मंगलवार को मीट दुकानें बंद रहने लगीं। हमनें यहां कई दुकानदारों से पूछा कि क्या वे मंगलवार को दुकान बंद रखते हैं तो उन्होंने हामी भरी। हालांकि इसे लेकर सरकार या नगर निगम ने कोई आदेश जारी नहीं किया है।
वे कहते हैं, ‘पहले ये सब नहीं होता था। अभी कुछ महीने से शुरू हुआ है। अगर हमारे विधायक कह रहे हैं तो ये मानना ही पड़ेगा।‘ हमने ईद के मौके पर दुकानें बंद करने को लेकर पूछा तो वे कहते हैं, ‘साल में एक बार ही ईद आती है, इसलिए दिक्कत तो होगी। अगर सरकार गाइडलाइन जारी करेगी तो मानना ही पड़ेगा।‘
साबिल के अलावा कोई मीट दुकानदार ऑन कैमरा बात करने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद हमने इलाके के कुछ और लोगों से बात की।

ईद पर असर नहीं, जिनकी दुकानें बंद होंगी वो दिक्कत में आ जाएंगे वेस्ट विनोद नगर के रहने वाले शमीम आलम उसी इलाके में AC की दुकान चलाते हैं। वे मीट दुकानें बंद करने की मांग को गलत ठहराते हैं। 34 साल के शमीम कहते हैं, ‘ये सब करके मुसलमानों को टारगेट किया जाता है, लेकिन ज्यादा मीट खाने वाले तो गैर-मुस्लिम ही हैं।‘ शमीम आरोप लगाते हुए कहते हैं-

असल में ऐसी बातें करके उनका (रविंद्र नेगी) मकसद लाइमलाइट में बने रहना है। उन्हें पता है कि क्या बोलने से किस तरह का फायदा मिलेगा। इसलिए वे अनर्गल बातें करते रहते हैं।
इसी इलाके में हमें 42 साल के मोहम्मद इसरार भी मिले। वो सैलून चलाते हैं। इसरार कहते हैं, ‘मीट दुकानदारों का भी काम-रोजगार है। उनके बारे में सोचना चाहिए। 8-10 दिन दुकानें बंद हो जाएंगी तो इनके बाल-बच्चे क्या खाएंगे। सरकार को इनके बारे में भी सोचना चाहिए। बाकी सरकार जो चाहेगी, वो होगा।‘
मीट की दुकानें बंद होने से ईद के त्योहार पर कितना असर होगा? इस पर शमीम और इसरार कहते हैं, ‘ये मीठी ईद है इसलिए ज्यादा फर्क तो नहीं पड़ेगा। हालांकि, जिन दुकानदारों की दुकानें बंद होंगी, उनके त्योहार खराब हो जाएंगे। ऐसी मांगें क्यों उठ रही हैं? इसके जवाब में वे कहते हैं कि ये तो नेता ही बता सकते हैं।‘

विधायक जानबूझकर मुस्लिमों को टारगेट कर रहे पटपड़गंज में मस्जिद से इफ्तार करके निकले असलम खां विधायक रविंद्र नेगी से नाराज नजर आए। वे कहते हैं, ‘पहले यहां ऐसा कुछ नहीं था। लोग मिल-जुलकर त्योहार मनाते रहे हैं। 2025 के चुनाव में जीतकर जब से ये विधायक बने हैं, तब से हिंदू-मुस्लिम करते रहते हैं। कभी इसकी दुकान बंद करवाओ, कभी उसकी बंद करवाओ, इस तरह की राजनीति कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।‘
‘हिंदुओं की ऐसी कोई मांग नहीं है। उन्होंने दुकानें बंद करवाने की बात नहीं की। रविंद्र नेगी जबरदस्ती भड़काऊ भाषण दे रहे हैं और मुस्लिमों के खिलाफ रहने वाले 8-10 लोगों को लेकर ये लोगों के बीच विवाद फैला रहे हैं। वो फेम पाने के लिए हिंदुओं के बीच खुद को उनका कर्ता-धर्ता दिखाते हैं। मुस्लिमों को टारगेट करते हैं।‘

हिंदू दुकानदार बोले… ये जोर-जबरदस्ती अच्छी नहीं, मीट खाने वालों में हिंदू और मुस्लिम दोनों इसके बाद हमने इलाके में रह रहे हिंदू परिवार के कुछ लोगों से बात की। पीर वाली गली की एक दुकान से मीट खरीदकर लौट रहे रोहित का मानना है कि ऐसा नहीं होना चाहिए।
वे कहते हैं, ‘दुकानदारों को हर महीने किराया देना होता है। परिवार का खर्च चलाना होता है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ मुसलमान चिकन खाते हैं। हिंदू भी खाते हैं। कई लोग नवरात्रि में भी खाते हैं। ऐसी पाबंदियों का असर सब पर होगा।‘
पटपड़गंज मार्केट में ज्वेलरी शॉप चलाने वाले किशोर महाजन कहते हैं, ‘जो खुले में बेच (मीट) रहे हैं, उन पर पाबंदी लगनी चाहिए। हालांकि जोर-जबरदस्ती किसी के साथ अच्छी नहीं है। ये हर एक की रोजी-रोटी का मसला है। मीट बेचने वाले हिंदू भी हैं और मुस्लिम भी। इसे खाने वालों में भी हिंदू और मुस्लिम दोनों हैं।’
इसी मार्केट में दुकान चलाने वाले राकेश कुमार का भी मानना है कि जिसको जैसा दुकान खोलना है वो खोले, जो बंद रखना चाहता है वो बंद रखे। इसे लेकर किसी से कोई जोर-जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।

अब जान लीजिए कि पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…
BJP विधायक नेगी बोले- अगर दुकानदार राजी हैं, तो किसी को एतराज क्यों रविंद्र नेगी ने ईस्ट दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट और MCD उपायुक्त (शाहदरा दक्षिण जोन) को लेटर लिखकर नवरात्रि में मीट की दुकानें बंद करवाने का अनुरोध किया। हमने इस मसले पर रविंद्र सिंह नेगी से भी बात की।
नेगी कहते हैं, ‘अगर कोई सनातनी हिंदुओं के लिए बोल रहा है तो इसमें गलत क्या है। नवरात्रि से हर हिंदू की आस्था जुड़ी हैं। जब वो मंदिर जाते हैं और रास्ते में उनके सामने मांस की दुकानें खुली होती हैं तो कहीं ना कहीं उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है।‘
‘इलाके के लोग मेरे पास आ रहे हैं। वो मांग कर रहे हैं कि मैं जनप्रतिनिधि होने के नाते नवरात्रि में मंदिरों के सामने कम से कम मांस दुकानें बंद करवाऊं।‘ हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने के आरोपों पर नेगी कहते हैं, ‘अगर दुकानदार हमारी मांगें मान रहे हैं तो इसमें किसी को क्या एतराज हो सकता है। एतराज तो उन लोगों को है, जो हिंदू-मुसलमान की राजनीति करते हैं।’
रविंद्र सिंह नेगी ने लेटर में लिखा…

हमने पूछा कि अगर दिल्ली सरकार आपकी ये मांग नहीं मानती है तो आप क्या करेंगे? इस पर वे कहते हैं, ’दिल्ली सरकार इसे लागू करे या न करे। हमारी दुकानदारों और व्यापारियों से बात हो गई है। जब वे समर्थन को तैयार हैं, तो फिर इसमें दिक्कत क्या है।’
रविंद्र नेगी पटपड़गंज सीट से पहली बार विधायक चुने गए हैं। वे विनोद नगर से पार्षद भी रह चुके हैं। 2023 में नवरात्रि से पहले उनका जबरदस्ती मीट दुकानें बंद करवाने का वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद उनके कई ऐसे वीडियो सामने आ चुके हैं। इनमें से एक में वे मुस्लिम दुकानदारों को ठेले पर नाम लिखने के लिए धमका रहे थे।
हमने पूछा कि आपने पहले भी दुकान पर नेमप्लेट लगाने जैसे अभियान चलाए। इस पर वे कहते हैं, ’इसमें गलत क्या है। दुकान पर अपना नाम लिखने में क्या दिक्कत है। अभी त्योहार का समय है। लोग पनीर-दूध वगैरह खरीदेंगे।’

दुकानों पर अगर ‘जय माता दी पनीर भंडार’ या ‘मां शेरा वाली पनीर भंडार’ लिखा है, लेकिन पेमेंट करने पर नाम अखलाक या यूसुफ आता है। इससे लोगों को दिक्कत होती है।
कांग्रेस सांसद बोले- अब क्या ये भी BJP तय करेगी कब-कौन क्या खाएगा कांग्रेस समेत दूसरे सियासी दल इस मांग की आलोचना कर रहे हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी का कहना है कि अब क्या BJP तय करेगी कि किस महीने में कौन-क्या खाएगा और कैसे कपड़े पहनेगा?
‘मुझे हैरत होती है कि BJP के टॉप लीडर्स अपने नेताओं के बयान नहीं सुनते हैं क्या। अगर सुनते हैं तो फिर इनसे पूछते क्यों नहीं कि क्या शेख हसीना को भी मीठी ईद पर सिर्फ सेवइयां खिलाएंगे? क्या सऊदी के क्राउन प्रिंस को बुलाएंगे तो उनसे कहेंगे कि हमारे यहां नवरात्रि चल रही है, आप सिर्फ मीठी सेवई खाइए, नॉनवेज नहीं खा सकते।‘
इन मांगों पर सवाल उठाते हुए इमरान कहते हैं, ‘BJP कौन सा देश और समाज बनाना चाहती है। पार्टी के कुछ नेता इस तरह के बयान देकर मीडिया में फुटेज लेना चाहते हैं, उन पर कोई एक्शन क्यों नहीं होता।‘
AAP सांसद ने पूछा- क्या नॉनवेज बेचने वाले BJP नेताओं के रेस्टोरेंट बंद होंगे आम आदमी पार्टी से सांसद संजय सिंह ने कहा कि भाजपाइयों को ये ड्रामा और नौटंकी बंद कर देनी चाहिए। अगर वे कहते हैं कि मीट की दुकानें बंद होनी चाहिए। फिर हिम्मत है तो KFC बंद करवाकर दिखाएं।‘

वे सवाल करते हुए कहते हैं, ‘अगर ऐसा ही है फिर शराब पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगना चाहिए। BJP के लोग बहुत कन्फ्यूज हैं। ये सब उन्हें पहले तय करना चाहिए।‘
एक्सपर्ट: लोगों की पसंद पर प्रतिबंध लगाना, नया ट्रेंड नहीं इस मामले पर हमने पॉलिटिकल साइंटिस्ट शिवानी कपूर से बात की। वे कहती हैं, ‘हमारे समाज में ऐसी चीजें लंबे समय से हैं। दक्षिणपंथी राजनीति इस तरह के मुद्दों को खास तरीके से देखती है। वो पहले से ही कंजर्वेटिव हैं। उन्हें ज्यादा विविधता पसंद नहीं है। इसलिए अलग-अलग फूड चॉइस या लाइफस्टाइल को स्वीकार करना उनके लिए मुश्किल है।‘
शिवानी आगे बताती हैं, ‘इस तरह के फैसलों से हम लोगों की पसंद को कम कर रहे हैं। उसे प्रतिबंधित कर रहे हैं। ये नया ट्रेंड नहीं है। अभी सोशल मीडिया का ज्यादा प्रभाव है। इसलिए हम लोग हर चीज पर बहुत जल्दी आहत हो जा रहे हैं। बातचीत का मौका ही नहीं दे रहे हैं। तुरंत प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसलिए अभी ये ज्यादा देखने को मिल रहा है।‘
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