Skip to main content

Naradsamvad

Cheepo-cheepo Gandharva raga resonated on the banks of Ganga in Kashi | काशी के गंगा घाट पर गूंजा चीपो-चीपो गंदर्भ राग: धोबिया डांस देखने काशीवासियों का हुआ जुटान,सजी मूर्खों की महफिल, खूब चले व्यंग्य बाण – Varanasi News

Naradsamvad
Naradsamvad - Narad news Agency
4 Min Read

[ad_1]

Ad image

काशी के राजेंद्र प्रसाद घाट पर बने ओपन थिएटर यानी घाटों की सीढ़िया पर मौजूद पब्लिक की भारी भीड़ के बीच महामूर्ख मेले का आयोजन हुआ। सबसे बड़ी बात यह है कि इस आयोजन में एक से बढ़कर एक बुद्धिजीवी रहते हैं, लेकिन नाम इसे महामूर्ख मेला दिया जाता है। काशीव

.

महामूर्ख रिति-रिवाज से हुई शादी।

महामूर्ख रिति-रिवाज से हुई शादी।

लड़का बना दुल्हन लड़की बनी दुल्हा,कवि ने कराया विवाह

इस आयोजन में दुल्हन की जगह लड़का दूल्हे की जगह लड़की और पंडित जी की जगह कवि जो अगड़म बगड़म शेरो शायरी के साथ शादी पूरी करते हैं और फिर शादी टूट भी जाती है। इस बार इस परंपरा को निभाने के लिए शहर के बड़े डॉक्टर शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी दुल्हन की भूमिका में थे जबकि उनकी पत्नी और प्रसिद्ध डॉ.नेहा द्विवेदी दूल्हे की भूमिका में थी। बंगाली रीति रिवाज का मुकुट धारण करके पत्नी दूल्हा बनकर बारात लेकर पहुंची।

राजस्थानी थीम पर कलाकारों ने किया नृत्य।

राजस्थानी थीम पर कलाकारों ने किया नृत्य।

ALSO READ  BYD का लग्जरी ब्रांड Denza 13 नवंबर 2026 को भारत में होगी लॉन्च, बाजार में आएगी प्रीमियम इलेक्ट्रिक MPV

पुलिस ने साइबर क्राइम पर रखा अपना पक्ष

इस परंपरा को निभाने के बाद कवियों की महफिल सजी बनारस समेत उत्तर प्रदेश और देश के अलग-अलग हिस्सों से मौजूद कवियों ने खूब समां बांधा एक से शहर हंसी दीपावली के बीच जमकर शेरो शायरी और व्यंग्य के बाण चले। कवियों ने एक से बढ़कर एक व्यंग पेश करते हुए लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया। उत्तर प्रदेश पुलिस व साइबर क्राइम पुलिस के प्रतिनिधियों ने साइबर क्राइम पर अपना पक्ष रखकर उपस्थित उन मूर्खों को जागरूक किया जिन को साइबर ठग लूट लिया करते हैं जिससे वे दोबारा मूर्ख ना बन सके।

धोबिया डांस जमकर झूमें काशीवासी।

धोबिया डांस जमकर झूमें काशीवासी।

ALSO READ  SEBI का बड़ा एक्शन: Avadhut Sathe Trading Academy को 546 करोड़ रुपये वापस करने का आदेश

मंत्री, सांसद, विधायक, चिकित्सक दूल्हा-दुल्हन बन चुके हैं

महामूर्ख मेले की शुरुआत 1969 में दशाश्वमेध घाट पर बजड़े पर हुई। इसमें यूपी के राज्यपाल सर होमी मोदी के पुत्र सांसद पीलू मोदी दूल्हा व काशी के रईस महेंद्र शाह को दुल्हन बनाया गया था। अब तक महामूर्ख सम्मेलन में कई मंत्री, सांसद, विधायक, चिकित्सक दूल्हा-दुल्हन बन चुके हैं। महामूर्ख मेले के पहले संयोजक पं. धर्मशील चतुर्वेदी थे। उनके निधन के बाद सांड़ बनारसी व दमदार बनारसी इसका संयोजन कर रहे हैं।

अलग-अलग विधाओं के पुस्तकों का हुआ विमोचन।

अलग-अलग विधाओं के पुस्तकों का हुआ विमोचन।

पांच बार बदली जगह, नहीं बदला कलेवर

ALSO READ  लखनऊ में डेंगू का खतरा बढ़ा, 13 नए मामले मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया हाई अलर्ट

संयोजक दमदार बनारसी का कहना है कि 56 सालों में महामूर्ख मेले की जगह बदली लेकिन कलेवर में कोई बदलाव नहीं आया। बिना किसी निमंत्रण के काशी की जनता का समुदाय डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट के मुक्ताकाशीय मंच पर एकत्र होता है। 1971 में महामूर्ख मेला दशाश्वमेध घाट से भद्दोमल की कोठी में किया गया। इसमें लोगों की भीड़ कम होती थी। दस साल तक आयोजन के बाद दो साल तक चौक थाना परिसर में इसका आयोजन हुआ। इसके बाद 1983 से 1985 तक नागरी नाटक मंडली में इसका आयोजन हुआ। 1986 में इसे डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट पर लाया गया और 38 सालों से आज तक अनवरत इसका आयोजन हो रहा है।

[ad_2]

Source link

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
Account
Cart
Search
error: Content is protected !!