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Naradsamvad

पूर्व विधायक आगे, मंत्री पीछे! लोधेश्वर की तस्वीर से भाजपा पर दलित अपमान का हमला

Vivek Shukla
3 Min Read

रिपोर्ट/नारद संवाद न्यूज़ एजेंसी

रामनगर बाराबंकी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लोधेश्वर महादेवा दौरे की एक तस्वीर ने भाजपा की सामाजिक समरसता की राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर को लेकर विपक्ष और दलित संगठनों ने भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है। आरोप है कि सत्ता और संगठन में पद पाने की होड़ के बीच दलित नेताओं के सम्मान को पीछे धकेल दिया गया।तस्वीर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दुग्धाभिषेक करते नजर आ रहे हैं। उनके बिल्कुल समीप खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा और रामनगर के पूर्व विधायक शरद कुमार अवस्थी बैठे दिखाई दे रहे हैं। जबकि उत्तर प्रदेश सरकार के कारागार राज्य मंत्री सुरेश राही, एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद बैजनाथ रावत तथा हैदरगढ़ विधायक दिनेश कुमार रावत दूसरी पंक्ति में नजर आ रहे हैं।इसी तस्वीर को लेकर विपक्ष ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि एक पूर्व विधायक को मुख्यमंत्री के बराबर स्थान मिल जाता है, लेकिन सरकार के दलित मंत्री, आयोग अध्यक्ष और वर्तमान विधायक पीछे बैठाए जाते हैं। इससे भाजपा के दलित सम्मान और सामाजिक न्याय के दावों की हकीकत सामने आ जाती है।सोशल मीडिया पर भी तस्वीर को लेकर तीखी टिप्पणियां की जा रही हैं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या भाजपा में आज भी जातीय हैसियत और राजनीतिक प्रभाव पद और जिम्मेदारी से बड़ा है। कुछ पोस्ट में यह भी कहा गया कि दलित नेताओं की जरूरत चुनाव के समय तो पड़ती है, लेकिन मंच और सम्मान की बारी आने पर उन्हें पीछे कर दिया जाता है।राजनीतिक हलकों में चर्चा इस बात की भी है कि यदि बैठने की व्यवस्था प्रोटोकॉल के आधार पर थी तो फिर राज्य मंत्री और आयोग अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को पीछे रखने का आधार क्या था। विपक्ष इसी सवाल को लेकर भाजपा को कठघरे में खड़ा कर रहा है।हालांकि भाजपा समर्थकों का कहना है कि किसी भी वीवीआईपी कार्यक्रम में बैठने की व्यवस्था सुरक्षा और आयोजन संबंधी कारणों से तय होती है और केवल एक तस्वीर के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। लेकिन तस्वीर ने इतना जरूर कर दिया है कि भाजपा के दलित प्रतिनिधित्व और सम्मान की राजनीति पर नई बहस छिड़ गई है।मुख्यमंत्री का बाराबंकी दौरा विकास परियोजनाओं और महादेवा कॉरिडोर के शिलान्यास के लिए याद किया जाना था, लेकिन अब उसी कार्यक्रम की एक तस्वीर राजनीतिक विवाद और दलित सम्मान के सवालों के केंद्र में आ गई है।

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