गोरखपुर पासपोर्ट ऑफिस में इन दिनों जमकर फर्जी ढंग से डबल पासपोर्ट बनवाने का खेल चल रहा है। अभी हाल ही में डबल पासपोर्ट बनवाने वाले दो दलाल जेल भेजे गए थे। लेकिन एक बार फिर फर्जीवाड़ा कर डबल पासपोर्ट बनवाने का खेल सामने आ गया। इस बार बड़हलगंज पुलिस ने
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पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन, हैरानी वाली बात यह है कि इस मामले में सिर्फ आवेदक और दलाल तो पकड़े जा रहे हैं, लेकिन डबल पासपोर्ट जारी करने वाले अधिकारी हर बार बच जा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि गोरखपुर पासपोर्ट ऑफिस पर पूरे दिन जमे रहने वाले दलाल अधिकारियों की मदद से जमकर फर्जीवाड़ा कर डबल पासपोर्ट बनवा रहे हैं।
पहले जानते हैं क्या है पूरा मामला…
लखनऊ से मिली थी शिकायत
गोरखपुर में फर्जी दस्तावेजों के जरिए एक व्यक्ति के दो पासपोर्ट बनवाने का मामला सामने आया है। भटनीपार, नेवाइजपार गांव के रहने वाले उपेंद्र नाथ यादव पर आरोप है कि उन्होंने अलग-अलग पते और हल्के नाम परिवर्तन के साथ दो पासपोर्ट बनवाए। इस मामले में बड़हलगंज कोतवाली में SI विनय कुमार पांडेय की तहरीर पर FIR दर्ज किया गया है।
जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा
लखनऊ स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से 27 जनवरी 2025 को आई रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने जब जांच शुरू की तो बड़ा खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि उपेंद्र नाथ यादव ने पहला पासपोर्ट अपने असली पते भटनीपार, नेवाइजपार के आधार पर बनवाया था। वहीं, दूसरा पासपोर्ट भगवानपुर माझा बेलवा, थाना एकौना, जनपद देवरिया के पते पर जारी करवाया गया। इसमें उन्होंने अपने नाम में आंशिक बदलाव कर ‘उपेंद्र यादव’ और पिता के नाम में भी हल्का परिवर्तन किया था, जिससे यह दूसरा पासपोर्ट वैध लगे।
पुलिस ने दर्ज किया FIR
बड़हलगंज कोतवाली पुलिस ने इस मामले में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी करने, फर्जी जानकारी देकर सरकारी अभिलेख तैयार कराने और पासपोर्ट अधिनियम के तहत संबंधित धाराओं में FIR दर्ज किया है।
क्या है आगे की कार्रवाई?
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी ने यह फर्जी पासपोर्ट किसी अवैध गतिविधि के लिए बनवाया था या फिर विदेश यात्रा में किसी पाबंदी से बचने के लिए उसने यह तरीका अपनाया। इसके अलावा, अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है कि कहीं उसने आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य प्रमाण पत्रों में भी हेरफेर तो नहीं किया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जल्द ही आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी और जरूरत पड़ने पर पासपोर्ट कार्यालय से और जानकारी मांगी जाएगी।
मार्च में पकड़े गए थे दो दलाल, अन्य की तलाश जारी
अभी बीते 8 मार्च को गोरखनाथ पुलिस दो बिचौलियों को गिरफ्तार किया था, जो फर्जी पासपोर्ट बनवाते हैं। इसके बाद से ही इस मामले में जांच तेज कर दी गई थी और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही थी। माना जा रहा है कि इस गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।
3 सिपाही भी हुए थे सस्पेंड
पकड़े गए बिचौलियों की पहचान गोरखनाथ इलाके के ललितापुरम निवासी विशाल सिंह और बेलघाट क्षेत्र के सिसवा बाबू निवासी हरेंद्र प्रताप के रूप में हुई थी। वहीं, इस मामले में गोपनीय तरीके से जांच कराने पर 3 सिपाहियों की लापरवाही सामने आयी थी। जिसके बाद SSP डॉ. गौरव ग्रोवर ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था।
पूरे दिन पासपोर्ट ऑफिस पर रहते हैं दलाल, दो पर पैनी नजर
इसके मामले के सामने आने के बाद ही SSP ने इसकी जांच LIU को सौंपी है। सूत्रों के मुताबिक, अब तक की जांच में 10 से अधिक ऐसे दलालों को चिन्हित किया जा चुका है। जो पूरे दिन पासपोर्ट दफ्तर के आसपास घूमते रहते हैं और यहां आने वाले अप्लिकेंट को पकड़कर उनका काम कराते हैं। इनमें बशरतपुर चर्च वाली गली में रहने वाले और ललितपुरम के पास स्थित शास्त्रीनगर के रहने वाले दो दलालों पर पुलिस और LIU की पैनी नजर है।
गार्डों पर भी पुलिस की नजर
सूत्रों के मुताबिक, इन दलालों की पासपोर्ट ऑफिस पर तैनात प्राइवेट सिक्योरिटी गार्डों और कर्मचारियों से सेटिंग बनी हुई है। गार्ड इन दलालों को ग्राहक भेजते हैं। जिसमें एक मास्क वाले गार्ड की चर्चा जोरों पर है। चर्चा है कि कोरोना खत्म होने के बाद भी यहां एक गार्ड हमेशा मास्क लगाए रहता है। जबकि, कर्मचारी इनके फंसे हुए काम कराते हैं।
पासपोर्ट ऑफिस के पीछे दलालों का ठिकाना
हालांकि, पासपोर्ट ऑफिस पर इन दिनों दो दलालों के जेल जाने के बाद पुलिस की सख्ती देख कई दलाल तो फरार हो गए हैं, लेकिन कुछ दलाल पासपोर्ट पासपोर्ट ऑफिस के पीछे उसी बिल्डिंग के पहले फ्लोर पर सुबह से शाम तक बैठे रहते हैं। अगर इस बीच पुलिस वहां पहुंची तो सभी इधर-उधर निकल जाते हैं। बीते दिनों जो जिन दो दलालों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, वह भी यहीं एक दुकान पर बैठते थे।
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गोरखपुर का पासपोर्ट सेवा केंद्र अब दलालों का बोलबाला है। यहां पहुंचने वाले अप्लीकेंट को गेट पर ही दलाल अपने झांसे में लेकर पकड़ लेते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी APO (असिस्टेंट पासपोर्ट ऑफिसर) या अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को नहीं है। बावजूद इसके यही वजह है कि फर्जी कागजात और दो अलग-अलग नाम से पासपोर्ट बनवाकर विदेश जाने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। इस मामले में जांच भी शुरू हो गई है। तो वहीं, कुछ लोगों के विरोध में लोगों ने शिकायत की है। पूरी खबर पढ़ें…