रिपोर्ट/विवेक शुक्ला।
सर्वर समस्या से समितियों पर खाद वितरण प्रभावित, किसानों ने निजी दुकानों पर मनमानी वसूली का लगाया आरोप
रामनगर बाराबंकी। खरीफ सीजन के बीच किसानों को खाद के लिए दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर सहकारी समितियों पर नेटवर्क और सर्वर की समस्या से खाद वितरण प्रभावित है, वहीं दूसरी ओर निजी उर्वरक विक्रेताओं पर अधिक कीमत वसूलने और टैगिंग की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। किसानों की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने गुरुवार को दूसरे दिन भी उर्वरक दुकानों पर सघन निरीक्षण अभियान चलाया।उप जिलाधिकारी आकांक्षा गुप्ता एवं कृषि विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. दलवीर सिंह ने संयुक्त रूप से विभिन्न उर्वरक दुकानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान भैरमपुर स्थित मेसर्स अब्दुल हई खाद भंडार में अनियमितताएं पाए जाने पर उसका विक्रय प्राधिकार पत्र निरस्त कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि अधिक दर पर यूरिया बिक्री की शिकायत की जांच वरिष्ठ प्राविधिक सहायक देशराज से कराई गई थी।जांच में स्टॉक में अंतर मिलने के साथ ही किसानों वीरेंद्र पुत्र राम दुलारे निवासी मथुरा भिटौली तथा समर सिंह पुत्र ननकऊ के बयानों के आधार पर शिकायत सही पाई गई। इसके बाद कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिलाधिकारी की अनुमति प्राप्त होने के बाद संबंधित विक्रेता के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।निरीक्षण के दौरान मेसर्स दीक्षित खाद भंडार बुढ़वल, दुर्गा खाद भंडार रामनगर तथा बिंदु कुमार अग्रवाल गनेशपुर के उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए। वहीं कड़डाकापुर स्थित बिंदु खाद भंडार और वर्मा खाद भंडार को अभिलेख अद्यतन रखने, स्टॉक बोर्ड प्रदर्शित करने तथा उर्वरकों की दरें सार्वजनिक रूप से अंकित करने के निर्देश दिए गए। उप जिलाधिकारी आकांक्षा गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि किसानों को खाद के साथ अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करना, टैगिंग करना अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक बेचना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित दुकानों का लाइसेंस तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा।उधर किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों पर कई दिनों से नेटवर्क और सर्वर की समस्या बताकर खाद वितरण टाला जा रहा है। मजबूरी में उन्हें निजी दुकानों से खाद खरीदनी पड़ रही है, जहां कुछ विक्रेता मनमानी वसूली कर रहे हैं। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि खाद की कालाबाजारी, टैगिंग या अधिक मूल्य वसूली की शिकायत तत्काल कृषि विभाग को दें, ताकि दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा सके।























