पराग दुग्ध डेयरी नाम पर खूब हो रही राजनीति- खाना खाने वालों के लिए बुलाई जाती है पुलिस ! ग्राहकों से होता है अभद्र ब्यवहार।
रेस्टोरेंट की पार्किंग में पी जाती है शराब- चखना पानी और सिगरेट देने आते हैं पराग के बेटर।
रिपोर्ट :- पत्रकार राघवेन्द्र मिश्रा और Annu Tiwari
हैदरगढ़ :- पराग रेस्टोरेंट पर सकूंन से खाना खाने के लिए इंसान अपने परिवार और दोस्तों के साथ जातें हैं इन रेस्टोरेंट में पार्टी का भी आयोजन किया जाता है जैसे बर्थडे पार्टी,एनिवर्सरी पार्टी के अवसर पर लोग अपने इष्ट मित्रों, परिजनों के साथ बड़ी उम्मीद से एक साथ खाना खाने के लिए जाते हैं। लेकिन हैदरगढ़ स्थित पराग #रेस्टोरेंट पर बिल्कुल न जाये ये बात हम इसलिए कह रहे है। कि जो रेस्टोरेंट के मैनेजर और उनका स्टॉप लोकल के संभ्रांत व्यक्ति का सम्मान न करें वहां परिवार ही नही अकेले भी जाना अच्छा नही लगता । ऐसा ही एक ताजा मामला आया है बीती रात खाना खाने गए गुड्डू मिश्रा (नरौली निवासी) और उनके साथियों के लिए पराग रेस्टोरेंट के स्टाफ ने पुलिस बुलाई, जानकारी पर पहुँचे इंस्पेक्टर अनिल पाण्डेय ने सीसीटीवी कैमरों को देखने के बाद मामले को रफा दफा किया। जबकि असल बात तो ये है कि किसी भी #ब्यक्ति को कुछ पता नही चला कि आखिर पुलिस क्यो आयी है। गुड्डू मिश्रा जबकि ने बताया कि न कोई मारपीट हुई न ही कोई मामला। फिर भी पुलिस ने जाकर परेशान करना शुरु किया और थाने लेकर आई। अब सवाल यह कि क्या पराग रेस्टोरेंट पर खाना खाने वाले हर युवक को अब #थाने का चक्कर लगाना पड़ेगा।
शाम होते ही पार्किंग में शुरू होते हैं शराब के #पैग के मयखाने- चखना और पानी की उचित व्यवस्था करते है पराग के वेटर !
शाम होते ही प्रयाग रेस्टोरेंट में शराबियों के मयखाने सजने लगते हैं कार में बैठे शराबियों को पानी, चखना और सिगरेट देने का काम रेस्टोरेंट के वेटर ट्रिप के लालच में करते हैं ऐसे माहौल में आप परिवार को लेकर जब खाना खाने जाते हैं तो ये वही शराबी परिबार के साथ अभद्रता से पेश आते हैं यही बो कारनामे हैं जिनके चलते लगातार पराग पर जाने वालों की संख्या कम होती जा रही है।
राजनीति की आड़ में पुलिस की अहम भूमिका ! पराग रेस्टोरेंट काट रहा माल- ग्राहकों को कर रहा बेज्जत।
राजनीति रसूख के चलते इन मामलों में पुलिस भी रेस्टोरेंट का ही पक्ष रखती है। सत्ता का दवाब और लोकल नेताओं की पकड़ ही ग्राहकों को बदनाम करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जिससे संभ्रात लोगो को दिक्कत का सामना करना पड़ता है और आम आदमी पैसे देने के बाद भी परिवार के साथ सुरक्षित तरीक़े से खाना खाने असमंजस महसूस करते हैं।